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12 सांसदों के निलंबन पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- उन्हें ऐसी सजा मिले जो...

12 सांसदों के निलंबन पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- उन्हें ऐसी सजा मिले जो...

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखा है . (सांकेतिक फोटो)

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखा है . (सांकेतिक फोटो)

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी (Prahlad Joshi) ने सोमवार को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू (Rajya Sabha Chairman M Venkaiah Naidu ) को पत्र लिखकर कहा कि इस शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किए गए उच्च सदन के 12 निलंबित सदस्यों ने सदन का अपमान किया है और उन्हें ऐसी सजा दी जाना चाहिए जो मिसाल बन सके और प्रतिरोध का काम करने के साथ संसद की विश्वसनीयता को भी बहाल कर सके. उन्‍होंने कहा कि इन सदस्यों का व्यवहार ‘गैरकानूनी, आपराधिक और अपमानजनक’ था.

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    नयी दिल्ली. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी (Prahlad Joshi) ने सोमवार को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू  (Rajya Sabha Chairman M Venkaiah Naidu ) को पत्र लिखकर कहा कि इस शीतकालीन सत्र  (Parliament Winter Session)  की शेष अवधि के लिए निलंबित किए गए उच्च सदन के 12 निलंबित सदस्यों ने सदन का अपमान किया है और उन्हें ऐसी सजा दी जाना चाहिए जो मिसाल बन सके और प्रतिरोध का काम करने के साथ संसद की विश्वसनीयता को भी बहाल कर सके. नायडू को लिखे पत्र में जोशी ने पिछले सत्र में हुए घटनाक्रम का विस्तृत उल्लेख किया और कहा कि इन सदस्यों का व्यवहार ‘गैरकानूनी, आपराधिक और अपमानजनक’ था.

    उन्होंने गत मानसून सत्र का उल्लेख करते हुए कहा, ‘राज्यसभा के 254वें सत्र को निश्चित तौर पर हमारे संसदीय इतिहास का सबसे निंदनीय और शर्मनाक सत्र गिना जाएगा.’ संसद के सोमवार को आरंभ हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को पिछले मानसून सत्र के दौरान ‘अशोभनीय आचरण’ करने के लिए, वर्तमान सत्र की शेष अवधि तक के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया.

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    भेजे गए पत्र में कहा गया है कि टेबल पर खड़े होना, कुर्सी पर फाइलें फेंकना, संसदीय कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकना, संसद के कुछ सदस्यों द्वारा हिंसक व्यवहार, स्टाफ सदस्यों को डराना और घायल करना जैसे उपद्रवी और निंदनीय कृत्यों ने भारतीय लोकतंत्र को बदनाम किया है. इस तरह की परिस्थितियां अनुकरणीय उपायों की मांग करती हैं, जो न केवल भविष्य में ऐसी किसी भी अनियंत्रित और हिंसक घटनाओं के खिलाफ निवारक के रूप में कार्य करेगी, बल्कि यह मतदाताओं की नजर में संसद की विश्वसनीयता को बहाल करने का भी प्रयास करेगी.

    उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा, जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी. जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं.

    Tags: Parliament Winter Session, Prahlad Joshi, Rajya Sabha Chairman M Venkaiah Naidu

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