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लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने संबंधी विधेयक पर रिपोर्ट के लिए समिति को मिला 3 महीने का और समय

विवाह संबंधी विधेयक के अध्‍ययन को संसदीय कमेटी को मिला 3 और महीने का समय. (File pic)

विवाह संबंधी विधेयक के अध्‍ययन को संसदीय कमेटी को मिला 3 और महीने का समय. (File pic)

Marriage Bill in Parliament: इस विधेयक का महिलाओं और बच्‍चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले विशेषज्ञों की ओर से विरोध ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) का दूसरा चरण चल रहा है. इस दौरान राज्‍यसभा चेयरमैन वेंकैया नायडू (Venkaiah Naidu) ने सोमवार को उस संसदीय कमेटी (Parliamentary Committee) को तीन महीने का अतिरिक्‍त समय दिया है, जो प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्‍ड मैर‍िज (अमेंडमेंट) बिल, 2021 का अध्‍ययन कर रही है. इस विधेयक को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्‍मृति ईरानी ने पिछले साल दिसंबर में पेश किया था. इसका मुख्‍य उद्देश्‍य देश में लड़कियों की शादी की उम्र को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करना है.

हालांकि इस विधेयक का महिलाओं और बच्‍चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले विशेषज्ञों की ओर से विरोध किया गया था. ऐसे में इस विधेयक को संसदीय कमेटी को सौंपा गया था. इस कमेटी को अपनी रिपोर्ट 24 मार्च तक पेश करनी थी. लेकिन कमेटी के चेयरमैन विनय सहस्‍त्रबुद्धे की ओर से रिपोर्ट पेश कर की समयसीमा को बढ़ाने का आग्रह किया गया था. इसके बाद राज्‍यसभा चेयरमैन ने इसे मंजूर करके 3 महीने का समय और दे दिया है. अब कमेटी 24 जून तक संसद में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद देश में बाल विवाह और नाबालिगों के शोषण में कमी आने की बात कही जा रही है. देश में अलग-अलग धर्मों के विवाह को लेकर अपने खुद के भी मानक हैं. कानून में संशोधन वाले इस विधेयक की जद में सभी समुदाय और धर्म के लोग आएंगे.

जबकि अल्पसंख्यक संगठनों ने महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी उम्र बढ़ाने पर कोई आपत्ति नहीं की है, उन्होंने अपने समुदायों के भीतर विवाह के लिए अपनी खुद के नियम तय करने में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की है. बाल और महिला अधिकार कार्यकर्ता और साथ ही जनसंख्या व परिवार नियोजन के विशेषज्ञ इस आधार पर महिलाओं के लिए शादी की उम्र बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं कि इस तरह का कानून आबादी के एक बड़े हिस्से को अवैध विवाह के मामले में धकेल देगा.

उन्होंने तर्क दिया है कि महिलाओं के लिए विवाह की कानूनी उम्र 18 साल होने के बावजूद भारत में बाल विवाह जारी हैं और ऐसे विवाहों में कमी मौजूदा कानून के कारण नहीं है, बल्कि लड़कियों की शिक्षा और उनके रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी के कारण हुई है. उनका कहना है कि अंत में यह कानून बलपूर्वक होगा और यह अनुसूचित जाति-जनजातियों जैसे समुदायों को भी प्रभावित करेगा.

Tags: Budget, Marriage Law

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