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प्रेरणा, उत्साह और सशक्तिकरण: जब सात महिलाओं ने संभाला पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट

News18Hindi
Updated: March 9, 2020, 4:22 PM IST
प्रेरणा, उत्साह और सशक्तिकरण: जब सात महिलाओं ने संभाला पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपना सोशल मीडिया महिलाओं को समर्पित किया था.

विभिन्न क्षेत्रों जैसे स्वच्छता, कृषि और हस्तशिल्प के क्षेत्र में काम करनेवाली महिलाएं ख़ुद तो ट्विटर पर नहीं हैं, पर वो जो काम करती थीं उसकी चर्चा दिन भर सोशल मीडिया पर होती रही क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सोशल मीडिया अकाउंट संभाल रही थीं.

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नई दिल्ली. ये महिलाएं जल संरक्षण से लेकर सफ़ाई और दिव्यांगों के अधिकार के लिए काम करती हैं लेकिन इस रविवार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (Women's Day) के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने जब अपना सोशल मीडिया अकाउंट इन महिलाओं के हवाले किया तो उनकी आवाज़ दुनिया के कोने-कोने में सुनी गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर उस समय लोगों को अचरज में डाल दिया जब उन्होंने ट्वीट किया कि वे सोशल मीडिया से विदा लेना चाहते हैं. हालांकि बाद में इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपना अकाउंट सात खास महिलाओं को सौंपने वाले हैं.

इनमें स्वच्छता ऐक्टिविस्ट कानपुर की कलावती देवी; खेती में नए-नए उपाय आज़माने वाली बिहार के मुंगेर की वीणा देवी; बंजारा समुदाय की हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाली महाराष्ट्र की विजया पवार और और कश्मीर की परंपरागत हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के क्षेत्र में काम करती आरफ़ा जान जैसी महिलाएं शामिल हैं. इनमें से कोई ट्विटर पर नहीं हैं, लेकिन दिन भर उनके कामों की सोशल मीडिया पर चर्चा चलती रही है. इन महिलाओं ने लोगों से आत्मनिर्भर होने और अपने संबंधित क्षेत्रों से जुड़ने का आह्वान किया.



इस दौरान आरफा जान ने कहा, 'परंपरा और आधुनिकता का संगम अद्भुत होता है. मैं अपने कामों में इसको अनुभव करती हूं. इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह आधुनिक समय के बाज़ार के अनुकूल है. मेरी पहली व्यावसायिक गतिविधि दिल्ली में हाथ से बनी वस्तुओं की प्रदर्शनी में शामिल होना था. इस प्रदर्शिनी में अच्छे ग्राहक आए और व्यवसाय भी अच्छा हुआ.'



इसके लिए मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे उनको पूरे कश्मीर के शिल्प और वहां के शिल्पकारों के लिए और मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा. उन्होंने कहा - 'मैं समझती हूँ कि महिलाओं कि लिए यह ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है कि वे आत्मनिर्भर होने पर ज़्यादा ध्यान दें और दूसरी महिलाओं की मदद करें.'



इस दौरान लोगों को मालविका अय्यर की प्रेरणादायी कहानी के बारे में भी पता चला. 13 साल की उम्र में वह एक बम विस्फोट का शिकार हुईं जिसमें उसके दोनों हाथ चले गए और उसके पाँवों को भी भारी नुक़सान पहुँचा. वह बाद में प्रेरक वक़्ता, दिव्यांगों के अधिकारों की प्रवक्ता और मॉडल बनीं.



उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी हैंडल से यह ट्वीट कर कहा, 'हाथ पर हाथ धरकर बैठना कोई विकल्प नहीं है. आप अपनी सीमाओं को भूल जाइए और आत्मविश्वास और आशा से दुनिया का मुक़ाबला कीजिए... मैं मानती हूं कि बदलाव के लिए शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है. हमें युवा लोगों को भेदभाव संबंधी व्यवहार के बारे में बताने की ज़रूरत है. हमें दिव्यांगों को एक रोल मॉडल के रूप में पेश करने की ज़रूरत है न कि कमज़ोर और दूसरे पर निर्भर लोगों की तरह.'

एक शख्स ने पूछा- पासवर्ड क्या है?
इस दौरान कुछ लोगों के संदेशों का जवाब देने के दौरान हंसी-मजाक का मौका भी आया. यहां एक शख्स को मोदी के ट्विटर हैंडल से फॉलो भी किया गया, जबकि एक व्यक्ति ने जब अकाउंट का पासवर्ड जानना चाहा तो उससे कहा गया, 'नया भारत है, लॉग इन करने का प्रयास करते रहिए'.



ट्विटर का प्रयोग करने वाले एक व्यक्ति ने इसकी प्रशंसा करते हुए इसे 'नेक प्रयास' कहा और इन विशिष्ट महिलाओं से रूबरू कराने और उनकी उत्कृष्ट प्रेरणादायी कहानी को जानने का मौका देने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया.

इस दौरान भुखमरी को मिटाने के लिए काम करने वाली स्नेहा मोहनदोस ने भी अपनी कहानी सुनाई, जिसने कई लोगों को काफी प्रेरित किया. उन्होंने कहा, 'मैंने लोगों से बेघरों को खाना खिलाने का आग्रह किया. 'मैं पीएम के हैंडल का प्रयोग भुखमरी मिटाने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कर रही हूँ. क्या आप और अन्य लोगों मेरी मदद करेंगे? यह आसान है. जरूरतमंदों को खाना दीजिए और यह सुनिश्चित कीजिए कि कोई भी खाने की वस्तु बर्बाद न हो.'



मेहनत और मदद से झील में वापस आ गए पक्षी
उन्होंने कहा कि वह स्वयंसेवियों के साथ काम करती हैं और इनमें से कई भारत के बाहर रहते हैं ताकि भुखमरी को दूर किया जा सके और वह सामूहिक रूप से भोजन बनाना, कुकिंग मैराथन और ब्रेस्ट फ़ीडिंग के बारे में जागरूकता का अभियान चलाती हैं.

वहीं आरिफ़ा जान ने कहा कि वह हमेशा से यह चाहती थीं कि उन्हें कश्मीर की परंपरागत शिल्प को पुनर्जीवित करने के क्षेत्र में काम करने का मौक़ा मिले, क्योंकि यह स्थानीय महिलाओं को सशक्त करने का माध्यम है.

महिला शिल्पकारों की ख़राब दशा देखकर उन्होंने नमदा शिल्प को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया. कल्पना रमेश जल संरक्षण के लिए काम करती हैं. उन्होंने कहा कि छोटा प्रयास भी बड़ा अंतर पैदा कर सकता है और उन्होंने अन्य लोगों को भी जल के प्रयोग में सावधानी बरतने, वर्षा जल का संचय करने, झीलों को बचाने, प्रयुक्त जल को रिसाइकल करने और इस बारे में जागरूकता फैलाने को कहा.



उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीटर हैंडल से कहा 'मैंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि झील में पक्षियों को हम वापस ला पाएंगे और प्रधानमंत्री के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर पाएंगे. पर अगर इरादा पक्का हो तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है. सामूहिक प्रयास से हम अपने जल संसाधन के प्रबंधन के बारे में समुदाय में बदलाव ला सकते हैं. हमें समस्या को सुलझानेवाला बनाना चाहिए.'



उस दिन इस कार्यक्रम के दौरान ट्विटर फालोअर्स की संख्या में भारी इज़ाफ़ा हुआ. एक यूज़र ने कहा कि ट्विटर पर मोहनदोस के फ़ालोअर्ज़ की संख्या एक घंटा में ही दोगुनी हो गई, उन्होंने उम्मीद जताई की भुखमरी समाप्त करने के प्रयास भी अब दोगुने हो जाएंगे और उनके सभी फ़ालोअर्स उनके मिशन में सहभागी होंगे.

इसके बाद आईं मुंगेर में खेती-किसानी करने वाली वीणा देवी ने कहा, 'जहां चाह, वहां राह'. अगर इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है. अपने बिस्तर के नीचे एक किलो मशरूम उगाने के कारण मुझे प्रसिद्धी मिली. इसकी वजह से मैं न केवल आत्मनिर्भर बन पायी बल्कि मुझे एक नया जीवन मिला और एक नया आत्मविश्वास पैदा हुआ'.

कलावती गांव की सरपंच बन गई और अब वह अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षित करती हैं. जगह नहीं होने के कारण अपने घर में बेड के नीचे मशरूम उगाकर उन्होंने नाम कमाया.



कलावती देवी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, जिस जगह वह रहती थी वह गंदगी और कूड़े से भरा था पर इस बारे में दृढ़ थी कि स्थिति को बदला जा सकता है. स्वच्छता के बारे में उन्होंने लोगों को शिक्षित किया और शौचालय के निर्माण के लिए धन इकट्ठा किया. 'कम से कम मुझे तो इसमें सफलता मिली.'

विजय परवार ने दी महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय के हस्तशिल्प की जानकारी

महाराष्ट्र की विजय पवार ने कहा, 'आपने भारत के विभिन्न क्षेत्रों के हस्तशिल्प के बारे में सुना होगा. मेरे देशवासियों, मैं आपको महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय के बनाए हस्तशिल्प से आपका परिचय करा रही हूं. मैं पिछले दो दशक से इस पर काम कर रही हूं और इस काम में हज़ारों अन्य महिलाएं मेरी मदद कर रही हैं'. इनमें से कुछ ने अपनी इस यात्रा के बारे में बताने के लिए कुछ वीडियो संदेश भी पोस्ट किए.



प्रधानमंत्री इस समय दुनिया के ऐसे नेताओं में शुमार हैं, जिनके ट्विटर पर फ़ालोअर्स की संख्या 5.33 करोड़, फ़ेसबुक पर 4.4 करोड़ और इंस्टाग्राम पर 3.52 करोड़ है. कई लोगों को प्रधानमंत्री ने उनके सवालों का जवाब दिया और हँसी-मज़ाक़ के भी कई अवसर आए.

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First published: March 9, 2020, 3:23 PM IST
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