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Who was Tantya Mama? जिनके नाम पर इंदौर के स्टेशन का रखा जा रहा नाम

Who was Tantya Mama? जिनके नाम पर इंदौर के स्टेशन का रखा जा रहा नाम

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखने का फैसला किया है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखने का फैसला किया है.

Kon Hei Tantya Mama Bhil: भंवरकुआं चौराहा जननायक टंट्या मामा भील (Tantya Mama Bhil) चौराहा कहलाएगा जबकि इंदौर (Indore) में 53 करोड़ की लागत से बन रहे नये बस स्टैंड और पातालपानी रेलवे स्टेशन (Patalpani Railway Station) का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखा जाएगा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंडला में इसका ऐलान करते हुए कहा कि इंदौर के नए बस स्टैंड को टंट्या मामा भील बस स्टैंड के नाम से जाना जाएगा.

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    नई दिल्‍ली. भोपाल के हबीबगंज स्टेशन (Habibganj Station) के बाद अब इंदौर के भंवरकुआं चौराहे (Bhanwarkuan Chauraha) और पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम भी बदल दिया गया है. भंवरकुआं चौराहा जननायक टंट्या मामा भील (Tantya Mama Bhil) चौराहा कहलाएगा जबकि इंदौर (Indore) में 53 करोड़ की लागत से बन रहे नये बस स्टैंड और पातालपानी रेलवे स्टेशन (Patalpani Railway Station) का नाम टंट्या मामा के नाम पर रखा जाएगा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मंडला में इसका ऐलान करते हुए कहा कि इंदौर के नए बस स्टैंड को टंट्या मामा भील बस स्टैंड के नाम से जाना जाएगा. आइए आपको देश की आजादी के जननायक और आदिवासियों के हीरो टंट्या मामा भील से जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बाते बताते हैं.

    जानिए, कौन है ‘टंट्या माम भील’
    इतिहासकारों की मानें तो खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडदा में सन 1842 के करीब भाऊसिंह के यहां टंट्या का जन्म हुआ था. पिता ने टंट्या को लाठी-गोफन व तीर-कमान चलाने का प्रशिक्षण दिया. टंट्या ने धर्नुविद्या में दक्षता हासिल कर ली, लाठी चलाने और गोफन कला में भी महारत प्राप्त कर ली. युवावस्था में अंग्रेजों के सहयोगी साहूकारों की प्रताड़ना से तंग आकर वह अपने साथियों के साथ जंगल में कूद गया.

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    टंट्या के रॉबिनहुड बनने की कहानी
    टंट्या एक गांव से दूसरे गांव घूमता रहा. मालदारों से माल लूटकर वह गरीबों में बांटने लगा. लोगो के सुख-दुःख में सहयोगी बनने लगा. इसके अलावा गरीब कन्याओं की शादी कराना, निर्धन व असहाय लोगो की मदद करने से ‘टंट्या मामा’ सबका प्रिय बन गया. जिससे उसकी पूजा होने लगी.अमीरो से लूटकर गरीबों में बांटने के कारण वह आदिवासियों का रॉबिनहुड बन गया. बता दें कि रॉबिनहुड विदेश में कुशल तलवारबाज और तीरंदाज था, जो अमीरो से माल लूटकर गरीबों में बांटता था.

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    गिरफ्तार टंट्या मामा को देखने के लिए उमड़ा था जनसैलाब
    अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाला टंट्या मामा गरीबों की मदद करने के कारण बड़ा लोकप्रिय था. इसकी बानगी तब देखने को मिली, जब 11 अगस्त, 1896 को उसे गिरफ्तार करके अदालत में पेश करने के लिए जबलपुर ले जाया गया. इस दौरान टंट्या की एक झलक पाने के लिए जगह-जगह जनसैलाब उमड़ पड़ा था. जिसके बाद 19 अक्टूबर 1889 को टंट्या को फांसी की सजा सुनाई गयी और महू के पास पातालपानी के जंगल में उसे गोली मारकर फेंक दिया गया था. जहां पर इस ‘वीर पुरुष’ की समाधि बनी हुई है. वहां से गुजरने वाली ट्रेनें रूककर सलामी देती हैं.

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    इन क्षेत्रों से तक टंट्या मामला का प्रभाव
    टंट्या का प्रभाव मध्यप्रांत, सी-पी क्षेत्र, खानदेश, होशंगाबाद, बैतुल, महाराष्ट्र के पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा मालवा के पथरी क्षेत्र तक फ़ैल गया. टंट्या ने अकाल से पीड़ित लोगों को सरकारी रेलगाड़ी से ले जाया जा रहा अनाज लूटकर बटवा दिया. टंट्या मामा के रहते कोई गरीब भूखा नहीं सोएगा, यह विश्वास भीलों में पैदा हो गया था.

    Tags: Bhopal, Indore news

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