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एयरसेल-मैक्सिस डील: कार्ति और पी चिदंबरम को 7 अगस्‍त तक राहत, गिरफ्तारी पर रोक

पी चिदंबरम (फाइल फोटो)

पी चिदंबरम (फाइल फोटो)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील की ओर से 31 जुलाई को कार्ति की जमानत पर सुनवाई के वक्‍त चार्जशीट पर संज्ञान लेने की मां ...अधिक पढ़ें

    एयरसेल-मैक्सिस डील मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे को 7 अगस्‍त तक के लिए राहत मिल गई है. पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 अगस्‍त तक कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार न करने का आदेश दिया है. वहीं पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है. हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील की ओर से 31 जुलाई को कार्ति की जमानत पर सुनवाई के वक्‍त चार्जशीट पर संज्ञान लेने की मांग की गई है.

    पटियाला हाउस कोर्ट में चल रही सुनवाई के वक्‍त कपिल सिब्‍बल और अभिषेक मनु सिंघवी भी मौजूद रहे. बता दें कि एयरसेल-मैक्सिस कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रर्वतन निदेशालय कई बार पी चिदंबरम से पूछताछ कर चुका है. चिदंबरम ने इससे पहले विशेष न्यायाधीश ओ. पी. सैनी की अदालत में इस मामले में गिरफ्तारी से राहत की अपील की थी.

    एयरसेल-मैक्सिस मामला वर्ष 2006 में ग्लोबल कम्युनिकेशन होल्डिंग सर्विसेस लिमिटेड को एयरसेल में निवेश करने के लिए विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड से अनुमति दिलाए जाने से जुड़ा है.

    क्या थी एयरसेल-मैक्सिस डील
    -मैक्सिस मलेशिया की एक कंपनी है जिसका मालिकाना हक एक बिजनेस टॉयकून टी आनंद कृण्णन के पास है, जिन्हें टैक नाम से भी जाना जाता है. टैक श्रीलंका की तमिल पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले एक मलेशियाई नागरिक हैं.
    -एयरसेल को सबसे पहले एक एनआरआई टॉयकून सी सिवसंकरन (सिवा) ने प्रमोट किया था, जो कि तमिलनाडु के मूल निवासी थे.
    -साल 2006 में मैक्सिस ने एयरसेल की 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी. बाकी की 26 फीसदी हिस्सेदारी अब एक भारतीय कंपनी, जो कि अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप से संबंधित है के पास है।
    -इन 26 फीसदी शेयर का मालिकाना हक सुनीता रेड्डी के पास है जो कि अपोलो के ग्रुप फाउंडर डॉ सी प्रताप रेड्डी की बेटियों में से एक हैं.
    -ये डील उस वक्त विवादों के घेरे में आ गई, जब 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला उजागर हुआ. तब देश के सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वो इस मामले में ए राजा के पूर्ववर्ती मंत्रियों की जांच करे.

    पी चिदंबरम का कनेक्शन
    -प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि एयरसेल ने 2006 में 3,500 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लाने के लिए इजाजत मांगी थी लेकिन वित्त मंत्रालय ने इन आंकड़ों को कम करके दिखाया.
    -ईडी के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने मामले को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के पास जाने से बचाने के लिए दिखाया कि एयरसेल ने सिर्फ 180 करोड़ रुपये की FDI के लिए इजाजत मांगी है. उस समय लागू नियमों के मुताबिक 600 करोड़ रुपये तक के विदेशी निवेश को वित्त मंत्री FIPB के जरिए मंजूरी दे सकते थे.
    -ईडी का कहना है कि पी चिदंबरम को 600 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्‍ट प्रपोजल्‍स को मंजूरी देने का अधिकार था. इससे ऊपर के प्रोजेक्‍ट के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी की जरूरत थी.
    -यह मामला 3,500 करोड़ रुपये की एफडीआई की मंजूरी का था, इसके बावजूद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में चिदंबरम ने कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी के बिना मंजूरी दी.

    क्या हैं कार्ति चिदंबरम का कनेक्शन?
    - ईडी फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) के 2006 में मिले अप्रूवल को लेकर है. ईडी का ये भी कहना है कि ये अप्रूवल उस वक्त मिला जब देश के फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम यानी कार्ति के पिता थे.
    - 2013 में ऐसे ही एफआइपीबी क्लीयरेंस पाने वाली कंपनी को कार्ति चिदंबरम ने गुड़गांव स्थित अपनी संपत्ति को किराये पर दिया था, लेकिन जांच एजेंसियों के बढ़ते शिकंजे को देखते हुए उन्होंने अपनी इस संपत्ति को बेच दिया.
    - कार्ति पर ये भी आरोप है कि उन्होंने प्रोविजन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की कार्रवाई से परेशान होकर अपने कई बैंक अकाउंट्स बंद कर दिए और कई अकाउंट्स को बंद करने की कोशिश की.
    - बता दें कि ये मामला फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रपोजल को मंजूरी देने से जुड़ा है. 2006 में पी. चिदंबरम के फाइनेंस मिनिस्टर रहते ही एयरसेल मैक्सिस के 600 करोड़ के विदेशी निवेश सौदे को मंजूरी दी गई थी.
    - 3500 करोड़ से ज्यादा के एफडीआई के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) का अप्रूवल लिया जाना था। हालांकि अप्रूवल लिया ही नहीं गया.

    Tags: Delhi

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