शिवराज मामा के राज में बहनों को जननी सुरक्षा योजना के 1400 रूपयों का इंतज़ार!

शिवराज मामा के राज में बहनों को जननी सुरक्षा योजना के 1400 रूपयों का इंतज़ार!
साभार: आईबीएन7

जननी सुरक्षा योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार की महिलाओं को अस्पताल में डिलीवरी कराने पर 1400 रूपये मिलते हैं। सारा पेमेंट ऑनलाईन किया जाता है।

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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज के राज में आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का भी फायदा नसीब नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सभाओं में खुद को महिलाओं का भाई बताते हैं लेकिन बैतूल ज़िले में गरीब महिलाओं को भांजा भांजी पैदा होने पर जननी सुरक्षा योजना के 1400 रूपये नहीं मिले हैं। महिलाओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मन की बात कही है।

महिलाओं ने चिट्ठी में लिखा है, ‘आदरणीय शिवराज भैया, भैया हम सभी महिलाएं धावड़ाखार गांव की हैं। हम लोगों के प्रसव चूनालोमा औऱ बैतूल अस्पताल में हुए हैं। किसी को छह महीने हो गए, किसी को तीन महीने। पर प्रसव की राशि अभी तक नहीं मिली है।

इंतज़ार की इम्तेहां होने के बाद मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले की बगैर पढ़ी लिखी महिलायें अपने गांव की एक पढ़ी लिखी लड़की से शिवराज के नाम चिट्ठी लिखवा रहीं हैं। खत का मजमून पढ़कर आप समझ गये होंगे कि माज़रा क्या है। मनीषा की कहानी मामले को बेहतर तरीके से समझा देगी। बैतूल ज़िले के धावपाखार गाँव में रहने वाली मनीषा ध्रुवे ने छह महीने पहले एक बेटी को जन्म दिया था। सरकारी अस्पताल में मनीषा को बताया गया कि कि सरकार की जननी सुरक्षा योजना में 1400 रूपये मिलेंगे। लेकिन आज तक मनीषा इंतज़ार में बैठी है।



मनीषा अकेली नहीं है। इस गांव समेत पास के दूसरे गांव में कम से कम एक दर्जन ऐसी महिलाए हैं जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाई मानकर जननी सुरक्षा योजना के पैसे के इंतज़ार में बैठी हैं। कुछ केस तो ऐसे हैं जिनमें बच्चा बीस महीने का हो गया लेकिन जननी सुरक्षा का पैसा मां को नहीं मिला।



जननी सुरक्षा योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार की महिलाओं को अस्पताल में डिलीवरी कराने पर 1400 रूपये मिलते हैं। सारा पेमेंट ऑनलाईन किया जाता है। प्रशासन की दलील है महिलाओं के खाते ही नहीं है तो पैसा कैसे जमा करें।

बैतूल के प्रभारी सीएमएचओ डॉ के आठनेरे कहते हैं कि इस तरह की शिकायतें आ रही हैं कि प्रसव के बाद महिलाओं को प्रसव प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं की गलती सामने आई है। जब उन्हें मालूम होता है कि अगर कोई महिला गर्भवती है तो उसका बैंक में खाता खुलवाना चाहिए।

अब सवाल ये उठता है कि खाता न खुल पाने के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं? अगर केन्द्र सरकार जनधन योजना में करोड़ों लोगों के खाते खुलवा सकती है। तो कई साल से चल रही जननी सुरक्षा योजना में खाते खुलवाने में मध्य प्रदेश की सरकार पीछे क्यों रह जाती है जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने भाषणों में महिलाओं को बहन बनाकर बच्चों से भांजे भांजी का रिश्ता बनाते हैं।
First published: September 22, 2016, 11:50 PM IST
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