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महबूबा मुफ्ती ने J&K के गवर्नर रहे सत्यपाल मलिक को भेजा कानूनी नोटिस, 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग

महबूबा मुफ्ती ने J&K के गवर्नर रहे सत्यपाल मलिक को भेजा कानूनी नोटिस, 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग

जम्मू-कश्मीर के पूर्व और वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के पूर्व और वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक. (फाइल फोटो)

PDP Legal Notice Satya Pal Malik: एक वायरल वीडियो में सत्यपाल मलिक को कथित तौर पर यह दावा करते हुए देखा जा सकता है कि अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को रोशनी योजना के तहत भूखंड मिले थे.

    श्रीनगर. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की उनके खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उन्हें शुक्रवार को एक कानूनी नोटिस भेज कर 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की. समाचार एजेंसी एएनआई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

    दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कुछ दिन पहले कथित तौर पर कहा था कि महबूबा मुफ्ती को रोशनी योजना का लाभ मिला था, जिसका लक्ष्य राज्य सरकार की जमीन के कब्जेदार को शुल्क के एवज में मालिकाना हक देना था.

    सत्यपाल मलिक ने क्या कहा
    वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में, मलिक को कथित तौर पर यह दावा करते हुए देखा जा सकता है कि अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को रोशनी योजना के तहत भूखंड मिले थे. मलिक अनुच्छेद 370 निरस्त किये जाने के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे. अब वह मेघालय के राज्यपाल हैं.

    30 दिनों के अंदर 10 करोड़ रुपए अदा करने को कहा
    महबूबा के वकील अनिल सेठी ने कानूनी नोटिस में लिखा है, “मेरी मुवक्किल की प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान की भरपाई कोई रकम नहीं कर सकती, फिर भी मेरी मुवक्किल ने मुआवजा के लिए आप पर मुकदमा करने का फैसला किया है.” नोटिस में मलिक से मुआवजे के तौर पर 30 दिनों के अंदर 10 करोड़ रुपये अदा करने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने को कहा गया है. इसमें कहा गया है कि मुआवजे की राशि का इस्तेमाल महबूबा द्वारा कोई निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक भलाई के लिए की जाएगी.

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    इससे पहले बुधवार को महबूबा ने मलिक से अपनी टिप्पणी वापस लेने को कहा था. पीडीपी प्रमुख ने दो दिन पहले ट्वीट किया था, “उनके पास अपनी टिप्पणी वापस लेने का विकल्प है, जिसमें नाकाम रहने पर मैं कानून का सहारा लूंगी.”

    क्या है रोशनी अधिनियम
    गौरतलब है कि रोशनी अधिनियम फारूक अब्दुल्ला की सरकार में लागू किया गया था, जिसमें राज्य सरकार की जमीन के कब्जेदार को शुल्क देकर मालिकाना हक देने का प्रावधान था. इस योजना से प्राप्त राशि का इस्तेमाल राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं पर खर्च किया जाना था. हालांकि, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने इस कानून को गैर-कानूनी करार देकर रद्द कर दिया था और लाभार्थियों की जांच करने की जिम्मेदारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी.

    पिछले साल नवंबर में, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को योजना लाभार्थियों की सूची में नामित किया और आरोप लगाया कि जम्मू में अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि पर एक घर बनाया गया था. हालांकि फारूक और उमर ने इसका खंडन किया था.

    (इनपुट भाषा से भी)

    Tags: Jammu kashmir, Mehbooba mufti, PDP

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