महबूबा मुफ्ती का आरोप- PDP विधायकों को NIA रेड से डराया जा रहा है

पार्टी का नाम लिए बिना उन्होने बीजेपी पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि कई पीडीपी विधायकों ने महबूबा को व्यक्तिगत रूप से बताया था कि उन्हें उनकी पार्टी से दूर करने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है.


Updated: July 21, 2018, 4:06 PM IST
महबूबा मुफ्ती का आरोप- PDP विधायकों को NIA रेड से डराया जा रहा है
महबूबा मुफ्ती (File photo)

Updated: July 21, 2018, 4:06 PM IST
जम्मू-कश्मीर में गठबंधन की सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद, पीडीपी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पहली बार पार्टी में मौजूदा संकट पर बात की है. महबूबा ने कहा कि उनके विधायकों को मजबूर किया जा रहा है और एनआईए रेड के साथ पार्टी छोड़ने की धमकी दी गई है.

पार्टी का नाम लिए बिना उन्होने बीजेपी पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि कई पीडीपी विधायकों ने महबूबा को व्यक्तिगत रूप से बताया था कि उन्हें उनकी पार्टी से दूर करने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने न्यूज 18 को बताया कि मैं यह नहीं कह रही कि ये सब नई दिल्ली से हो रहा है, लेकिन मैने वहां कुछ लोगों से बात कि और उनसे कहा कि मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से एक धारणा बनाई जा रही है कि विधायकों को पैसे के साथ खरीदा जा सकता है या फिर महत्वपूर्ण कैबिनेट पोर्टफोलियो के लिए पीडीपी छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, और अगर वे इसे अस्वीकार करते हैं, तो उन्हें एनआईए छापे से धमकी दी जा रही है.

पीडीपी से बाहर होने वाले विधायकों के सवाल पर महबूबा ने कहा, "कश्मीर एक ऐसी जगह है जहां अलगाववाद, मुख्यधारा की राजनीति और आतंकवाद अक्सर सह-अस्तित्व में रहते है, लेकिन एनआईए का मुद्दा घाटी के लिए बड़ा खतरा हो सकता है.

पीडीपी तोड़ने के परिणामस्वरूप सलाहुद्दीन जैसे और भी आतंकी पैदा होने की टिप्पणी पर महबूबा ने कहा, 'अगर आप पीडीपी को तोड़ेंगे तो आप उन लोगों का सामना कैसे कर पाएंगे, जिन्होंने पीडीपी या कांग्रेस या नेशनल कांफ्रेंस को वोट देने के लिए गोलियां झेली हैं? आप लोकतंत्र के प्रति उनके विश्वास को तोड़ रहे हैं.'

तत्कालीन मुख्यमंत्री- फारूक अब्दुल्ला को बर्खास्त करने और उनकी जगह गुलाम मोहम्मद शाह को नियुक्त करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास फिर से 1984 की स्थितियां पैदा कर रही हैं.

पीडीपी के प्रमुख के रूप में मुफ्ती संभवतः अपने राजनीतिक करियर में सबसे कठिन चरण से गुजर रही हैं, जब कई विद्रोही विधायक पार्टी को विभाजित करने या उन्हे हटाने के बारे में कह रहे हैं और बीजेपी में शामिल होने के बारे में कह रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, इस तरह के विद्रोही विधायकों की संख्या लगभग 15 है.
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बता दें कि News18 ने 2 जुलाई को खबर दी थी कि अमरनाथ यात्रा के बाद सरकार बनाने के लिए पीडीपी में संभावित टूट हो सकती है और बागी लोग बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सदस्य हैं, जिसका अर्थ है सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों चाहिए.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 सदस्य हैं यानी सरकार बनाने के लिए कम से कम 44 सदस्यों का समर्थन जरूरी है. फिलहाल यहां गठबंधन की ही सरकार बन सकती है, क्योंकि किसी भी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है. यहां 28 विधायकों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी है, इसके बाद 25 विधायकों के साथ बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं. यहां सज्जाद लोनी की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के दो, सीपीएम का एक, पीडीएफ का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं.

बीजेपी जम्मू-कश्मीर में एकमात्र पार्टी है जिसके सदस्यों ने राज्य नेतृत्व में सरकार बनाने की इच्छा जाहिर की है. अन्य दलों (नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस) ने गठबंधन बनाने की संभावना से निजी और सार्वजनिक रूप से इनकार कर दिया. दोनों पार्टियां राज्यपाल एनएन वोहरा से सदन को भंग करने और नए चुनावों के लिए राज्य तैयार करने के लिए कह रही हैं.

3 जुलाई को न्यूज 18 से बात करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर कहा कि, आने वाले दिनों में मैं न सिर्फ पीडीपी बल्कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के असंतुष्ट विधायकों को देख सकता हूं, जिनके द्वारा एक नया मोर्चा बनाने की संभावना है. "
First published: July 20, 2018, 9:49 PM IST
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