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पीडीपी के नेता नईम अख्तर पर लगा पीएसए, घाटी के छठे नेता जिन पर ये कार्रवाई हुई

भाषा
Updated: February 8, 2020, 11:06 PM IST
पीडीपी के नेता नईम अख्तर पर लगा पीएसए, घाटी के छठे नेता जिन पर ये कार्रवाई हुई
नईम अख्तर के अलावा उमर अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ्ती पर भी पीएसए लगाया गया है. फोटो. twitter

पीडीपी नेता नईम अख्तर (PDP Leader Naeem Akhtar) कश्मीर में मुख्यधारा के छठे नेता हैं, जिन पर विवादित कानून पीएसए (PSA) के तहत कार्रवाई की गई है. यह कानून 1978 में लकड़ी की तस्करी पर लगाम कसने के लिए लागू किया गया था.

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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) प्रशासन ने वरिष्ठ पीडीपी नेता नईम अख्तर (Naeem Akhtar) पर कठोर जनसुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत कार्रवाई की है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. नईम अख्तर कश्मीर में मुख्यधारा के छठे नेता हैं, जिन पर विवादित कानून पीएसए के तहत कार्रवाई की गई है. यह कानून 1978 में लकड़ी की तस्करी पर लगाम कसने के लिए लागू किया गया था. बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर पिछले साल सितंबर में पीएसए लगाया गया था, जबकि दो अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों - उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती- के खिलाफ गत गुरुवार को इस कानून के तहत कार्रवाई की गई.

नेशनल कांफ्रेस (National Conference) के महासचिव अली मोहम्मद सागर और पीडीपी (PDP) नेता सारा मदनी को भी पीएसए (PSA) कानून के तहत हिरासत में लिया गया है. बता दें कि पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद -370 (Article 370) को निरस्त करने की घोषणा के बाद कश्मीर में मुख्य धारा के कई नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया. इनमें से करीब 20 नेताओं को या तो रिहा कर दिया गया है या फिर उन्हें उनके आवास पर ही नजरबंद किया गया है.

क्या है पब्लिक सेफ्टी एक्ट
जम्मू कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट 1978 राज्य का सबसे कठोर कानून है. इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट और बिना कारण बताए दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. इसमें कोर्ट ट्रॉयल और चार्जेज लगाना भी जरूरी नहीं है. आमतौर पर पुलिस हिरासत में लिए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है. लेकिन पीएसए एक्ट में बिना कोर्ट में पेश किए किसी व्यक्ति को 2 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

इस एक्ट के प्रावधान काफी कड़े हैं. इसमें बिना किसी आरोप के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखा जा सकता है. हालांकि किसी-किसी मामले में ये प्रावधान होता है कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति अपने ऊपर लगाए गए आरोप की जानकारी मांग सकता है. किसी-किसी मामले में हिरासत में लिया गया व्यक्ति सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती भी दे सकता है. हालांकि हिरासत में रखने वाला प्रशासन, आरोपों के बारे में जानकारी देने को सार्वजनिक हितों के खिलाफ बताकर, जानकारी देने से मना कर सकता है. ये एक्ट पूरे जम्मू कश्मीर पर लागू है.

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First published: February 8, 2020, 9:36 PM IST
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