अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में शांति, इस साल पत्थरबाज़ी की केवल 40 घटनाएं

अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में शांति, इस साल पत्थरबाज़ी की केवल 40 घटनाएं
साल 2019 में सुरक्षा बलों के खिलाफ कुल 666 बार पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुई, जबकि 2018 में 851 बार ऐसे मामले सामने आए थे.

अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटने की पहली वर्षगांठ पर जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में सुरक्षा हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं. जहां एक तरफ सुरक्षा बलों को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है. वहीं, पत्थरबाज़ी की घटनाओं में भी भारी कमी देखने को मिल रही है.

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श्रीनगर. अनुच्छेद 370 (Article 370) के हटने की पहली वर्षगांठ पर जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में सुरक्षा हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं. जहां एक तरफ सुरक्षा बलों को आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है. वहीं, पत्थरबाज़ी की घटनाओं में भी भारी कमी देखने को मिल रही है. सुरक्षा एजेंसियों की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जून तक कश्मीर में केवल 40 पत्थरबाज़ी की घटनाएं दर्ज हुई है. पिछले सालों की तुलना में यह आंकड़ा बहुत कम है.

साल 2019 में सुरक्षा बलों के खिलाफ कुल 666 बार पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुई, जबकि 2018 में 851 बार ऐसे मामले सामने आए थे.

2017 में 574 जवान हुए थे घायल
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार की 2017 में 623 पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुई, जिसमें 574 CRPF के जवान और 471 नागरिक घायल हो गए थे और 199 गाड़ियां को नुकसान पहुंचाया गया. रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुई हैं. 2016 में 1587 पत्थरबाज़ी की घटनाओं में 3005 CRPF के जवान और 971 नागरिक घायल हुए थे. 2016 में 461 गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया.
2018 में पत्थरबाजी में 36 नागरिक और 551 CRPF जवान ज़ख़्मी हुए थे और 252 गाड़ियों को नुकसान हुआ था. 2019 में 323 CRPF जवान ज़ख़्मी हुए थे और 129 गाड़ियों को नुकसान हुआ था.



इस साल जून तक पत्थरबाजी में 15 CRPF जवान ज़ख़्मी हुए और 14 गाड़ियों को नुकसान हुआ. हालांकि जानकारों के मुताबिक हिंसा में आए दिन कमी के पीछे सुरक्षा बलों की बेहतर रणनीति के साथ साथ कोविड-19 का संक्रमण भी एक वजह हो सकता है.

अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंक की कमर टूटी
अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद आतंकवाद की घटनाओं में करीब 36% की गिरावट आई है. पिछले साल (जनवरी से 15 जुलाई तक) घाटी में कुल 188 आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं हुई हैं, वहीं इस साल इसी अवधि में 120 आतंकी घटनाएं हुई. वहीं इस अवधि में 2019 में 126 आतंकी मारे गए, जबकि इस साल इसी अवधि में 136 आतंकियों का खात्मा हुआ.

पिछले साल आतंकी हमलों में 23 आम नागरिक मारे गए. वहींं, 75 सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए. इस साल 22 आम नागरिक मारे गए और 35 जवान शहीद हुए. अगर IED हमलों की तुलना करें तो इस अवधि में पिछले साल 6 IED हमले हुए, वहीं इस साल 15 जुलाई तक केवल 1 IED हमला हुआ.

सुरक्षाबलों ने कई आतंकी सरगना को किया ढेर
इस एक साल में सुरक्षाबलों को मिली कामयाबी में हिज़्बुल मुजाहिद्दीन का कमांडर रियाज़ नाइकू, लश्कर का कमांडर हैदर, जैश का कमांडर कारी यासिर और अंसार ग़ज़वात-उल-हिन्द का बुरहान कोका भी मारा गया. इसके अलावा 22 आतंकी और करीब उनके 300 मददगार गिरफ्तार किए गए.

इतना ही नहीं स्थानीय युवाओं के आतंकी संगठनों में शामिल होने में भी 40% की कमी आई है, इस साल केवल 67 युवाओं को बरगला कर आतंक की राह पर भेजा गया.
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