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ओपिनियन: शांति, विकास, राजनीति, पैसा और पाकिस्तान, नए कश्मीर की राह में फिलहाल कई बाधाएं

News18Hindi
Updated: September 29, 2019, 6:40 PM IST
ओपिनियन: शांति, विकास, राजनीति, पैसा और पाकिस्तान, नए कश्मीर की राह में फिलहाल कई बाधाएं
खाली पड़ी श्रीनगर की एक प्रमुख सड़क (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmirs) में एक मजबूत अर्थव्यवस्था और आधारभूत संरचना (Solid Economy and Infrastructure) विकसित करने की जरूरत है. लेकिन यह कई सारी बातों पर निर्भर करता है.

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  • Last Updated: September 29, 2019, 6:40 PM IST
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(कल्याणी शंकर)

नई दिल्ली. मुगल बादशाह जहांगीर (Jehangir) के लिए कश्मीर (Kashmir) धरती का स्वर्ग था. इसे लेकर उनका चर्चित वाक्य ऐसा है: 'गर फिरदौस बर रुए जमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त'. लेकिन पिछले कुछ सालों में कश्मीर एक परेशानियों से घिरा स्वर्ग रहा है.

पिछले हफ्ते महाराष्ट्र चुनावों (Maharashtra Elections) के लिए बीजेपी (BJP) के प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने कहा था, 'हम फिर से जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) को धरती पर स्वर्ग बनाना चाहते हैं और हर कश्मीरी को गले लगाना चाहते हैं.'

भविष्य के बारे में अपने प्लान के बारे में बताते हुए, उन्होंने कहा, पहले लोग 'कश्मीर हमारा है' के नारे लगाया करते थे लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम कश्मीर को विकास की नई ऊंचाईयों तक ले जाएं. अब नारा है, 'नया कश्मीर बनाना है.' इसके लिए लोगों का समर्थन मांगते हुए प्रधानमंत्री (Prime-Minister) ने हाल ही में कहा, 'कश्मीर से बड़ा कोई निर्णय नहीं है.'

क्या मोदी एक नया कश्मीर बना पाएंगे? वास्तव में यह संभव है लेकिन इसे एक दिन में या एक साल में नहीं किया जा सकता है. पिछले महीने राज्य का विशेष दर्जा (Special Status) खत्म होने के बाद फिलहाल राज्य में अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए लगता है कि अभी इस काम में लंबा वक्त लगने वाला है. दुर्भाग्य से राज्य लंबे वक्त तक विवादों, हिंसा और अव्यवस्था से जूझता रहा. इन परिस्थितियों के चलते पिछली दो पीढ़ियों में बच्चों ने अपना बचपन खो दिया. इसके सभी जिम्मेदारों, जिसमें स्थानीय लोग, प्रशासन, राजनीतिज्ञ और राष्ट्रीय पार्टियों को साथ आकर कश्मीर को फिर से अच्छी सेहत में लाना होगा. इन सबसे पहले एक साफ रास्ते की तैयारी करना है और सरकार को अपने वादे को निभाने के लिए आत्मविश्वासी होना पड़ेगा.

मोदी सरकार ने कश्मीर की परिस्थितियों को अभी तक सुलझे हुए तरीके से संभाला है. इसका प्रभाव तभी समझ आएगा जब सुरक्षा के लिए किए गए विशेष प्रबंधों को हटा दिया जाएगा और जो नेता 5 अगस्त से हिरासत में हैं, उन्हें छोड़ दिया जाएगा. सरकार की पहली प्राथमिकता घाटी में परिस्थितियों को जल्दी से जल्दी सामान्य बनाना है और छीना गया राज्य का दर्जा (Status of State) भी भविष्य में वापस कर दिया जाएगा.

सरकार दावा करती है कि ज्यादातर प्रतिबंधों में छूट दे दी गई है, स्कूलों को फिर से खोल दिया गया है और टेलीफोन सेवाएं फिर से स्थापित कर दी गई हैं. हालांकि अभी तक राजनीतिक कैदियों को छोड़े जाने का कोई संकेत नहीं है. इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती, फारुख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के नाम भी शामिल हैं.
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कूटनीतिक स्तर पर, विदेश मंत्रालय (Ministry of Foreign Affairs) ने आक्रामक कूटनीति की शुरुआत कर दी है. खुद प्रधानमंत्री मोदी इसका नेतृत्व कर रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय विचार को भारत के पक्ष में लाया जा सके. सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि कश्मीर पर बिना प्रभाव डाले आतंकियों के बीच होने वाली बातचीत को रोक पाना संभव नहीं था. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि 5 अगस्त से पहले घाटी गड़बड़ में फंसी हुई थी.

अभी तक कूटनीति को सफलता मिली है, चूंकि दुनिया की बड़ी ताकतों ने अभी कश्मीर की परिस्थिति से निपटने के भारत के तरीके की आलोचना नहीं की है और इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताया है. हालांकि अगर प्रतिबंध जारी रहे, भारत की साख को मानवाधिकार समूहों (Human Rights Groups) के जरिए दबाव में डाला जा सकता है.

दूसरी ओर, केंद्र के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में से एक कश्मीरी हिंदुओं को फिर से बसाना है. करीब तीन दशक गुजर चुके हैं लेकिन कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) जिन्हें अपने घरों से बाहर निकाल दिया गया था, अपने घर नहीं लौट सके हैं. जब मोदी पंडितों के एक प्रतिनिधि दल से इस हफ्ते ह्यूस्टन में मिले, उन्होंने उनसे कहा, कश्मीर में नई हवा बह रही है और हम एक नया कश्मीर बनाएंगे जो सभी के लिए होगा.

तीसरी ओर, मोदी, जम्मू-कश्मीर के लिए महत्वाकांक्षी रहे हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों से विकास, नौकरियों और शांति का वादा किया है. उन्होंने अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं, नए रेलवे, एयरपोर्ट और रोड का भी लोगों से दावा किया है. उन्होंने घोषणा की है, हम जम्मू-कश्मीर को नई ऊंचाईयों पर ले जाएंगे.

पीएम मोदी ने बॉलीवुड (Bollywood) के लोगों को भी कश्मीर जाकर यहां पर फिल्मों की शूटिंग की शुरुआत करने को कहा है, जो तभी हो सकता है जब यहां पर पूरी तरह से सामान्य हालात वापस आ जाएं.

राजनीतिक नेतृत्व के तौर पर मोदी सरकार अब्दुल्ला और मुफ्तियों का कश्मीर की राजनीति में प्रभुत्व खत्म कर नए और युवा नेताओं को यहां राजनीति में आने के लिए प्रेरित करना चाहती है. बीजेपी (BJP) भी नई पीढ़ी के नेताओं से नए चेहरे चुन रही है.

अब कश्मीरियों के सामने इस मौके को एक मजबूत अर्थव्यवस्था (Strong Economy) और मूलभूत ढांचे में अपने फायदे के लिए बदलने का मौका है. अगर शांति की बहाली होती है, अगर विकास का सिक्का चलता है, अगर राजनीतिक दल साथ मिलकर जम्मू और कश्मीर को उबारते हैं और पाकिस्तान को इससे दूर रखते हैं- हालांकि ऐसे ही कई अगर और हैं- तो इस बात को मानने में हमें कोई गुरेज़ नहीं होना चाहिए कि एक नया कश्मीर बनाया जा सकता है.

(लेखिका एक राजनीतिक विचारक हैं. यहां व्यक्त किए गए विचार उनके अपने हैं.)

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First published: September 29, 2019, 5:26 PM IST
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