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पेंडिंग मामलों पर ध्यान नहीं दे पाने का CJI को खेद, रिटायर होने से पहले जूनियर वकीलों को दिए टिप्स

CJI के अनुसार जब तक बार एसोसिएशन अपने पूरे दिल से सहयोग करने को तैयार नहीं होता, तब तक आवश्यक बदलाव लाना मुश्किल होगा.

CJI के अनुसार जब तक बार एसोसिएशन अपने पूरे दिल से सहयोग करने को तैयार नहीं होता, तब तक आवश्यक बदलाव लाना मुश्किल होगा.

CJI के मुताबिक वह पेंडिंग मामलों पर अधिक ध्यान नहीं दे सकें और इसके लिए उन्हें खेद है. उन्होंने युवा वकीलों को अपने माम ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

भारत के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में रिटायर हो रहे जस्टिस एनवी रमना.
सीनियर वकीलों को दी जूनियर का मार्गदर्शन करने की सलाह.
CJI रमना के कार्यकाल में पूरी क्षमता से सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई.

नई दिल्ली. देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में आज रिटायर हो रहे एनवी रमना ने लंबित मामलों को एक ‘बड़ी चुनौती’ बताते हुए उन्हें निपटाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने पर खेद व्यक्त किया है. रिटायर होने से पहले सीजेआई ने कहा कि समाधान खोजने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस को तैनात करने की आवश्यकता है.

औपचारिक पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति रमना ने कहा, “हालांकि हमने कुछ मॉड्यूल विकसित करने की कोशिश की, लेकिन अनुकूलता और सुरक्षा मुद्दों के कारण, हम ज्यादा प्रगति नहीं कर सके.” उन्होंने कहा कि COVID​​​​-19 महामारी के दौरान उनकी प्राथमिकता अदालतों को चलाना था लेकिन कामर्शियल प्रतिष्ठानों की तरह वह सीधे बाजार से तकनीकी उपकरणों को नहीं ले सकते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि हमें इस तथ्य को स्वीकार करना होगा कि लंबित मामले हमारे सामने एक बड़ी चुनौती हैं. CJI के मुताबिक वह पेंडिंग मामलों पर अधिक ध्यान नहीं दे सकें और इसके लिए उन्हें खेद है. उन्होंने युवा वकीलों को अपने मामलों को शीर्ष अदालत में सूचीबद्ध कराने में आने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया. दिन के अपने पहले विदाई भाषण में, न्यायमूर्ति रमना ने कहा कि न्यायपालिका की जरूरतें बाकी जरूरतों से अलग थीं. CJI के अनुसार जब तक बार एसोसिएशन अपने पूरे दिल से सहयोग करने को तैयार नहीं होता, तब तक आवश्यक बदलाव लाना मुश्किल होगा.

‘जूनियर का मार्गदर्शन करें वरिष्ठ वकील’
जूनियर वकीलों पर अपनी राय देते हुए चीफ जस्टिस रमना ने कहा कि पेशे में प्रवेश करने वाले जूनियर वरिष्ठ वकीलों को अपने आदर्श के रूप में देखते हैं. उन्होंने सभी वरिष्ठों से अनुरोध किया कि वे जूनियर वकीलों को सही रास्ते पर चलने के लिए मार्गदर्शन करें. CJI ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका समय के साथ विकसित हुई है और इसे किसी एक आदेश या निर्णय से परिभाषित या आंका नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि जब तक संस्था की विश्वसनीयता की रक्षा नहीं की जाती है, इस न्यायालय के अधिकारी होने के नाते, लोगों और समाज से सम्मान प्राप्त नहीं किया जा सकता है.

पहली बार शीर्ष अदालत में 34 न्यायाधीशों की पूरी ताकत
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने CJI के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय में 224 रिक्तियों को दाखिल किया गया था और न्यायाधिकरण में 100 से अधिक सदस्यों को प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति रमना के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किया गया था. उन्होंने सीजेआई की उपलब्धियों को ‘उल्लेखनीय’ करार दिया और कहा कि रिक्तियां उनके कार्यकाल के दौरान भरी गईं और पहली बार शीर्ष अदालत में 34 न्यायाधीशों की पूरी ताकत थी.

Tags: CJI NV Ramana, Supreme Court

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