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    सरकारी स्कूल में चपरासी हैं फिजिक्स में MSc कमल, टीचर की गैरमौजूदगी में लेते हैं क्लास

    प्रतीकात्मक तस्वीर
    प्रतीकात्मक तस्वीर

    अंबाला के स्कूल में चपरासी कमल एमएससी हैं, लेकिन वह सरकारी नियमों के अनुसार छात्रों को पढ़ाने के लिए अयोग्य हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: February 29, 2020, 8:12 AM IST
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    अंबाला. हरियाणा (Haryana) के अंबाला (Ambala) स्थित मजरी (Majri) में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के चपरासी कमल सिंह एक साथ दो काम करते हैं. एक ओर तो वह स्कूल में अपनी प्यून की ड्यूटी निभाते हैं, साथ ही वह कक्षा 9वीं के छात्रों को गणित भी पढ़ाते हैं. इसकी वजह यह है कि 400 छात्रों के लिए सिर्फ 19 टीचर्स हैं. इसमें से भी मैथ्स के लिए क्वालिफाइड मैथ्स टीचर सिर्फ एक है. अकेले मैथ्स के टीचर पर हफ्ते में 54 क्लासेज लेना और फिर इलेक्शन ड्यूटी के साथ अन्य काम करने की भी जिम्मेदारी है.

    इस मामले में डिप्टी डीईओ सुधीर कालरा ने कहा, 'कमल फिजिक्स में एमएससी हैं और जब गणित के टीचर के पास काम का भार ज्यादा हो गया था, तो वह प्रिंसिपल के पास गया और कुछ क्लासेज खुद पढ़ाने की मांग की. मैंने सुना है कि उन्होंने बेहद अच्छी तरह पढ़ाया और छात्रों को उनकी क्लास भी अच्छी लगी. जब गणित के शिक्षक वापस आए, तो कमल ने उनके काम का बोझ कम करने के लिए सप्ताह में 17-18 क्लासेज पढ़ाने की पेशकश की.'

    हरियाणा सरकार के मंत्री ने की टिप्पणी
    कमल एमएससी हैं, लेकिन वह छात्रों को पढ़ाने के लिए अयोग्य हैं. सरकारी मानदंडों के अनुसार, कक्षा 9 से 12 के छात्रों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक के पास संबंधित विषय में एमए की डिग्री होनी चाहिए.
    वहीं डिप्टी डीईओ ने इस मामले पर कहा, 'हमें सकारात्मक पक्ष को देखना चाहिए. वह अपने कर्तव्य की से परे जा रहा है. वह घंटी बजाता है, कर्मचारियों को पानी देता है और फिर छात्रों को पढ़ाता है. उनके पास एक जिम्मेदार शिक्षक के गुण हैं.' अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कमल ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.



    हालांकि, हरियाणा में रोजगार की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कहा, 'हम एक शिक्षित व्यक्ति को चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करने से नहीं रोक सकते, लेकिन मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि ग्रुप-डी नौकरियों में केवल 10-12% उच्च शिक्षित युवा हैं. लेकिन यह सरकार की एक उपलब्धि है, क्योंकि जिन लोगों को ऐसे पदों पर चुना गया, उनमें से कई बाद में उच्च पदों के लिए आवेदन करते हैं.'

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