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मीराबाई चानू-मैरी कॉम जैसे लोग भी हैं, जो विपरित हालातों के बावजूद खड़े हुए, चमके- सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍प्‍णी

मीराबाई चानू-मैरी कॉम जैसे लोग भी हैं, जो विपरित हालातों के बावजूद खड़े हुए, चमके- सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍प्‍णी

सुप्रीम कोर्ट ने खिलाडियों के हितों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मैरी कॉम और मीराबाई चानू का जिक्र किया. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने खिलाडियों के हितों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मैरी कॉम और मीराबाई चानू का जिक्र किया. (फाइल फोटो)

शीर्ष अदालत ने कहा कि 'मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) और मैरी कॉम (Mary Kom) जैसे लोग भी हैं, जो विपरीत हालातों के बावजूद खड़े हुए और चमके. बस लोगों के भीतर एक जूनून होना चाहिए'. इस याचिका में हॉकी (Hockey) को भी राष्‍ट्रीय खेल घोषित करने की मांग की गई थी.

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  • News18Hindi
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नई दिल्‍ली : देश में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने, नए प्रशिक्षण ढांचे के अलावा उनके हितों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र को कोई निर्देश देने से तो इनकार कर दिया, लेकिन एक महत्‍वपूर्ण टिप्‍पणी भी की. शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) और मैरी कॉम (Mary Kom) जैसे लोग भी हैं, जो विपरीत हालातों के बावजूद खड़े हुए और चमके. बस लोगों के भीतर एक जूनून होना चाहिए’. इस याचिका में हॉकी (Hockey) को भी राष्‍ट्रीय खेल घोषित करने की मांग की गई थी.

दरअसल, वकील विशाल तिवारी की ओर ये दायर इस पीआईएल में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश, नए प्रशिक्षण ढांचे और उचित तरीके से फंड आवंटन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था.

न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह इन मुद्दों से अवगत हैं, लेकिन इस संबंध में वह सरकार को कोई निेर्देश जारी नहीं कर सकते.

बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि क्‍या आप खेल क्षेत्र से संबंधित हैं? इसके लिए व्यक्ति में स्व-प्रेरणा होनी चाहिए. यह अदालत के आदेश से संभव नहीं है. हम कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए या तो आप अपनी याचिका वापस ले लें या फिर हम इसे खारिज कर देंगे.’’ इस पर याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की बात कही, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ‘‘हमारे भी समान विचार हैं. हमें सहानुभूति भी है. याचिकाकर्ता को अर्जी वापस लेने की अनुमति दी जाती है.’’

याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी ने याचिका में शीर्ष अदालत से ओलंपिक (Olympics) में खेले जाने वाले एथलेटिक्स खेलों और खेलों की प्रगति के लिए सरकार को निर्देश जारी करने, खिलाड़ियों को उन्नत प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचा और धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. याचिका में कहा गया था कि देश के खेल उद्योग के उत्थान के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक धन के सही उपयोग के साथ खेल शिक्षा को अधिक प्रमुखता से देखने की जरूरत है.

उनकी तरफ से ओलंपिक का जिक्र करते हुए जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि दुनिया के सबसे बड़े मंच ओलंपिक पर सबसे अच्छे से प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता, बुनियादी ढांचे, अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं और प्रशिक्षण के संपर्क में कमी के कारण है.

इस जनहित याचिका में हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल घोषित करने की भी मांग की गई और कहा गया कि “एक लोकप्रिय धारणा है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल या खेल है, लेकिन इसे अभी तक सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी गई.”

Tags: Hockey, Olympics, Supreme Court

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