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त्रिपुराः बिप्लव देव का बड़ा ऐलान, 13 दिसंबर को जनता से पूछूंगा सीएम रहूं या नहीं

त्रिपुरा के बीजेपी प्रभारी वीके सोनकर के दौरे के समय कथित तौर 'बिप्लव हटाओ, बीजेपी बचाओ' का नारा उछला था, जिसके बाद से बिप्लव देव के खिलाफ असहमति के सुर तेज हो गए हैं.
त्रिपुरा के बीजेपी प्रभारी वीके सोनकर के दौरे के समय कथित तौर 'बिप्लव हटाओ, बीजेपी बचाओ' का नारा उछला था, जिसके बाद से बिप्लव देव के खिलाफ असहमति के सुर तेज हो गए हैं.

मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव (Biplab Kumar Deb) ने कहा कि 13 दिसंबर को त्रिपुरा की जनता से पूछेंगे कि मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए कि नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 8, 2020, 11:51 PM IST
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नई दिल्ली. त्रिपुरा बीजेपी में सब ठीक है, इसके संकेत नहीं दिख रहे हैं. राज्य के पार्टी प्रभारी वीके सोनकर (Vinod Kumar Sonkar) के दौरे के बाद मुख्यमंत्री बिप्लव देव पर दबाव बनता दिख रहा है. मंगलवार को मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वे 13 दिसंबर को विवेकानंद मैदान जाएंगे और त्रिपुरा के लोगों से पूछेंगे कि उन्हें मुख्यमंत्री रहना चाहिए कि नहीं. उन्होंने कहा कि अगर जनता मेरा समर्थन नहीं करती है, तो मैं पार्टी आलाकमान को इस बारे में सूचित करूंगा. बिप्लव देव ने त्रिपुरा के लोगों से 13 दिसंबर विवेकानंद मैदान पहुंचने का आग्रह किया. बता दें कि त्रिपुरा के बीजेपी प्रभारी वीके सोनकर के दौरे के समय कथित तौर 'बिप्लव हटाओ, बीजेपी बचाओ' का नारा उछला था, जिसके बाद से बिप्लव देव के खिलाफ असहमति के सुर तेज हो गए हैं.

हालांकि राज्य के दौरे के बाद विनोद सोनकर ने कहा था कि सब कुछ ठीक है. पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद और विरोध की बात नहीं. हालांकि उनके ही सामने बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अगरतला में पार्टी के शीर्ष नेताओं के सामने बिप्लव हटाओ, बीजेपी बचाओ जैसे नारे लगाए थे. दरअसल, अगरतला पहुंचे विनोद कुमार सोनकर गेस्‍ट हाउस में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे. तभी बाहर की ओर बड़ी संख्‍या में लोग एकत्र हुए और बिप्‍लब देव के खिलाफ नारेबाजी की.

त्रिपुरा में मुख्यमंत्री बिप्‍लब देव के नेतृत्‍व में बीजेपी और आईपीएफटी गठबंधन की सरकार है. कहा जा रहा है कि उनकी सरकार के खिलाफ लंबे समय से पार्टी में ही आवाज उठ रही है. इसका कारण प्रबंधन की कमी को बताया जा रहा है.



हालांकि ये पहला मौका नहीं है, जब बिप्लव देव की सरकार पर खतरे जैसी आशंकाएं आ चुकी हैं. अक्‍टूबर में ही त्रिपुरा बीजेपी के असंतुष्‍ट विधायकों ने पार्टी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी. उन्‍होंने नड्डा से राज्‍य में खराब सरकार के प्रति चिंता भी व्‍यक्‍त की थी.

चार विधायकों के दल ने भी उन्‍हें त्रिपुरा में राजनीतिक खींचतान के बीच संगठन की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी.
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