संजय गांधी की पुण्यतिथि आज, मेनका, वरुण समेत कई ने दी श्रद्धांजलि

संजय की समाधि पर उनकी पत्नी मेनका संजय गांधी और बेटे वरुण संजय गांधी ने श्रद्धांजलि अर्पित की.

News18Hindi
Updated: June 23, 2019, 12:36 PM IST
संजय गांधी की पुण्यतिथि आज, मेनका, वरुण समेत कई ने दी श्रद्धांजलि
संजय की समाधि पर उनकी पत्नी मेनका संजय गांधी और बेटे वरुण संजय गांधी ने श्रद्धांजलि अर्पित की.
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Updated: June 23, 2019, 12:36 PM IST
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी के पुण्यतिथि के मौके पर याद किया गया. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित उनकी समाधि पर उनकी पत्नी मेनका संजय गांधी और बेटे वरुण संजय गांधी ने श्रद्धांजलि अर्पित की. 23 जून 1980 को संजय का देहांत एक विमान दुर्घटना में हो गया था.

संजय के बारे में कहा जाता है कि वो विमान को कार की तरह चलाया करते थे. विमान को तेज़ हवा में कलाबाज़ियां खिलाना उनका शौक था. 1976 में उन्हें हल्के विमान उड़ाने का लाइसेंस मिला था, जो इंदिरा गांधी के सत्ता से हटते ही जनता सरकार ने लाइसेंस छीन लिया था.

इंदिरा गांधी के सत्ता में दोबारा लौटते ही उन्हें ये लाइसेंस वापस मिल गया. मई 1980 में टू सीटर विमान ‘पिट्स एस 2ए’ को भारत आयात करने की मंजूरी मिल गई थी. आनन फानन में ये विमान सफ़दरजंग हवाई अड्डे स्थित दिल्ली फ़्लाइंग क्लब में पहुंच भी गया.

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कैसे थे संजय

संजय गांधी की आम छवि कम बोलने वाले मुंहफट शख़्स की थी. माना जाता था कि उनके मन में अपने सहयोगियों के लिए कोई इज़्ज़त नहीं थी, चाहे वो उम्र में उनसे कितने ही बड़े क्यों न हों. हालांकि एक ज़माने में संजय गांधी के क़रीबी और कांग्रेस नेता जनार्दन सिंह गहलोत ने एक इंटरव्यू में इसे गलत बताते हुए कहा, 'उनमें रफ़नेस कतई नहीं थी. वो स्पष्टवादी ज़रूर थे जिसे सही मायने में आज तक भारतवासी स्वीकार नहीं कर पाए हैं. वो उससे हट कर थे. इसलिए उनकी छवि बनती रहती थी कि वो रूखे हैं, जो कि वो बिल्कुल नहीं थे.'


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आपातकाल में संजय की भूमिका

आपातकाल के दिनों में माना जाता है कि संजय गांधी देश की सबसे असरदार शख्सियत बन गए थे. प्रधानमंत्री बेशक इंदिरा गांधी थीं, लेकिन लोगों के दिमाग में संजय गांधी का नाम ज्यादा होता था.

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आपातकाल के बाद लिखा गया कि वो उस दौरान सरकार से ज्यादा ताकतवर थे. केंद्रीय मंत्री ही नहीं बल्कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी उनके दरबार में हाजिरी बजाया करते थे. वो जो भी चाहते थे करा लिया करते थे. इसमें मुख्यमंत्री बदलने से लेकर केंद्र से किसी मंत्री तक को हटाने का काम उनकी मर्जी से हुआ. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे राय लिया करती थीं.

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First published: June 23, 2019, 9:46 AM IST
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