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NRC: फाइनल लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख लोगों के पास बचे 120 दिन, करना होगा ये काम

NRC: फाइनल लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख लोगों के पास बचे 120 दिन, करना होगा ये काम

जिन 19 लाख से ज्यादा लोगों को लिस्ट से बाहर किया गया है उनके लिए ये चिंता की बात तो है लेकिन यह आखिरी फैसला नहीं है.

जिन 19 लाख से ज्यादा लोगों को लिस्ट से बाहर किया गया है उनके लिए ये चिंता की बात तो है लेकिन यह आखिरी फैसला नहीं है.

जिन 19 लाख से ज्यादा लोगों को लिस्ट से बाहर किया गया है उनके लिए ये चिंता की बात तो है लेकिन यह आखिरी फैसला नहीं है. इन लोगों के पास इसके खिलाफ अपील करने के लिए कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं.

    असम (Assam) में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (National Register of Citizens) की आखिरी सूची जारी हो गई है. इस लिस्ट में शामिल होने के लिए 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन दिया था. इनमें से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है और जबकि 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है. इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिन्होंने इसके लिए दावा पेश नहीं किया था.

    जिन 19 लाख से ज्यादा लोगों को लिस्ट से बाहर किया गया है उनके लिए ये चिंता की बात तो है लेकिन यह आखिरी फैसला नहीं है. इन लोगों के पास इसके खिलाफ अपील करने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं. ऐसे लोग सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट से लेकर फॉरेनर्स ट्रिब्युनल (Foreigners’ Tribunal) में एनआरसी में जगह न मिलने को लेकर अपील कर सकते हैं. इतना ही नहीं सभी कानूनी विकल्प आजमाने की प्रक्रिया में सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी.

    गृह मंत्रालय (Home Minister) के आदेश पर एनआरसी (NRC) विवादों के निपटारे के लिए 400 ट्रिब्युनल का गठन किया गया है. जिन लोगों का एनआरसी लिस्ट में नाम नहीं है वह शेड्यूल ऑफ सिटिज़नशिप के सेक्शन 8 के मुताबिक अपील कर सकेंगे. इसकी समयसीमा पहले 60 दिन की थी जिसे बढ़ाकर 120 दिन कर दिया गया है. अब इसकी आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2019 हो गई है यानि लिस्ट में नाम न होने की स्थिति में 31 दिसंबर से पहले आवेदन करना होगा.

    फॉरेन ट्रिब्युनल के सामने पेश करना होगा केस
    केंद्रीय गृह मंत्रायल (Ministry of Home Affairs) के अनुसार एनआरसी लिस्ट में जगह न मिलने का मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि ऐसे लोगों को विदेशी घोषित कर दिया जाएगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लिस्ट में जिनका नाम नहीं है उन्हें फॉरेन ट्रिब्युनल के सामने अपना केस पेश करना होगा. इसके अलावा राज्य सरकार ने ये भी साफ किया कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि लिस्ट से बाहर हुए लोगों को हिरासत में ले लिया जाएगा. फॉरेन ट्रिब्युनल का फैसला आने तक उन्हें छूट दी जाएगी.

    फॉरेन ट्रिब्युनल में केस हारने की स्थिति में व्यक्ति के पास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऑप्शन होगा. सारे कानूनी रास्ते आजमाने से पहले किसी भी शख्स को हिरासत में नहीं लिया जाएगा. इस केस में सहायता करने के लिए 200 वकीलों का एक समूह बनाया गया है जो ऐसे लोगों की मुफ्त में मदद करेगा जिससे किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति न पैदा हो सके.

    सरकार करेगी आर्थिक मदद
    यही नहीं असम सरकार ने साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति जिसका नाम लिस्ट में नहीं है वह गरीब परिवार का है और कानूनी लड़ाई लड़ने में असमर्थ है तो उसे सरकार की ओर से मदद मुहैया कराई जाएगी. असम के मूल निवासियों को भी बीजेपी और विपक्षी दलों ने मदद का भरोसा दिलाया है. सरकार के मुताबिक ऐसे लोगों की मदद का खर्च डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (DLSA) उठाएगी. इसके लिए जिन लोगों की सालाना आय 3 लाख से कम है उन्हें मुफ्त में ये सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी.



    कानूनी लड़ाई लड़ने में आता है लाखों का खर्च
    सिटिज़न ऑफ जस्टिस एंड पीस नाम का एक एनजीओ पिछले साल जारी हुए एनआरसी के ड्राफ्ट से बाहर हुए लोगों को कानूनी सहायता मुहैया करा रही है. इस संस्था का मानना है कि नागरिकता साबित करने की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए एक व्यक्ति को कई लाख खर्च करने होंगे. इस संस्था के असम स्टेट को-ऑर्डिनेटर ज़मशेक अली के मुताबिक अगर कोई शख्स सुप्रीम कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़ना चाहता है तो इसके लिए उसे 40,000 से लेकर लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.

    केंद्र सरकार ला सकती है विधेयक
    रजिस्टर से बाहर किए गए कई पीढ़ियों से असमिया लोगों को भी सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है. असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि गलत तरीके से लिस्ट हुए लोगों और बाहर हुए भारतीयों के लिए केंद्र सरकार विधेयक भी ला सकती है.

    सारे कानूनी विकल्पों को आजमाने के बाद भी विदेशी घोषित होने वाले नागरिकों को सरकार डिटेंशन सेंटर्स में रखेगी. क्योंकि भारत का बांग्लादेश के साथ कोई करार नहीं है ऐसे में इस तरह के लोगों को देश से बाहर किया जाएगा या नहीं ये फिलहाल साफ नहीं है. असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सरमा के मुताबिक सरकार विदेशियों की पहचान के लिए और उन्हें देश से बाहर निकालने की पूरी प्रक्रिया पर काम कर रही है.

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    Tags: Assam, NRC Assam, Sarbananda Sonowal

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