कुछ ऐसा रहा ट्विटर पर सुषमा स्वराज के साथ एक पत्रकार का निजी अनुभव?

एक पत्रकार ने परेशान होकर एक दिन सुषमा स्वराज को टैग करते हुए पूरा मामला ट्वीट कर दिया. क्योंकि उन्होंने सुना था कि सुषमा जी को ट्वीट करने पर एक्शन फटाफट होता है!!

Shailesh Chaturvedi | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 2:52 PM IST
कुछ ऐसा रहा ट्विटर पर सुषमा स्वराज के साथ एक पत्रकार का निजी अनुभव?
BJP की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पंचतत्व में विलीन होने पर हर कोई दुखी है.
Shailesh Chaturvedi | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 2:52 PM IST
सुषमा स्वराज को लेकर तमाम लोगों की अपनी-अपनी कहानियां हैं. कुछ लोग उनके मिलनसार स्वभाव की बात कर रहे हैं, कुछ उनके भाषणों की. कुछ लोगों की कहानियां उनके जुझारूपन से जुड़ी हैं. कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता के मुरीद हैं. सोशल मीडिया पर सक्रिय तो हजारों लोग हैं. लेकिन सोशल मीडिया को मदद करने का हथियार जिस तरह सुषमा स्वराज ने बनाया, वो उनकी शख्सियत के अलग ही पहलू को दिखाता है.

मेरी भी एक कहानी है. यह भी सोशल मीडिया से जुड़ी हुई है. सुषमा स्वराज और उनके मंत्रालय से जुड़ी हुई है. 2015 की बात है. मोदी सरकार 2014 में बनी थी. मोदी सरकार के आने के बाद डिजिटल इंडिया का जिस तरह प्रचार हुआ, उसे तमाम लोग बहुत पसंद कर रहे थे. ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी, जो इसे महज प्रचार बताते थे. मेरी कहानी डिजिटल इंडिया और सुषमा स्वराज ने उसका जैसा इस्तेमाल किया, उससे जुड़ती है.

2015 में मुझे अपना पासपोर्ट रिन्यू कराना था. जून की बात है. सब कुछ हो गया. नई दिल्ली के आईटीओ ऑफिस में आखिरी काउंटर तक सब कुछ क्लीयर था. आखिरी काउंटर पर सामने बैठे अधिकारी के चेहरे पर कुछ उलझन दिखी. पूछने पर उसने कहा कि आपका पासपोर्ट कहीं और से भी इश्यू हुआ है, लेकिन डिटेल नहीं है. इसमें जीबी लिखा है.


दरअसल, उनके पास मौजूद डिटेल में लिखा था कि ग्रेट ब्रिटेन में पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. मुझे याद आया. 2012 लंदन ओलिंपिक्स कवर करने के दौरान मेरा पासपोर्ट खोया था. वहां नए के लिए अप्लाई किया. उसके बाद खोया पासपोर्ट मिल गया. वहां एप्लिकेशन देकर नए पासपोर्ट की प्रक्रिया बंद करवा दी. लंदन में पासपोर्ट अधिकारियों ने कहा कि हमने सब क्लोज कर दिया है. अब आपको कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन वो आधिकारिक तौर पर एंट्री करना और उसमें ये रिमार्क लिखना शायद भूल गए कि नए पासपोर्ट की प्रक्रिया बंद कर दी गई है. जाहिर है, 2012 की उस गलती की वजह से 2015 में मेरे पासपोर्ट का काम रुक गया.

मुझे आरपीओ, भीकाजी कामा प्लेस जाने को कहा गया. वहां बताया गया कि हम हाई कमीशन को लिख रहे हैं. वहां से जब यह जवाब आएगा कि पासपोर्ट इश्यू नहीं हुआ है, उसके बाद ही आपका पासपोर्ट बन पाएगा. जून से अगस्त आ गया था. हाई कमीशन से कुछ दिन जवाब न आने के बाद मैंने व्यक्तिगत तौर पर मेल किया. जवाब आया कि हमें दिल्ली से ऐसी कोई क्वेरी नहीं मिली है. मैंने वापस आरपीओ संपर्क किया. कागज फिर भेजे गए. अब सितंबर बीतने वाला था. हाई कमीशन ने आखिर एक मेल का जवाब दिया और कहा कि आपका क्लीयरेंस 18 सितंबर को भेजा जा चुका है. अब आरपीओ में बात करने की लगातार कोशिश नाकाम होती रही. हेल्पलाइन से लेकर पासपोर्ट ऑफिस में परिचित सदस्य के मोबाइल तक, हर जगह कोशिश कर ली. किसी से जवाब नहीं मिल पा रहा था.

Sushma Swaraj

परेशान होकर एक दिन सुषमा स्वराज को टैग करते हुए पूरा मामला ट्वीट कर दिया. सुना था कि उन्हें ट्वीट करने पर एक्शन फटाफट होता है. गुरुवार आठ अक्टूबर शाम की बात है ये. शुक्रवार यानी नौ अक्टूबर की शाम को आरपीओ से ट्वीट का जवाब आ गया कि आप सोमवार को आरपीओ आ जाइए.
Loading...

मैं सोमवार सुबह पहुंचा. आरटीआई डिपार्टमेंट में एक सज्जन से मिलने को कहा गया. उनके पास ट्वीट की बाकायदा फाइल बनी हुई थी. उन्होंने फाइल निकाली. फिर मामला चेक किया. शर्मिंदगी में कहा – अरे, हम क्या करें.. यहां लोग मेल तक चेक नहीं करते. आपका तो क्लीयरेंस कबका आ चुका है. उन्होंने आरपीओ से लेकर कई जगह कागजों पर खुद जाकर साइन कराए. कुछ पेपर स्कैन कराने थे, वो भी खुद कराए. उसके बाद मुस्कुराकर मुझसे हाथ मिलाया, ‘कल सुबह लगभग इसी वक्त पासपोर्ट आपके हाथ में होगा.’


मैं करीब साढ़े 11 बजे पहुंचा था. करीब एक-सवा घंटे के बाद वहां से निकला. तीन बजे के आसपास मैसेज आया कि आपका पासपोर्ट प्रिंटिंग के लिए चला गया है. छह बजे के करीब मैसेज आया कि पासपोर्ट प्रिंट हो गया है. रात एक बजे मैसेज आया कि पासपोर्ट डिस्पैच हो गया है. सुबह 11 से 12 के बीच पासपोर्ट घर आ गया था. यह सुषमा स्वराज का मंत्रालय ही था, जिसकी वजह से चार महीने से लटका हुआ काम महज 24 घंटे में हो गया. दूर से उन्हें एकाध कार्यक्रम में जरूर देखा होगा. लेकिन कभी सुषमा स्वराज से मुलाकात नहीं हुई. लेकिन यह ऐसा अनुभव था, जिसके बाद कभी सुषमा स्वराज और उनके मंत्रालय को भुला नहीं सकता.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 7, 2019, 2:52 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...