वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को चुनौती देने वाले तेज बहादुर की याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज

बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर ने वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ लड़ा था चुनाव. (फाइल फोटो)

बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर ने वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ लड़ा था चुनाव. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नामांकन दाखिल करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के बर्खास्त जवान तेज बहादुर की याचिका पर फैसला सुनाया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 11:13 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2019 के लोकसभा (Loksabha) चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ सीमा सुरक्षा बल के बर्खास्त जवान तेज बहादुर (Tejbahadur Yadav) का नामांकन रद्द होने के मामले में दायर अपील पर मंगलवार को फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने तेज बहादुर की याचिका खारिज कर दी.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने 18 नवंबर को तेज बहादुर की अपील पर सुनवाई पूरी की थी. तेज बहादुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी. हाईकोर्ट ने तेज बहादुर का नामांकन पत्र रद्द करने के निर्वाचन अधिकारी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी.

इस मामले की सुनवाई के दौरान तेज बहादुर के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल ने पहले निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पर्चा दाखिल किया था लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा था हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि तेज बहादुर का नामांकन ‘दूसरी वजहों’ से खारिज किया गया था.

निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा था?
निर्वाचन अधिकारी ने पिछले साल एक मई को तेज बहादुर का नामांकन अस्वीकार कर दिया था. तेज बहादुर को 2017 में सीमा सुरक्षा बल से बर्खास्त कर दिया गया था. उसने एक वीडियो में आरोप लगाया था कि सशस्त्र बल के जवानों को घटिया किस्म का भोजन दिया जाता है.

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निर्वाचन अधिकारी ने बहादुर का नामांकन पत्र रद्द करते समय कहा था कि उसके नामांकन पत्र के साथ निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप में यह प्रमाण पत्र संलग्न नहीं है कि उसे भ्रष्टाचार या शासन के साथ विश्वासघात करने के कारण सशस्त्र बल से बर्खास्त नहीं किया गया है. न्यायालय में 18 नवंबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने बहादुर के वकील से कहा, ‘आपको यह प्रमाण पत्र संलग्न करना था कि आपको (बहादुर) सेवा से बर्खास्त नहीं किया गया है. आपने ऐसा नहीं किया. आप हमें बताएं कि जब आपका नामांकन पत्र रद्द हुआ था क्या आप एक पार्टी के प्रत्याशी थे.’ (भाषा इनपुट के साथ)

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