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मुस्‍लिमों के एक से ज्‍यादा शादी करने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, शरीयत कानून को असंवैधानिक घोषित करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्‍लिमों के एक से ज्‍यादा शादी करने का मामला (FILE PHOTO)
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्‍लिमों के एक से ज्‍यादा शादी करने का मामला (FILE PHOTO)

याचिकाकर्ता का कहना है कि आईपीसी की धारा-494 और शरीयत लॉ की धारा-2 के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया जाए, जिसके तहत मुस्लिम पुरुष को एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 8:14 AM IST
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नई दिल्ली. मुस्लिम पुरुषों को एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत देने वाली आईपीसी की धारा और शरीयत कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि एक समुदाय को द्विविवाह की इजाजत नहीं दी जा सकती है, जबकि अन्‍य धर्मों में इस तरह बहुविवाह पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. इसके साथ ही याचिका में गुहार लगाई गई है कि आईपीसी की धारा-494 और शरीयत लॉ की धारा-2  के उस प्रावधान को गैरसंवैधानिक करार दिया जाए, जिसके तहत मुस्लिम पुरुष को एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट विष्‍णू शंकर जैन ने अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि  मुस्लिम पर्नसल लॉ (शरीयत) एप्लिकेशन एक्ट 1937 और आईपीसी की धारा-494 मुस्लिम पुरुषों को एक से ज्‍यादा शादी करने की इजाजत देता है जो असंवैधानिक है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इन प्रावधानों को पूरी तरह से गैरसंवैधानिक घोषित किया जाए.

याचिकताकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि मुस्लिम समुदाय को छोड़कर हिंदू, पारसी और क्रिश्चियन पुरुष अगर पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करता है तो वह आईपीसी की धारा-494 के तहत दोषी माना जाता है. याचिका में कहा गया है कि इस तरह देखा जाए तो धर्म के नाम पर दूसरी शादी की इजाजत देना आईपीसी के प्रावधानों में भेदभाव है. इसके साथ ही इस तरह का प्रावधान  संविधान के अनुच्छेद-14 समानता का अधिकार और अनुच्छेद- 15 (धर्म और जाति आदि के आधार पर भेदभाव नहीं) के प्रावधान का उल्लंघन सीधे तौर पर उल्लंघन है.
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सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए याचिकाकर्ता के  वकील ने कहा आईपीसी की धारा-494 के तहत प्रावधान है प्रावधान है कि अगर कोई शख्‍स एक पत्‍नी के रहते हुए दूसरी शादी करता है तो उसे अमान्‍य मानते हुए  ऐसा करने वाले शख्‍स को सात साल कैद की सजा दी जा सकती है.
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