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जब 12 साल पहले PFI सदस्यों ने काटा था प्रोफेसर का हाथ, ऐसे बदल गई जिंदगी, पढ़ें पूरा मामला

जब 12 साल पहले PFI सदस्यों ने काटा था प्रोफेसर का हाथ, ऐसे बदल गई जिंदगी, पढ़ें पूरा मामला

प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर पीएफआई के लोगों ने हमला कर उनका हाथ काट दिया था.(फाइल फोटो/ट्विटर)

प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर पीएफआई के लोगों ने हमला कर उनका हाथ काट दिया था.(फाइल फोटो/ट्विटर)

करीब 12 साल पहले कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद और कुरान की निंदा करने के आरोप में प्रोफेसर टीजे जोसेफ का कट्टरपंथी इस्लामी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों ने हाथ काट दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

12 साल पहले प्रोफेसर जोसेफ पर पीएफआई के सदस्यों ने हमला कर दिया और उनका एक हाथ काट दिया.
प्रोफेसर पर आरोप लगाया कि कथित तौर पर प्रश्न पत्र के जरिये पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया था.
प्रोफेसर जोसेफ ने पीएफआई पर बैन लगाने की मांग की है.

नई दिल्ली/Rohini Swamy. करीब 12 साल पहले कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद और कुरान की निंदा करने के आरोप में प्रोफेसर टीजे जोसेफ का कट्टरपंथी इस्लामी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों ने हाथ काट दिया. इसके बाद से प्रोफेसर जोसेफ के जीवन में भूचाल आ गया. हालांकि वर्तमान में प्रोफेसर जोसेफ मुवत्तुपुझा में अपने घर पर एक सादा जीवन जी रहे हैं. जोसेफ खुद को साहित्यिक कार्यों और लेखन को पढ़ने में व्यस्त रखते हैं. उन्होंने 2010 में अपने हमले के बाद से चार किताबें प्रकाशित की हैं और उन सभी को बाएं हाथ का उपयोग करके लिखा है. बाएं हाथ से लिखने का तरीका प्रोफेसर ने अपने ऊपर हुए हमले के बाद सीखा. जोसफ का शांत बाहरी हिस्सा उस अशांत जीवन के बिल्कुल विपरीत है. प्रोफेसर ने अपनी नौकरी खो दी, उनकी पत्नी ने अपना जीवन समाप्त कर लिया, अपने परिवार के लगातार खतरे के दबाव को सहन करने में असमर्थ नजर आ रहे हैं.

हालांकि प्रोफेसर को अभी भी उस दिन का इंतजार कर रहा है जब पुलिस उनके ऊपर हुए हमले के पीछे “असली दोषियों” को गिरफ्तार करेगी. उन्होंने कहा कि “जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, वे निचले पायदान के पीएफआई सदस्य थे, जिन्होंने मुझ पर हमला किया था. मैं जानना चाहता हूं कि मुख्य लोग, पीएफआई के शीर्ष स्तर के लोग, जिन्होंने मुझ पर हमले का आदेश दिया, मास्टरमाइंड, खुले-आम घूम रहे हैं?”. वहीं जब न्यूज 18 ने उनसे देश में पीएफआई नेताओं और कार्यालयों पर चल रहे छापे के बारे में बात की तो जोसेफ ने कहा कि कि अब समय आ गया है कि संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए और सदस्यों को सलाखों के पीछे बंद कर दिया जाए.

प्रोफेसर ने कहा- PFI को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए
प्रोफेसर ने कहा, “उनके कार्यक्रम, कार्य और विभिन्न आतंकी गतिविधियों में शामिल होने से संकेत मिलता है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं. वे वर्षों से कई हमलों में शामिल रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में, इस आतंकी संगठन पीएफआई को खत्म करना महत्वपूर्ण है. ऐसे संगठन हमारे देश के लिए खतरा हैं और सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए कि वे पूरी तरह से नष्ट हो जाएं.” जबकि उन्हें लगता है कि उस भयानक दिन को याद करते हुए जब उन पर हमला किया गया था, उनके जीवन को चकनाचूर कर दिया, वह इसे अतीत की घटना के रूप में रखना चाहेंगे.

PFI के पीछे शामिल मुख्य लोगों को गिरफ्तार किया जाए- प्रोफेसर जोसेफ
यह पूछे जाने पर कि क्या हर बार पीएफआई का नाम किसी हमले से जोड़ा जाता है या उनके हमले का जिक्र किया जाता है, क्या उन्हें गुस्सा आता है तो जोसेफ ने कहा कि उन्होंने खुद के साथ शांति बना ली है. उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि पीएफआई के पीछे मुख्य लोगों, आपराधिक दिमागों को गिरफ्तार किया जाए और एक संगठन के रूप में पीएफआई को प्रतिबंधित किया जाए. मेरे हमले के बाद नफरत फैलाने का क्या फायदा? मेरे नैतिक मूल्यों ने मुझे इस भयावह घटना को अपने पीछे रखने और अपने हमलावरों से गुस्सा या नफरत नहीं करने की ताकत दी है. लेकिन बड़ी तस्वीर यह सुनिश्चित करना है कि हमारे देश से आतंकी संगठन पीएफआई का खात्मा हो जाए.

100 से अधिक PFI नेताओं को गिरफ्तार किया गया
बता दें कि पीएफआई को गुरुवार को एक बहु-एजेंसी, बहु-राज्यीय कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिसमें उसके 100 से अधिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक प्रेस बयान में कहा, “पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों द्वारा पीएफआई और उसके नेताओं और सदस्यों के खिलाफ कई हिंसक कृत्यों में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. पीएफआई द्वारा किए गए आपराधिक हिंसक कृत्य जैसे कॉलेज के प्रोफेसर का हाथ काटना, अन्य धर्मों को मानने वाले संगठनों से जुड़े व्यक्तियों की निर्मम हत्याएं, प्रमुख लोगों और स्थानों को लक्षित करने के लिए विस्फोटकों का संग्रह, इस्लामिक स्टेट को समर्थन और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना नागरिकों के मन में आतंक फैलाने का एक प्रदर्शनकारी प्रभाव पड़ा है.”

Tags: Kerala, PFI

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