कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट से हिफाजत करती है फाइजर और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन, स्टडी में दावा

कोरोना वायरस से पीड़िता महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करते स्वास्थ्यकर्मी. (पीटीआई फाइल फोटो)

Coronavirus Delta Variant: ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे पहले भारत में पाए गए कोविड-19 डेल्टा वेरिएंट ब्रिटेन में पाए गए अल्फा स्वरूप से लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है.

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    नई दिल्ली. भारत में पहली बार पाए गए कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) से संक्रमित लोगों के अस्पताल में पहुंचने की संख्या पिछले साल ब्रिटेन में मिले अल्फा वेरिएंट के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि फाइजर-बायोएनटेक और एस्ट्राजेनेका के कोरोना वायरस रोधी वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं. उन्होंने स्कॉटलैंड में किए अपने विस्तृत अध्ययन में पाया कि फाइजर-बायोएनटेक टीका शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए बेहतर एंटीबॉडी तैयार करती है.


    द लैंसेट में प्रकाशित एक शोध पत्र में प्रस्तुत किए गए इस निष्कर्ष को ऐसे समय में पेश किया गया है, जबकि ब्रिटेन की सरकार कोविड-19 के डेल्टा स्वरूप के मामलों में लगातार वृद्धि की वजह से 21 जून के बाद सभी लॉकडाउन पाबंदियों को और चार सप्ताह तक बढ़ाने पर विचार कर रही है. जन-स्वास्थ्य स्कॉटलैंड (Public Health Scotland) के कोविड​​​​-19 मामलों के निदेशक जिम मैकमेनामिन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'इस बात की आवश्यकता है कि हम सभी लोगों को आगे आने और वैक्सीन की दोनों खुराक के साथ ही उन्हें टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करें.'


    संक्रमण का शिकार हो चुके लोगों के लिए टीके की एक ही खुराक काफी: अध्ययन


    एडिनबर्ग और स्ट्रैथक्लाइड विश्वविद्यालयों के साथ-साथ पब्लिक हेल्थ स्कॉटलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि फाइजर वैक्सीन ने कोरोना वायरस के अल्फा वेरिएंट के खिलाफ 92% और दूसरी खुराक के 14 दिन बाद डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 79% सुरक्षा प्रदान की. इसकी तुलना में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन ने डेल्टा वेरिएंट के विरुद्ध 73% और 60% सुरक्षा ही मुहैया कराई. हालांकि शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि डाटा की अवलोकन प्रकृति के कारण दोनों वैक्सीन की तुलना सावधानी से की जानी चाहिए.


    'कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक'
    गौरतलब है कि ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की 11 जून को जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि सबसे पहले भारत में पाए गए कोविड-19 डेल्टा वेरिएंट या चिंताजनक वेरिएंट (वीओसी) बी1.617.2, ब्रिटेन में पाए गए अल्फा स्वरूप से लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है और टीकों की प्रभावशीलता को भी कुछ हद तक कम कर देता है.




    पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) ने अपने ताजा विश्लेषण में कहा, 'पीएचई के नए अध्ययन बताते हैं कि डेल्टा वेरिएंट अल्फा वेरिएंट की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है. सभी क्षेत्रों में डेल्टा के मामलों की वृद्धि दर ऊंची है. स्थानीय आकलन के अनुसार इनकी संख्या 4.5 से 11.5 दिन के बीच दोगुनी हो जाती है.'

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