भारत में सबसे पहले वैक्सीन की अनुमति मांगने वाली Pfizer ने वापस लिया आवेदन, जानें क्या है मामला

कंपनी ने कहा है कि बुधवार को भारत में हुई ड्रग रेग्युलेटर से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

कंपनी ने कहा है कि बुधवार को भारत में हुई ड्रग रेग्युलेटर से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

Vaccination in India: फाइजर (Pfizer) ने देश में सबसे पहले वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए आवेदन किया था. फिलदाल ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दो वैक्सीन- कोविशील्ड और कोवैक्सीन को पाबंदियों के साथ आपात इस्तेमाल की अनुमति दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 12:48 PM IST
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नई दिल्ली. भारत में सबसे पहले कोविड-19 (Covid-19) वैक्सीन के आपात इस्तेमाल के लिए आवेदन देने वाली फाइजर ने अपना मन बदल लिया है. अमेरिकी फार्मा कंपनी ने भारत में दिया आवेदन वापस ले लिया है. कंपनी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में इस बात की जानकारी दी है. कंपनी ने कहा है कि बुधवार को भारत में हुई ड्रग रेग्युलेटर (Drug Regulator) से मुलाकात के बाद कंपनी ने यह फैसला लिया है.

कंपनी ने कहा, 'मीटिंग में विचार विमर्श और नियामक की तरफ से चाही गई अतिरिक्त जानकारी के आधार पर कंपनी ने इस समय आवेदन वापस लेने का फैसला किया है.' हालांकि, रॉयटर्स से बातचीत में कंपनी ने इस बात की संभावना जताई है कि वो अतिरिक्त जानकारी के साथ दोबारा आवेदन करेंगे. ब्रिटेन, बहरीन, कनाडा समेत कई देशों ने फाइजर के आपातकाल इस्तेमाल को पहले ही मंजूरी दे दी है.

फाइजर ने देश में सबसे पहले वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए आवेदन किया था. फिलहाल ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने दो वैक्सीन- कोविशील्ड (Covishield) और कोवैक्सीन (Covaxin) को पाबंदियों के साथ आपात इस्तेमाल की अनुमति दी है. कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजैनेका ने मिलकर तैयार किया है. वहीं, इसका निर्माण पुणे स्थित दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) में हो रहा है.

यह भी पढ़ें: फाइजर-बायोटेक का दावा, कोरोना के नए वेरिएंट पर भी असर करेगी उनकी कोविड वैक्सीन
साथ ही कोवैक्सीन को भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने मिलकर बनाया है. इसका निर्माण हैदराबाद में हो रहा है. देश में वैक्सीन प्रोग्राम बीती 16 जनवरी से शुरू हो गया है. गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक 45 लाख लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है. सरकार पहले चरण में केवल स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन दे रही है.



फाइजर की वैक्सीन को रखने के लिए -70 डिग्री सेल्सियस जितने बेहद कम तापमान की जरूरत होती है. इस वैक्सीन में इम्यून सिस्टम को वायरस के खिलाफ तैयार करने के लिए सिंथैटिक मैसेंजर RNA (mRNA) का इस्तेमाल किया गया है. इस वैक्सीन को अनुमति देने वाला सबसे पहला देश ब्रिटेन है. यहां 20 मिलियन की आबादी के लिए पहले ही 40 मिलियन डोज ऑर्डर किए जा चुके हैं.
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