ब्लैक फंगस से मृत्यु दर 38 प्रतिशत, एंटी फंगल दवा एम्फोटेरिसीन बी के उत्पादन में जुटी कंपनियां

(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Antifungal Drug Amphotericin B ब्लैक फंगस के इलाज में प्रयोग की जाने वाली प्राथमिक दवा है. ब्लैक फंगस पीड़ित व्यक्ति की नाक, आंख, साइनस और कभी कभी तो मस्तिष्क पर भी असर करता है.

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    नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश भर में ब्लैक फंगस और म्यूकोरमायकोसिस के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में चारों तरफ इस बीमारी के इलाज में काम आने वाली दवाओं की मांग बहुत बढ़ गई है और कंपनियों ने इस चुनौती से निपटने के लिए एंटी फंगल दवा एम्फोटेरिसीन बी इंजेक्शन का उत्पादन बढ़ाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है. आंकड़ों के हिसाब से देखें तो देश में 14 करोड़ लोगों पर सिर्फ 140 मामले हैं, लेकिन ब्लैक फंगस के चलते मृत्यु दर 38 प्रतिशत है, जोकि बहुत ही ज्यादा है. विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर शुगर से पीड़ित और अन्य गंभीर रोगों के शिकार कोरोना मरीजों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल इस बीमारी के बढ़ने के मुख्य कारणों में से एक है. मनी कंट्रोल के मुताबिक अस्पताल में सामान्य तौर पर आने वाले मामलों के मुकाबले अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 10 से 15 गुणा ज्यादा मरीज आ रहे हैं.

    इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक एंटी फंगल दवाओं के नए स्टॉक को मार्केट में पहुंचने में 15 से 30 दिन का समय लगेगा, क्योंकि इस दवा का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें कई दिन का समय लगता है. सन फार्मा कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि अचानक से लिपोसोमल एम्फोरटेरिसीन बी की डिमांड देश में बहुत बढ़ गई है, लिहाजा लम्बिन 50 आईएनजे (लिपोसोमल एम्फोरटेरिसीन बी) के उत्पादन में तेजी लाई जा रही है, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके. उन्होंने कंपनी को पूरा भरोसा है कि वह बढ़ती मांग को पूरा कर सकेगी.

    एम्फोरटेरिसीन बी ब्लैक फंगस के मामलों के इलाज में प्रयोग की जाने वाली प्राथमिक दवा है, कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश में दवा खरीदने में लोगों को मुश्किल आ रही है, क्योंकि बाजार में स्टॉक कम पड़ रहा है. बता दें कि ब्लैक फंगस पीड़ित व्यक्ति की नाक, आंख, साइनस और कभी कभी तो मस्तिष्क पर भी असर करता है.

    हालांकि सामान्य स्थितियों में एंटी फंगल दवा लिपोसोमल एम्फोरटेरिसीन बी की मांग बहुत कम रहती है, लिहाजा कंपनियां इस दवा का निर्माण सीमित मात्रा में ही करती है, और ये संख्या 10 हजार शीशियों से ज्यादा नहीं होती है.

    सन फार्मा के अलावा इस दवा के एक और बड़े सप्लायर सीरम और वैक्सीन ने कहा कि अभी प्राथमिकता लिपोसोमल एमफोरटेरिसीन बी की मौजूदा डिमांड को पूरा करने पर है. उन्होंने कहा कि फंगल इंफेक्शन के मामलों के चलते देश में दवा की मांग बढ़ी है.

    हालांकि बाजार में इस दवा की कमी के लिए कालाबाजी और होर्डिंग भी जिम्मेदार है, रिटेल में इस दवा को 5 से 10 गुना कीमत पर बेचा जा रहा है. हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें दवा की ब्लैक मार्केटिंग से निपटने के लिए लगातार एक्शन में हैं.

    केंद्रीय रसायन और उवर्रक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने 18 मई को देश में एम्फोटेरिसीन बी की उपलब्धता की समीक्षा की और निर्माता कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए.