मंत्रालयों को पटरी पर लाने में माहिर पीयूष गोयल मंत्रिमंडल में शामिल, मिली रेलवे और कॉमर्स मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी

News18Hindi
Updated: May 31, 2019, 1:22 PM IST

पीएम मोदी के चहेते नेताओं में से एक पीयूष गोयल को मंत्रिमंडल में मिली अहम जिम्मेदारी. मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में अगर किसी ने सही मायनों में संकटमोचक की भूमिका अदा की थी तो वो पीयूष गोयल ही थे.

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पीएम मोदी के चहेते नेताओं में से एक पीयूष गोयल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. उन्हें रेलवे मंत्रालय तो मिला ही है, साथ ही कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री भी उनके ही हिस्से आई है. मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में अगर किसी ने सही मायनों में संकटमोचक की भूमिका अदा की थी तो वो पीयूष गोयल ही थे. उन्हें मुश्किल में पड़े जितने मंत्रालय सौंपे गए, सभी को वो उबार ले गए. गोयल फिर मोदी सरकार 2.0 में मंत्री हो गए हैं.

Shri Piyush Goyal

Minister of Railways; and

Minister of Commerce and Industry.

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वो सबसे काबिल मंत्रियों में एक रहे. जिस मंत्रालय में मुश्किलें पेश आईं, गोयल को आगे किया गया और वो उसे पटरी पर ले आए.

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कोल ब्लॉक आवंटन का पेचीदा मसला सुलझाया
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कोयला मंत्री की भूमिका में उन्होंने कोयला संकट और कोल ब्लॉक आवंटन के पेचीदा मसले को सुलझाया. ऊर्जा मंत्री के रूप में हर घर तक बिजली पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को वक्त पर पूरा किया. जब ट्रेन हादसों के बाद देश की रेल पटरी से उतरती हुई लगी तो गोयल ने आकर रेल मंत्रालय को उबारा.

पीयूष गोयल राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता अटल सरकार में मंत्री थे तो मां मुंबई से तीन बार विधायक रह चुकी हैं (फाइल फोटो)


संभाला वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार
अरुण जेटली जब खराब स्वास्थ्य की वजह से वित्त मंत्रालय को समय नहीं दे पा रहे थे और बजट सिर पर थे तो पीयूष गोयल हाजिर थे. उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण वक्त में वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला और अंतरिम बजट पेश किया. कहा जा सकता है कि पीयूष गोयल हर कठिन वक्त में मोदी सरकार की  ढाल बनकर खड़े रहे.

2014 के चुनाव के बाद लाइम लाइट में आए गोयल
पीयूष गोयल 80 के दशक में बीजेपी से जुड़े. उनके पिता वेदप्रकाश गोयल दो दशक तक बीजेपी के कोषाध्यक्ष रहे. अटल सरकार में वेदप्रकाश गोयल जहाजरानी मंत्री बनाए गए. पीयूष की मां चंद्रकांता गोयल मुंबई से तीन बार विधायक रह चुकी हैं. राजनीतिक परिवार से आने वाले पीयूष ने खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा लेकिन वो सरकार के कई अहम मंत्रालयों का पदभार संभाल चुके हैं.

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पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे
पीयूष गोयल ने चार्टेड अकाउंटेंसी की पढ़ाई की है. वो एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के डायरेक्टर रह चुके हैं. पिता की तरह गोयल भी बीजेपी में पैसों का हिसाब-किताब रखते थे. 2010 से लेकर 2014 तक वो पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे. 2010 में उन्हें बीजेपी ने राज्यसभा में भेजा. 2016 में एक बार फिर वो राज्यसभा पहुंचे.

पीयूष गोयल ने जिस तरह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्रालयों को संभाला, उससे जाहिर है कि वो सफल प्रशासक के साथ विजन में भी माहिर नेता हैं (फाइल फोटो)


प्रचार की जिम्मेदारी संभाली 2014 में
2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पार्टी के लिए प्रचार की जिम्मेदारी दी गई. उन्हें विज्ञापन से लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर लोगों को बीजेपी से जोड़ने का काम दिया गया. पीयूष ने जमकर काम किया. वो पार्टी नेतृत्व की नजरों में आ गए. उनकी काबिलियत को भांपते हुए मोदी मंत्रिमंडल में जगह दी गई. राज्यमंत्री के तौर पर उन्हों ऊर्जा, कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया.

कोयला और ऊर्जा मंत्रालय में बेहतरीन काम
पीयूष गोयल ने कोयला और ऊर्जा मंत्री रहते हुए शानदार काम करके दिखाया. कोल ब्लॉक आवंटन में ऑनलाइन प्रणाली से पारदर्शिता लाने का काम किया. बिजली उत्पादन की क्षमता में भी सुधार हुआ. ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई, जो मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक रही. इसका श्रेय गोयल को जाता है. एलईडी बल्ब के जरिये ऊर्जा की बचत की सरकारी योजना को सफल बनाया.

रिजल्ट दिया तो मिली बड़ी जिम्मेदारी
ऊर्जा और कोयला मंत्रालय में पीयूष गोयल के बेहतर रिजल्ट की बदौलत सितंबर 2017 में उन्हें मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया. गोयल को रेल मंत्रालय का प्रभार दिया गया. उस समय एक के बाद एक ट्रेन दुर्घटनाओं से सरकार पर छींटे पड़ रहे थे. उन्होंने रेल व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश की.

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अगस्त 2018 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इलाज के लिए अवकाश लिया तो गोयल को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला. अरुण जेटली के खराब स्वास्थ्य की वजह से जनवरी 2019 में उन्हें फिर से वित्त मंत्रालय का कामकाज देखना पड़ा. उन्होंने अंतरिम बजट पेश किया. आम चुनाव से ठीक पहले एक संतुलित बजट के लिए उनकी तारीफ हुई. पीयूष गोयल को मोदी सरकार ने जब जैसी जिम्मेदारी दी, उन्होंने रिजल्ट देकर साबित किया कि वो सक्षम मंत्री हैं.

इंवेस्टमेंट बैंकर से लेकर राजनेता तक का सफर
पीयूष गोयल ने सीए के एग्जाम में ऑल इंडिया में दूसरा रैंक हासिल किया था. उन्होंने कमर्शियल बैंक में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम किया. वो 2001 से लेकर 2004 तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और 2002 से लेकर 2004 तक बैंक ऑफ बड़ौदा में सरकार के प्रतिनिधि रहे.

गोयल रक्षा मंत्रालय के फाइनेंस एंड कंसलटेटिव कमिटी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य रहे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वो नदियों को आपस में जोड़ने वाले प्रोजेक्ट के लिए गठित टास्क फोर्स से जुड़े.

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First published: May 30, 2019, 1:34 PM IST
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