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घने कोहरे में भी नहीं होगा ट्रेन का एक्सीडेंट, रेलवे लाने वाला है ये नई टेक्नोलॉजी लेकिन...

घने कोहरे में भी नहीं होगा ट्रेन का एक्सीडेंट, रेलवे लाने वाला है ये नई टेक्नोलॉजी लेकिन...

रेलवे त्रि-नेत्र टेक्नोलॉजी का ट्रायल कर रहा है. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से प्रश्नकाल के दौरान कहा कि त्रि-नेत्र सिस्टम रेलवे में आधुनिक तकनीक विकसित करने का अगला प्रयास है.

रेलवे त्रि-नेत्र टेक्नोलॉजी का ट्रायल कर रहा है. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से प्रश्नकाल के दौरान कहा कि त्रि-नेत्र सिस्टम रेलवे में आधुनिक तकनीक विकसित करने का अगला प्रयास है.

रेलवे त्रि-नेत्र टेक्नोलॉजी का ट्रायल कर रहा है. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से प्रश्नकाल के दौरान कहा कि त्रि-नेत्र सिस्टम रेलवे में आधुनिक तकनीक विकसित करने का अगला प्रयास है.

    भारतीय रेलवे बड़े स्तर पर त्रि-नेत्र टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहा है लेकिन रेलवे इसे तब तक लागू नहीं करेगा, जब तक यह हर मायने में सटीक साबित नहीं हो जाती. राज्यसभा में शुक्रवार को एक सवाल का जवाब देते हुए रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी कोहरे की स्थिति में ट्रेन को यह बताने का काम करेगी कि ट्रेन के ट्रैक पर आगे कोई बाधा तो नहीं है.

    रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के सदस्यों को प्रश्नकाल के दौरान बताया कि त्रि-नेत्र व्यवस्था रेलवे में आधुनिक तकनीक विकसित करने का अगला प्रयास है.

    अल्ट्रासोनिक तरंगों के जरिए लोको-पायलट पता चलेगी ट्रैक की बाधा
    रेलवे मंत्री ने बताया कि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर ट्रायल चल रहा है. यह तकनीक कोहरे में अल्ट्रासोनिक तरंगों के जरिए ट्रेन के ट्रैक पर आगे किसी बाधा के बारे में बताएगी. मंत्री ने कहा कि अभी इसका ट्रायल चल रहा है. लेकिन बिना हर मायने में इस तकनीक को सटीक पाए, इसे लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि इसके बिना हम आत्मविश्वास के साथ इसे लागू नहीं कर सकते.

    यात्रियों के लिए पीने के शुद्ध पानी का भी इंतजाम करेगा रेलवे
    गोयल ने यह भी बताया कि रेलवे कुछ स्टेशनों पर छोटे रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) वॉटर प्लांट भी बना रहा है ताकि लोगों को पीने का सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सके. उन्होंने कहा, ट्रेन के अंदर रेल नीर उपलब्ध कराने के साथ, हमारा प्लान कई स्टेशनों पर छोटे RO प्लांट लगाने का भी है ताकि लोगों को पीने के लिए पानी मिलता रहे.

    एक ऐसी ही तकनीक पहले रह चुकी है असफल
    पीयूष गोयल ने सदन में कहा, “2002-03 में जिस तकनीक को अपनाया गया था, उसका भी बड़े पैमाने पर ट्रायल हुआ था लेकिन यह सफल नहीं हो सकी थी. ऐसे में जब तक इस नई टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर परीक्षण नहीं कर लिया जाता तब तक इसे लागू नहीं किया जाएगा ताकि इससे फायदे की बजाए नुकसान न हो. इसी नुकसान के चलते पिछली बार पूरे प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया था. उन्होंने सदन को बताया कि हालांकि बाद में हमने एक दूसरी तकनीक विकसित की, जिसके जरिए कोहरे में देखा जा सकता था.

    बाधा का सिर्फ पता ही नहीं चलेगा बल्कि उसकी इमेजिंग भी हो जाएगी
    TRI-NETRA (टरेन इमेजिंग फॉर ड्राइवर्स इंफ्रारेड, इनहांस्ड, ऑप्टिकल एंड रडार असिस्टेड) सिस्टम में इंफ्रारेड कैमरा, ऑप्टिकल कैमरा और रेडार वाला इमेजिंग सिस्टम लगा है. जो ट्रैक पर आगे आने वाली बाधाओं के बारे में लोको पायलट को बताता रहेगा. मुख्यत: यह कोहरे के दौरान ट्रेन ड्राइवर के काम आएगा. मंत्री ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि इसकी टेस्टिंग सभी पैरामीटर्स पर इस तकनीक के पूरा हो जाने के बाद की जाएगी और इसका फील्ड ट्रायल भी किया जाएगा ताकि इस तकनीक की विश्वसनीयता बने.

    ट्रेन में पानी भरने वाले पाइप्स का प्रेशर भी बढ़ेगा
    ट्रेनों में पानी की कमी के सवाल पर एक जवाब देते हुए रेलवे मंत्री ने कहा कि रेलवे इस मामले की जांच कर रहा है. पाया गया है कि पहले की पानी की कम मांग के चलते आज भी जिस पाइप से ट्रेनों में पानी भरा जाता है, उनका प्रेशर कम है क्योंकि पहले पानी की मांग कम होती थी.

    उन्होंने यह भी कहा कि हम अब पॉलिसी से जुड़ा एक नया फैसला ले रहे हैं कि हम पम्पिंग को हाई प्रेशर पर चलाएंगे ताकि टैंक पूरी तरह से भरें और किसी को यात्रा के दौरान परेशानी न हो.

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