चीनी सेना के हत्यारे दस्तों ने कैसे किया भारतीय जवानों पर हमला? गलवान के सैनिकों ने बताई पूरी दास्तां

चीनी सेना के हत्यारे दस्तों ने कैसे किया भारतीय जवानों पर हमला? गलवान के सैनिकों ने बताई पूरी दास्तां
गलवान घाटी (Galwan Valley) हमले के बाद इलाज करा रहे भारतीय सैनिकों (Indian Soldiers) से बातचीत करने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक चीनी सैनिकों (PLA Soldiers) ने कंटीले तार लगे लोहे के रॉड से हमले किए.

गलवान घाटी (Galwan Valley) हमले के बाद इलाज करा रहे भारतीय सैनिकों (Indian Soldiers) से बातचीत करने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक चीनी सैनिकों (PLA Soldiers) ने कंटीले तार लगे लोहे के रॉड से हमले किए.

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प्रवीण स्वामी
नई दिल्ली. 
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद (India-China Rift) ने गंभीर रूप ले लिया है. सोमवार रात गलवान घाटी (Galvan Valley) में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों (Indian Soldiers) पर बेहद बर्बर हमले (Savage Attack) किए. इस हमले के बाद इलाज करा रहे भारतीय सैनिकों द्वारा दी गई सूचना के बारे में जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक चीनी सैनिकों (Chinese Soldiers) ने कंटीले तार लगे लोहे के रॉड से हमले किए. इस हमले में 16 बिहार रेजीमेंट के जवानों की हत्या की गई.

23 भारतीय सैनिकों की गई जान
ऐसी बर्बर झड़प आधुनिक सेनाओं के हाल-फिहलाल के इतिहास में बेहद कम हैं. चीनी सेना के इस बर्बर हमले में अब तक 23 भारतीय सैनिकों ने जान गंवाई है. इनमें 16बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि कई घायल सैनिकों की मौत शून्य से काफी कम तापमान में लगातार बने रहने के कारण हुई.
जिनके पास नहीं थे हथियार उनकी भी हुई हत्या
एक भारतीय अधिकारी के मुताबिक, जिन सैनिकों के पास हथियार नहीं थे, उनकी भी बर्बर हत्या की गई. इनमें वो लोग भी शामिल हैं जिन्होंने जान बचाने के लिए गलवान नदी में छलांग लगा दी थी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक अब भी कम से कम दो दर्जन जवान अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. और करीब 110 से ज्यादा को इलाज की जरूरत पड़ी. कहा जा रहा है कि अभी मौत की संख्या का आंकड़ा बढ़ सकता है.



भारत ने हटाया था चीन का टेंट
गलवान घाटी में ये हिंसक झड़प भारतीय सेना सेना द्वारा चीनी टेंट (कोडनेम-Patrol Point 14) हटाए जाने के बाद शुरू हुई थी. दरअसल इस चीनी टेंट को कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में सैनिकों ने हटाया था. भारतीय सेना ने अपनी सीमा के भीतर इस चीनी टेंट को इसलिए हटाया था, क्योंकि भारतीय सेना के अधिकारी हरिंदर सिंह और चीनी सेना के अधिकारी लिन लिऊ की बैठक के बाद इस टेंट को लगाया गया था. कर्नल बाबू की यूनिट को इस टेंट को हटाए जाने के आदेश दिए गए थे.

चीनी सैनिकों ने ये प्वाइंट छोड़ने से इनकार कर दिया था. हालांकि अभी तक इसकी जानकारी नहीं लग सकी है चीनी सैनिकों ने ऐसा क्यों किया? विवाद को कम करने के लिए दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच जारी बातचीत में चीनी पक्ष की तरफ से इस झड़प के लिए संतोष बाबू की यूनिट को जिम्मेदार ठहराया गया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक चीनी सेना का कहना है कि भारतीय सेना की इस टीम ने दोनों देशों की टुकड़ियों के बीच की सीमा को लांघा, जिससे बॉर्डर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ.

संतोष बाबू की टीम द्वारा टेंट जलाए जाने के बाद चीनी सैनिकों की तरफ से पत्थरबाजी हुई थी. ऊंचाई पर मौजूद चीनी सैनिकों की तरफ से भारतीय सैनिकों पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए. अधिकारियों के मुताबिक कई भारतीय सैनिकों की लाशें चीनी सेना ने भारतीय सेना को वापस की थीं. माना जा रहा है हिंसक झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों को चीनी सीमा में खींच कर मारा गया होगा.  अभी तक चीनी सेना की तरफ से ये नहीं बताया गया है कि बातचीत के बाद भी फिर क्यों भारतीय सीमा में टेंट लगाया गया था.



इस घटना को भारतीय सेना के लिए 1999 में हुए करगिल युद्ध के बाद सबसे बड़ी क्षति माना जा रहा है. साथ ही 1967 के बाद भारत और चीन के बीच हुई ये सबसे जबरदस्त झड़प है. उस समय 88 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. तकरीबन 340 चीनी सैनिकों की मौत हुई थी.

बीजिंग ने अब तक इस घटना में हुई मौतों के आंकड़े पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है. लेकिन भारतीय सेना का दावा है कि उसकी जानकारी के मुताबिक 40 से ज्यादा चीनी सैनिक या तो मारे गए हैं या फिर घायल हुए हैं.

इससे पहले 5 मई को भी गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसमें 11 महार रेजीमेंट के कर्नल विजय राणा को गंभीर चोटें आई थीं जिनका इलाज अब भी जारी है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने न्यूज18 से कहा है-जनता भी कुछ सवालों के जवाब जरूर जानना चाहती है. जैसे आखिर क्यों गलवान घाटी में हुई झड़प के दौरान भारतीय सैनिकों को मदद नहीं पहुंचाई जा सकी. इस मामले में सरकार पूरी जांच करवा सकती है.'

एक्सपर्ट्स का मानना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहा ये विवाद चीन की चिंताएं दिखा रहा है. दरअसल भारत इन इलाकों में इंफ्रस्ट्रक्चर तैयार कर रहा है जिसकी वजह से भारत की निगरानी भी इन इलाकों में मजबूत होगी. जबकि इससे पहले चीन ही यहां पर अपना एकाधिकार रखता था.



यह भी पढ़ें: जिस गलवान घाटी में झड़प हुई वो क्यों भारत और चीन के लिए बनी अहम
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