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कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान कैसे काम करेगी सरकार? यह है प्लान बी

News18Hindi
Updated: March 25, 2020, 9:10 AM IST
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान कैसे काम करेगी सरकार? यह है प्लान बी
पीएम मोदी ने आज से 21 दिन के लिए लॉकडाउन का ऐलान किया है.

कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते अगले 21 दिनों तक देश में संपूर्ण लॉकडाउन (Lockdown) रहेगा. ऐसे में लोग सोच रहे हैं कि सरकार कैसे चलेगी? लेकिन हम आपको बता दें इसका भी इंतजाम कर लिया गया है.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 9:10 AM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर मंगलवार को राष्ट्र को एक बार फिर संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि अगले 21 दिनों तक देश में संपूर्ण लॉकडाउन (Lockdown) रहेगा. ऐसे में लोग सोच रहे हैं कि इस दौरान जब सब कुछ बंद रहेगा तो सरकार कैसे काम करेगी! लेकिन हम आपको बता दें कि सरकार ने इसका पूरा इंतजाम कर लिया है. सरकार की ओर से एक आसान सी चिट्ठी जारी की गई जिसकी हेडिंग है- 'कोविड -19 के प्रसार को रोकने के लिए निवारक उपाय.' वास्तव में यह एक महत्वपूर्ण नोटिस था- सरकारी, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त संस्थानों के लिए लागू की गई प्रभावी सरकारी कामकाज का. और इसमें ही सरकार के कामकाज के 'प्लान बी' का जिक्र है.

इतने बड़े देश को चलाने के लिए सरकार के भीतर सोशल डिस्टेंसिंग लागू करते हुए केंद्र सरकार एक खास योजना से काम कर रही है. हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाम न छापने की शर्त पर कम से कम पांच सरकारी अधिकारियों ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग को लागू करते हुए इसकी कई स्तर पर जांच हुई और फिर दो बड़े प्रशासनिक संस्थानों ने इसे अंतिम रूप दिया, जिसमें कैबिनेट सचिवालय और कार्मिक मंत्रालय शामिल है.

प्राइवेट लाइन्स भी बैकअप में रखी गईं
रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि वीडियो कॉंफ्रेंसिंग अब महत्वपूर्ण चीज है. जब मैटर पूरा हो जाएगा, इसे प्रिंट कर दस्तखत कराने के बाद संबंधित अधिकारियों को फैक्स और मेल कर दिया जाएगा. पीएम किसान योजना, डीबीटी और राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के लिए एनआईसी ने भी मेहनत की. जब यह पक्का हो गया कि अब लॉकडाउन होना ही है, तब NIC ने प्राथमिकता से इन योजनाओं के सॉफ्टवेयर को कंफिगर करने का काम तेजी से किया. रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन कामों के लिए सरकारी इंटरनेट कनेक्शन को ही रखा गया है, लेकिन किसी आपात स्थिति के लिए प्राइवेट लाइन्स भी बैकअप में रखी गई हैं.



एक अधिकारी ने कहा, 'डे टू डे एडमिनिस्ट्रेशन' में 'राज्यों की सहायता करना' है, कुछ सबसे बड़े वित्त पोषित 'राष्ट्रीय कार्यक्रम' चल रहे हैं और वित्तीय निर्णय लेने में शामिल सभी विभागों को चलाना है. शहरी विकास मंत्रालय के तहत कृषि में पीएम-किसान, (किसानों के लिए लक्षित एक नकद हस्तांतरण योजना) और मेट्रो रेल जैसी स्टीयरिंग योजनाओं को 'आवश्यक' के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

योजना को तैयार करने का पहला काम 14-15 मार्च से शुरू हो हुआ. एक चौथे अधिकारी ने कहा कि यह 'अस्थिर' या 'कम-महत्वपूर्ण' है. यह ऐसे काम हैं जिनमें वित्तीय स्वीकृति शामिल नहीं है. दूसरा, प्रत्येक मंत्रालय ने अपनी-अपनी योजनाओं को मंत्रिमंडल सचिवालय तक पहुंचाया. दूसरे अधिकारी ने कहा कि अंतिम रोडमैप को स्वीकृत कराने के लिए 'हाई लेवल' पर भेजे जाने से पहले इन्हें कई बार जांच किया गया था.

सरकार अंधेरे में काम नहीं करेगी....
रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सचिव स्तर के एक तीसरे अधिकारी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समय के दौरान जानकारी अपूर्ण हो सकती है. काम के घंटे अधिक लंबे हो सकते हैं. स्टाफ कम हो सकता है, लेकिन सरकार अंधेरे में काम नहीं करेगी.

20 मार्च को कार्मिक मंत्रालय ने (आदेश संख्या-“F.No. 11013/9/2014-Estt-A-III), 17 और 19 मार्च को इसके द्वारा जारी किए गए दो ट्रायल ऑर्डर्स में कहा गया कि B और C ग्रुप के कर्मचारियों को अलग-अलग बैच में रोस्टर किया जाए. यह सरकार के भीतर सोशल डिस्टेंसिंग की एक शुरुआत थी. उस नोटिस में सभी सलाहकार, जो निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं और जिनमें से कई सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं, 60 वर्ष की आयु से ऊपर को घर से काम करने के लिए कहा गया था.

यह था प्लान बी...
अंत में सभी मंत्रालयों, प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, सरकार की आईटी शाखा, को 22 मार्च को नॉर्थ ब्लॉक से बाहर भेज दिया गया. भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव सुजाता चतुर्वेदी के हस्ताक्षर से इन नोटिसों पर दस्तखत किए थे. यह प्लान बी था.

इसमें विभागों के प्रमुखों से कहा कि "कर्मचारियों (सभी अधिकारियों और कर्मचारियों, जिनमें सलाहकार / अनुबंध और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं) का एक रोस्टर तैयार करें, जिन्हें प्रत्येक विभाग में आवश्यक सेवाएं प्रदान करना आवश्यक है. उन्हें 23 मार्च से 31 मार्च, 2020 तक कार्यालय में  अकेले उपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता है. यह आदेश सेंट्रल के अधीन काम करने वाले किसी भी कर्मचारी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोरोनो वायरस के प्रकोप से लड़ने के लिए लागू नहीं था.

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First published: March 25, 2020, 8:07 AM IST
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