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NH-37 को चौड़ा करने के लिए 2,500 पेड़ काटने की योजना, नागरिकों ने CM से की पेड़ बचाने की अपील

NH-37 को चौड़ा करने के लिए 2,500 पेड़ काटने की योजना, नागरिकों ने CM से की पेड़ बचाने की अपील

गुवाहाटी में 2,500 पेड़ काटने की योजना (twitter/@fffguwahati)

गुवाहाटी में 2,500 पेड़ काटने की योजना (twitter/@fffguwahati)

असम की राजधानी गुवाहाटी में NH-37 को चौड़ा करने के लिए 2,500 पेड़ों को काटने की योजना है. जबकि नागरिकों ने CM हिमंत बिस्व सरमा से इन पेड़ों को बचाने की अपील की है.

गुवाहाटी. राष्ट्रीय राजमार्ग 37 की विस्तार परियोजना के लिए असम की राजधानी गुवाहाटी में लगभग 2,500 पेड़ों को काटने की तैयारी है. पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय राजमार्ग 37 पर जलुकबारी से वशिष्ठ तक 16.5 किलोमीटर लंबे हिस्से पर काम शुरू हुआ है. पिछले कुछ महीनों में ये लगातार दूसरी बार है जब राजधानी के ग्रीन कवर का एक बड़ा हिस्सा खत्म होने जा रहा है. कुछ महीने पहले गुवाहाटी में फ्लाईओवर और सड़कों को बनाने के लिए लगभग 300 पेड़ों को काट दिया गया था. एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी (पूर्वोत्तर) आलोक कुमार ने बताया कि लगभग 300 पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं. इनको काटने से पहले वन विभाग से बात की गई थी. उन्होंने बताया कि मौजूदा फोर लेन हाईवे को छह लेन में अपग्रेड किया जाएगा, जबकि सर्विस रोड को टू लेन में अपग्रेड किया जाएगा. इस पूरी परियोजना की लागत 356.02 करोड़ रुपये है. इस परियोजना का उद्देश्य शहर को ट्रैफिक जाम मुक्ति दिलाना है.

जबकि नागरिकों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से गुवाहाटी में पेड़ों की कटाई को रोकने का आग्रह किया है. नागरिकों के एक समूह ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर 6-लेन परियोजना के लिए NH-37 पर 2500 से अधिक पेड़ों की कटाई को तत्काल रोकने की मांग की है. फ्राइडे फॉर फ्यूचर, गुवाहाटी ने हाल ही में इसके लिए एक याचिका पर हस्ताक्षर कराने का अभियान शुरू किया है. कुल मिलाकर अब तक 321 लोगों ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किए और इसे 31 मार्च को मुख्यमंत्री के पास भेजा गया. पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे संगठन ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर, गुवाहाटी’ ने हाल ही में शहर के बेटकुची में पेड़ों की रक्षा के लिए एक मानव श्रृंखला बनाई थी.

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समूह के एक सदस्य ने कहा कि यह जरूरी है कि शहर का विकास उसकी जैव विविधता को कायम रखते हुए किया जाना चाहिए. जैव विविधता को विकास में बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. अगर शहर के पेड़ों को काट दिया जाता है, तो बच्चे और वयस्क उसके लिए उदासीन हो जाएंगे. जलवायु संकट की सबसे बड़ी सीख जैव विविधता के साथ सह-अस्तित्व की जरूरत रही है. समूह के सदस्य ने कहा कि लगभग दस साल पुराना हर परिपक्व पेड़ अपने तने और डालियों में लगभग 1,500 लीटर से 2,000 लीटर पानी सोखता है जो पानी के स्तर को ऊपर रखने में मदद करता है. पेड़ों की जड़ें जमीन के नीचे से 200 फीट की गहराई तक पानी चूसती हैं. नागरिकों के समूह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से राष्ट्रीय राजमार्ग पर बचे पेड़ों को काटने से पहले एक विशेषज्ञ समिति बनाने का आग्रह किया.

Tags: Environment, Environment news, Guwahati, Save environment, Tree

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