शशि थरूर के घर पांच महीने पहले डिनर पर बनी थी कांग्रेस हाईकमान को चिट्ठी लिखने की प्लानिंग- रिपोर्ट

शशि थरूर के घर पांच महीने पहले डिनर पर बनी थी कांग्रेस हाईकमान को चिट्ठी लिखने की प्लानिंग- रिपोर्ट
कांग्रेस नेता शशि थरूर

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने पार्टी में नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा और कहा कि जब पार्टी राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रही थी और सोनिया गांधी अस्वस्थ थीं तो उस समय ऐसा पत्र क्यों लिखा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2020, 7:40 AM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) में जिन 23 नेताओं के चिट्ठियों पर बवाल मचा है, उसका खाचा पांच महीने पहले पार्टी के सांसद शशि थरूर (Shashi Throor) के घर पर खींचा गया था. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि थरूर के घर पर डिनर के वक्त इस पर चर्चा हुई. इस मीटिंग में कई कांग्रेस नेताओं को आमंत्रित किया गया था. हालांकि कई लोग जो इस डिनर का हिस्सा थे, उन्होंने इस पर दस्तखत नहीं किए. इस डिनर में शामिल होने वाले लोगों में पी चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम, सचिन पायलट, अभिषेक मनु सिंघवी, मणिशंकर अय्यर भी मौजूद थे. हालांकि इन लोगों ने चिट्ठी पर दस्तखत नहीं की थी.

डिनर में अपने मौजूदगी की पुष्टि करते हुए सिंघवी ने कहा कि मुझे थरूर के यहां डिनर पर आमंत्रित किया गया था. पार्टी के भीतर जरूरी रिफार्म्स पर यह एक अनौपचारिक बैठक थी. हालांकि मुझे किसी भी स्तर पर लेटर की कोई जानकारी नहीं थी.

अय्यर बोले- मुझसे कोई संपर्क नहीं हुआ
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, चिंदबरम ने कहा कि वह पार्टी के मामलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते. बीते महीने राजस्थान में बगावत का बिगुल बजाकर फिर से खेमे में लौटे सचिन पायलट ने भी कोई टिप्पणी नहीं की. रिपोर्ट में कहा गया कि शशि थरूर ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया.
वहीं मणिशंकर अय्यर ने कहा कि 'मैंने दस्तखत नहीं किया क्योंकि मुझे नहीं पूछा गया था. किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया.' अय्यर ने कहा कि मार्च महीने में हुए डिनर में पार्टी को फिर से खड़ा करने पर चर्चा हुई. एक सुझाव आया पत्र लिखने का जो सबको वाजिब लगी. हालांकि उस डिनर के बाद किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया.



चिट्ठी पर दस्तखत करने वाले एक अन्य संसद सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि 'यह चिट्ठी व्यक्तियों को नहीं बल्कि मुद्दों को संबोधित है. गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को संदेश पढ़ना चाहिए ना कि संदेश वाहक को निशाना बनाया जाए. हमने चिट्ठी पर अपना नाम दिया है क्योंकि हमारा मानना है कि बदलाव होने चाहिए.'
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