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बंगाल में राशन में बंटा प्लास्टिक आटा!

बंगाल में राशन में बंटा प्लास्टिक आटा!

सरकार बढ़ा सकती हैं गेहूं के दाम, आपकी जेब पर भी पढ़ेगा असर.
(सांकेतिक तस्वीर)

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बंगाल के चाय बागान मजदूरों को राशन में मिले आटे में प्लास्टिक मिला होने की शिकायत, पेट दर्द की शिकायत

    अब तक आपने केवल प्लास्टिक चावल और प्लास्टिक अंडे के बारे में सुना होगा लेकिन अब प्लास्टिक आटा की बात भी सामने आई है.उत्तरी बंगाल के दार्जिलिंग हिल्स एरिया के कई चाय बागान इलाकों में ऐसा आटा राशन डीलर और दुकानों से बिकने की खबरें आ रही हैं. चाय बागान मजदूरों में इस आटा को लेकर हड़कंप की स्थिति है.

    अलीपुरदौर जिले के कई चाय बागान इलाकों में इस तरह की शिकायतें मिली हैं. चामुर्ची, वीरपाड़ा, लक्ष्मीपाड़ा, सताली चाय बागान में राशन डीलर्स से इस तरह का आटा मजदूरों को दिया गया. दूसरे जिलों से भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं. इस आटे से जब रोटियां बनाई गईं तो उसमें प्लास्टिक मिला. कई तरह की शिकायतें भी मिलीं.

    चाय बागान श्रमिकों में हड़कंप
    चामुर्ची चाय बागान श्रमिकों का कहना है कि उन्हें सरकारी राशन में ये आटा मिला है.दूसरे चाय बागान के मजदूरों की भी यही शिकायत है. इस प्लास्टिक आटे को खाने के बाद लोगों के अस्वस्थ होने की जानकारी है. आम शिकायत पेट दर्द की है. ज्यादातर शिकायतें अलीपुरद्वार के चाय बागानों से मिलीं. जलपाईगुड़ी जिले के बागराकोट चाय बागान और लक्ष्मीपाड़ा में भी राशन में मिले आटा को लोग प्लास्टिक आटा बता रहे हैं. चामुर्ची चाय बागान के मैनेजर अनुप प्रताप सिंह का कहना है दिए जा रहे आटे की क्वालिटी खाने लायक नहीं है.



    कैसा है ये आटा
    - देखने में ये सामान्य आटे की तरह
    -आटे में प्लास्टिक के अंश होने की बात
    - पानी से गुंथने के बाद आटा काफी सख्त हो जाता है
    - इसकी रोटी खींचने से प्लास्टिक की लंबी हो जाती है
    - ये पानी में सही तरीके नहीं घुलता
    - इसे आटे को जलाने पर प्लास्टिक के जलने जैसी गंध

    खाद्य विभाग से शिकायत
    आटे के इस नमूने को खाद्य विभाग के पास भेजा जाएगा. जिन दुकानों से लोगों ने इसे खरीदा है, उनका फूड सप्लाई इंस्पेक्टर निरीक्षण कर रहे हैं. सैंपल इकट्ठे किए गए हैं. नमूने कोलकाता की लैब में जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी है. वीरपाड़ा के बीडीओ राजीव दासगुप्ता ने कहा कि बागान के फूड सप्लाई इंस्पेक्टर को मौके पर भेजा गया है.स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम भी भेजने को कहा गया है.

    कहां से मिला ये
    चूंकि इस आटे की शिकायत अभी जगह जगह के चाय बागान मजदूरों से ही आ रही है. ज्यादातर का कहना है कि उन्होने ये आटा स्थानीय राशन डीलर से लिया. कुछ ने इसे दुकानों से लेने की बात कही. सताली चाय बागान के कुछ मजदूर इस आटे को दिखाने के लिए सिलीगुड़ी पहुंचे. कुछ महिला श्रमिकों ने मीडिया के सामने इस आटे को पानी में मिलाकर दिखाया. इसे आग में पकाने पर प्लास्टिक के जलने जैसी गंध आई.

    कैसे लगा ये प्लास्टिक आटा है
    अलीपुरद्वार जिले के सताली चाय बागान की वर्कर अंजलि लाकर का कहना है, हम कई महीने से इस तरह का आटा खा रहे थे. पकाते समय अजीब सी गंध आती थी लेकिन जब आसपास के चाय बागानों से भी खबरें आने लगीं कि ये प्लास्टिक आटा हो सकता है, तब हम स्तब्ध रह गए. हमने इस आटे की गेंद बनाकर जलाया तो लगा कि इसमें प्लास्टिक मिली है. हमारे बच्चे इसे खा रहे थे. हम इसके असर को लेकर चिंतित हैं. एक और चाय बागान वर्कर जयति माला का आरोप है कि ये बागान मैनेजमेंट और राज्य सरकार की लापरवाही से हो रहा है.



    प्लास्टिक अंडा और चावल
    पिछले कुछ समय से ये खबरें भी आ रही हैं कि भारत में बड़े पैमाने में कृत्रिम अंडे और प्लास्टिक चावल लोगों को बेचे जा रहे हैं. प्लास्टिक आटा की बात हमारे यहां अामतौर नई है. हालांकि पिछले दिनों कुछ अफ्रीकी देशों में प्लास्टिक आटा की खबरें आयीं थीं. ये भी खबरें प्रकाशित हुई थीं कि भारत में अहमदाबाद में भी ऐसा आटा बनाया जा रहा है.

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