बीजेपी नेता ने HC में दायर की याचिका, 18 नहीं, 21 साल हो लड़कियों की शादी की उम्र

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में दायर की याचिका में कहा कि भारत में पुरषों के लिए शादी (Marriage) की न्यूनतम उम्र 21 साल है. जबकि लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है. इसका आधार क्या है?

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 5:53 PM IST
बीजेपी नेता ने HC में दायर की याचिका, 18 नहीं, 21 साल हो लड़कियों की शादी की उम्र
शादी के लिए लड़का-लड़कियों की समान हो उम्र, 18 से बढ़ाकर की जाए 21 साल
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Updated: August 14, 2019, 5:53 PM IST
बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक याचिका दायर कर लड़कियों की शादी (Marriage) उम्र बढ़ाने की मांग की. याचिका में उन्होंने कहा कि लड़कों की तुलना में लड़कियों की शादी की उम्रसीमा कम रखना संविधान से मिले समानता, स्वतंत्रता और गरिमामयी जीन के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है. उन्होंने लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने की मांग की.

याचिका में बीजेपी नेता ने कहा कि भारत में पुरषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल है. जबकि लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है. इसका आधार क्या है? इसका आधार सिर्फ पितृसत्तात्मक सोच है जो लड़कियों के आत्मनिर्भर बनने की राह में बाधक है. अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि बिना वैज्ञानिक आधार के लड़कियों की शादी की उम्रसीमा कम करना स्पष्ट भेदभाव है.

ये समानता एवं गरिमा के अधिकार के खिलाफ
उपाध्याय ने हाईकोर्ट में बताया कि भारत में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शादी के लिए तय की गई उम्रसीमा ग्लोबल ट्रेंड्स के भी खिलाफ है. इतना ही नहीं, इससे सविंधान के आर्टिकल 14, 15 और 21 का भी उल्लंघन होता है. महिलाओं के लिए यह समानता एवं गरिमा के अधिकार के खिलाफ है. बीजेपी नेता ने याचिका में कहा कि दुनिया के 125 से अधिक देशों में पुरुष और महिलाओं की शादी की उम्र समान है.

नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी उठाया था मुद्दा
बता दें कि भारत में इसकी मांग काफी समय से उठती रही है. इससे पहले नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने पिछले 29-30 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लड़का और लड़की की शादी की उम्रसीमा समान करने मांग की थी. कमीशन ने तर्क दिया था कि इससे लड़कियों को पढ़ाई करने का समय मिलेगा और उन्हें सामाजिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कम उम्र में लड़कियों के प्रग्नेंट होने से उनकी पढ़ाई के साथ करियर में भी असर पड़ता है.

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First published: August 14, 2019, 5:49 PM IST
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