आर्टिकल 370 की समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई के लिए SC में याचिका

याचिका में कहा गया है कि पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के लोग बार-बार इंटरनेट बंद किए जाने से परेशानी का सामना कर रहे हैं और प्रतिबंध लगाए जाने से अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है.
याचिका में कहा गया है कि पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के लोग बार-बार इंटरनेट बंद किए जाने से परेशानी का सामना कर रहे हैं और प्रतिबंध लगाए जाने से अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है.

याचिका (Plea) में कहा गया है कि समय के गुजरने के साथ और वर्तमान मामलों के लंबित रहने के साथ ही केंद्र (Central Government) और जम्मू-कश्मीर प्रशासन (Jammu-Kashmir Administration) द्वारा अन्य कानून लाए जाने से पांच अगस्त 2019 का केंद्र सरकार का आदेश स्थायी होता जा रहा है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 12:20 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर कर केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया गया है. याचिका में कहा गया है कि पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के लोग बार-बार इंटरनेट बंद किए जाने से परेशानी का सामना कर रहे हैं और प्रतिबंध लगाए जाने से अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है.

'वक्त गुजरने के साथ स्थायी होता जा रहा है केंद्र का निर्णय'
याचिका में कहा गया है कि समय के गुजरने के साथ और वर्तमान मामलों के लंबित रहने के साथ ही केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा अन्य कानून लाए जाने से पांच अगस्त 2019 का केंद्र सरकार का आदेश स्थायी होता जा रहा है, जिसे कई याचिकाओं के माध्यम से अदालत में चुनौती दी गई है.

निर्णय की वजह से हो रही है परेशानियां
याचिका में कहा गया है, ‘आदेश को पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के लोगों की बेहतरी के लिए बताया जाता है लेकिन सच्चाई है कि इन्हीं लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.’ शाकिर साबिर ने अपनी याचिका को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के केंद्र के निर्णय के खिलाफ दायर अन्य याचिकाओं के साथ आगे की सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित कर उसके समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश देने की मांग की.



आवेदन में कहा गया है, ‘इंटरनेट बंद करने और इंटरनेट का स्पीड कम करने से जम्मू-कश्मीर के न केवल छात्रों एवं व्यवसायियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है बल्कि लागू आदेश एवं अन्य प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था एवं स्थानीय लोगों का आम जीवन भी प्रभावित हो रहा है.’ इसने कहा कि पांच अगस्त 2019 के आदेश के प्रभावी होने के बाद केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कई अन्य कानून लागू किए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज