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  • संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन में पीएम मोदी ने किया रवींद्रनाथ टैगोर के गीत का जिक्र, श्यामा प्रसाद मुखर्जी से कनेक्शन

संयुक्त राष्ट्र के अपने संबोधन में पीएम मोदी ने किया रवींद्रनाथ टैगोर के गीत का जिक्र, श्यामा प्रसाद मुखर्जी से कनेक्शन

पीएम मोदी ने महासभा में अपने संबोधन के अंत में कहा, 'मैं नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं. (फोटो साभारः AFP)

पीएम मोदी ने महासभा में अपने संबोधन के अंत में कहा, 'मैं नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं. (फोटो साभारः AFP)

PM Narendra Modi Speech in UN general assembly: अपने संबोधन सत्र में रवींद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को नसीहत भी दी. उन्होंने बताया कि टैगोर ने कहा था अपने शुभ कर्म-पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ो.

  • News18Hindi
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    न्यूयॉर्क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया. अपने संबोधन सत्र में रवींद्रनाथ टैगोर को याद करते हुए पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को नसीहत भी दी. उन्होंने बताया कि टैगोर ने कहा था अपने शुभ कर्म-पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ो. पीएम मोदी ने महासभा में अपने संबोधन में कहा, ‘मैं नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी के शब्दों के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं.

    शुभो कोर्मो-पोथे
    धोरो निर्भोयो गान,
    शोब दुर्बोल सोन्शोय होक ओबोसान. अर्थात…
    अपने शुभ कर्म-पथ पर निर्भीक होकर आगे बढ़ो. सभी दुर्बलताएं और शंकाएं समाप्त हों. ये संदेश आज के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र के लिए जितना प्रासंगिक है उतना ही हर जिम्मेदार देश के लिए. मुझे विश्वास है, हम सबका प्रयास, विश्व में शांति और सौहार्द बढ़ाएगा, विश्व को स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध बनाएगा.’

    पीएम मोदी ने कहा, ‘यह संदेश संयुक्त राष्ट्र के लिए आज के संदर्भ में उतना ही प्रासंगिक है जितना कि हर जिम्मेदार देश के लिए. मुझे विश्वास है कि हमारे सभी प्रयास विश्व में शांति और सद्भाव को बढ़ाएंगे, विश्व को स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध बनाएंगे.”

    पीएम मोदी द्वारा उद्धृत इस गीत का विशेष महत्व है. दरअसल, इस कविता का जुड़ाव भारतीय जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी से है. जब मुखर्जी कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर थे तो उन्होंने टैगोर को 1935 में विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर दो गीत लिखने को कहा था. 2005 में प्रकाशित ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टैगोर ने मुखर्जी के ऑफिस में यह गाना दो महीने के भीतर भेज दिया था. पीएम मोदी ने जिस गीत को आज उद्धृत किया है, वह काफी लोकप्रिय हुआ था.

    मुखर्जी 1934-1938 तक कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे थे. उनके कार्यकाल के दौरान टैगोर ने विश्वविद्यालय में पहली बार बंगाली में कन्वेकेशन को संबोधित किया था.

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