अफसरों की आधी-अधूरी तैयारी से पीएम मोदी हुए नाराज, बीच में छोड़ गए मीटिंग

अफसरों की आधी-अधूरी तैयारी से पीएम मोदी हुए नाराज, बीच में छोड़ गए मीटिंग
नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी ने 'कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्र' विषय पर प्रजेंटेशन देने के लिए नीति आयोग और पीएमओ के सचिवों को बुलाया था. आला अधिकारियों का प्रजेंटेशन पसंद नहीं आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना कुछ बोले वहां से उठकर अचानक चले गए.

  • Pradesh18
  • Last Updated: January 14, 2017, 8:52 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से संकेत दिए हैं कि अफसर चाहे कितने बड़े हों, लेकिन वे उनकी लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी ने 'कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्र' विषय पर प्रजेंटेशन देने के लिए नीति आयोग और पीएमओ के सचिवों को बुलाया था. आला अधिकारियों का प्रजेंटेशन पसंद नहीं आने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना कुछ बोले वहां से उठकर अचानक चले गए.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री ने प्रजेंटेशन बीच में छोड़कर अफसरों को साफ संकेत दिए हैं कि वे काम में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे.

बताया जाता है कि प्रधानमंत्री हमेशा अफसरों का प्रेजेंटेशन पूरा सुनते हैं. वे प्रजेंटेशन के बाद अफसरों के बीच होने वाली चर्चा में भी हिस्सा लेते हैं.



इस बार प्रजेंटेशन में पीएम मोदी ने अफसरों से कहा, 'लगता है इस बहार आप लोगों ने ठीक से प्रयास नहीं किया है. जाइए और इस पर फिर से मेहनत करके प्रेजेंटेशन तैयार कीजिए.'
प्रधानमंत्री आवास पर जनरल सेक्रटरी के प्रेजेंटेशन के दौरान लगभग सभी सचिव, विभाग प्रमुख, पीएमओ और नीति आयोग के अधिकारी ऑडियंस के तौर पर मौजूद रहते हैं.

33 अधिकारियों को समय से पहले रिटारमेंट दे चुकी मोदी सरकार

मालूम हो कि मोदी सरकार ने पिछले साल पहली बार 33 टैक्स ऑफिसरों को समय से पहले रिटायरमेंट लेने को मजबूर कर दिया था, जिनमें सात ग्रुप 'ए' ऑफिसर भी शामिल हैं.

इतना ही नहीं, वित्त मंत्रालय ने पिछले दो सालों में अन्य विभागीय/अनुशासनिक कार्रवाइयों के तहत छह ग्रुप 'ए' अधिकारियों समेत कुल 72 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है. इन्हें निकम्मेपन के आरोप में सीसीएस (पेंशन) नियम के नियम 56(जे) के तहत पहले ही रिटायरमेंट दे दिया गया.

बयान में कहा गया है, 'यह आम धारणा बन गई है कि गलत करने वाले टैक्स ऑफिसरों के खिलाफ उनके निकम्मेपन और टैक्स आकलन के दौरान लोगों को प्रताड़ित करने के लिए कार्रवाई नहीं की जाती. लेकिन, मौजूदा सरकार ने इस धारणा को बदलने के लिए कई कदम उठाए हैं.'
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