गांधी जयंती के अवसर पर पीएम मोदी ने किया VAIBHAV का उद्धाटन, वैज्ञानिकों को कहा शुक्रिया

फोटो साभारः ANI
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PM modi inaugurates VAIBHAV Summit: वैभव को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मैं उन वैज्ञानिकों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने आज अपने सुझाव और विचार पेश किए. आपने कई विषयों को शानदार ढंग से कवर किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2020, 9:59 PM IST
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नई दिल्ली. गांधी जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (वैभव) शिखर सम्मेलन (Global Indian Scientist (Vaibhav) Summit) का उद्घाटन किया. इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मैं उन वैज्ञानिकों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने आज अपने सुझाव और विचार पेश किए. भारत सरकार ने विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं. विज्ञान सामाजिक-आर्थिक बदलाव की दिशा में हमारे प्रयासों के मूल में है.

उन्होंने कहा, 2014 में, 4 नए टीकों को हमारे टीकाकरण कार्यक्रम में पेश किया गया था. इसमें स्वदेशी रूप से विकसित रोटा वायरस टीका शामिल था. हम स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन को भी प्रोत्साहित करते हैं. हमने हाल ही में स्वदेशी रूप से विकसित न्यूमोकोकल वैक्सीन के लिए बाजार प्राधिकरण दिया. ये टीकाकरण कार्यक्रम हमारे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को महत्व देने में सहायक होता है.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने विज्ञान, अनुसंधान और शोध को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अपने किसानों की मदद के लिए हम अव्वल दर्जे का वैज्ञानिक अनुसंधान चाहते हैं. हमारे कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों ने दाल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की है. हम बहुत कम मात्रा में दाल का निर्यात कर पाते हैं. हमारा अन्न उत्पादन रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा है.’’

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत अभियान का भी जिक्र किया और कहा कि इसमें वैश्विक कल्याण की भावना भी निहित है. इसे साकार करने के लिए उन्होंने सभी का समर्थन मांगा.
यह सम्मेलन वैश्विक और प्रवासी भारतीय शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को एक मंच प्रदान करता है. इसका उद्देश्य भारतीय मूल के दिग्गजों को एक मंच पर लाना है जो दुनिया भर के अकादमिक और शोध संस्थाओं से जुड़े हैं.



इस सम्मेलन में 55 देशों के भारतीय मूल के 3000 से अधिक वैज्ञानिक और शिक्षाविद तथा 10 हजार से अधिक प्रवासी वैज्ञानिक और शिक्षाविद शिरकत कर रहे हैं.
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