कोरोना से जंग में पीएम मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी बना एक रोल मॉडल

वाराणसी में कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने कई नए निमय लागू किए हैं.  (File Photo:: काशी विश्वनाथ मंदिर)

वाराणसी में कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने कई नए निमय लागू किए हैं. (File Photo:: काशी विश्वनाथ मंदिर)

महामारी वीआईपी क्षेत्र देखकर वार नहीं करती बल्कि उसके लिए तो सब बराबर होते हैं. जरुरत होती है रणनीति की और लोगों को सतर्क करने की. ऐसे में बीजेपी के विधान पार्षद और पूर्व आईएएस अधिकारी एकके शर्मा को अप्रैल के दूसरे हफ्ते में वाराणसी भेजा गया.

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माना की वाराणसी एक वीवीआईपी क्षेत्र है क्योंकि यहीं से पीएम मोदी लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं, लेकिन कोरोना जैसी बीमारी की दूसरी लहर ने साबित कर दिया कि इस महामारी के सामने क्या राजा और क्या सैनिक. देशभर में लोग बेचैन थे. ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए, अस्पतालों में बेड के लिए, जरुरी दवाओं के लिए. इसमें वाराणसी कोई अपवाद नहीं था. वहां भी सिर्फ दो आरटी-पीसीआर टेस्ट की मशीने थीं, अस्पताल सिर्फ दो थे तो वेंटिलेटर और कोविड बेडों की संख्या कितनी होगी अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं.

दूसरी तरफ रेमडेसिविर जैसी दवाओं की किल्लत. महामारी वीआईपी क्षेत्र देखकर वार नहीं करती बल्कि उसके लिए तो सब बराबर होते हैं. जरुरत होती है रणनीति की और लोगों को सतर्क करने की. ऐसे में बीजेपी के विधान पार्षद और पूर्व आईएएस अधिकारी एकके शर्मा को अप्रैल के दूसरे हफ्ते में वाराणसी भेजा गया. वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल और उनकी पूरी टीम के साथ मिल कर एके शर्मा ने ऐसा कर दिखाया कि अब टेस्टिंग और दवाओं की किल्लत तो दूर की बात, अब प्रशासन के पास बेड ज्यादा हैं और उस पर भर्ती होने वाले कम.

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एके शर्मा ने वारणसी पहुंचते ही 13 अप्रैल को कोरोना से लड़ने के लिए एक केन्द्रीय कंट्रोल और कमांड सेंटर का गठन कर दिया, जिसने दूसरी तमाम एजेंसियों के काम अपने हाथ में ले लिया. ये 24/7 घंटे काम कर रहा था और इसमें तीन-तीन शिफ्टों में लोग काम कर रहे थे. ऊपर से पीएम मोदी भी अपने लोकसभा क्षेत्र को लेकर चिंतित थे इसलिए प्रधानमंत्री कार्यालय से हर घंटे फोन आ रहा था. पीएम मोदी खुद भी बात कर रहे थे और उन्हें रास्ता भी बता रहे थे. पीएम मोदी ने जब खुद वाराणसी के अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से बात की और मार्गदर्शन करते हुए कहा कि उन्हें अब प्रोएक्टिव होकर काम करने की जरुरत है. ऐसे में वहां के व्यापारी समुदाय ने बहुत समर्थन किया. लॉकडाउन के ऐलान के दो दिन पहले से ही पूरे वाराणसी के बाजार बंद हो गए थे. जन भागीदारी के साथ कोरोना के खिलाफ जंग की शुरुआत वाराणसी में हो गयी.
जब कोरोना की दूसरी लहर आयी तो कोरोना से लड़ने वाले मेडिकल सामानों की भारी कमी थी. वेंटिलेटर नहीं थे तो बात सीएसआईआर से की गयी. फिर तो पीएम मोदी का नाम ही काफी था. वाराणसी को वेंटिलेटर जल्दी ही मिल गए. जहां आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए सिर्फ दो मैनुअल मशीनें थीं, अब ऑटोमाटिक मशीनें लगा दी गयी है जिससे रिपोर्ट सिर्फ 24 घंटे में आने लगी है. जबकि पहले 7 दिन लग जाते थे. अब वाराणसी में 4 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं और 400 ऑक्सीजन सीलिंडर भी जिले को मिल गए. अब वाराणसी में कंसंट्रेटर्स भी आ गए हैं और 125 प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में से ज्यादातर के पास ये मौजूद है.

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लखनऊ के बाद वाराणसी में भी डीआरडीओ ने अपना एक स्टेट ऑफ द आर्ट हस्पताल बनाया है. इसके लिए एके शर्मा ने पीएम मोदी का धन्यवाद किया. कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि इस हाई टेक हॉस्पीटल के आने से पहले भी उनके पास 2100 कोविड बेड थे. प्रशासन ने दावा किया कि जितनी रेमडेसिविर अकेले वाराणसी में बांटी गयी है वो पूरे उत्तर प्रदेश की आधी है. कोविड हस्पतालों की संख्या भी अब ज्यादा है. इसलिए एके शर्मा कहते हैं कि पहले भी दवा, बेड, ऑक्सीजन के लिए लगातार लोगों के फोन आते थे. लेकिन अब वाराणसी में जो जंग कमांड सेंटर बना कर लड़ी गयी, उसके बाद तो यही कहा जा सकता है कि पूरे पूर्वांचल में किसी भी जिले से फोन आ जाए, तो हम अब ये कह पाते हैं कि आप वाराणसी की तरफ बढना शुरु कीजिए, आपके पहुंचने तक बेड का इंतजाम हो जाएगा. वाराणसी नगर निगम ने भी इस कोरोना काल में लोगों को सहायता पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोडॆ. विशेष टीमों का गठन किया गया, ज्याद संख्या में एंबुलेंस चलायी गयीं. इसलिए लावारिस पड़ी लाशों के दाह संस्कार से लेकर अपने नजदिकियों का शव जलाने आ रहे लोगों की सहायता करने तक का काम जिला नगर निगम ने किया.



प्रशासन जानता है कि कोरोना अब ग्रामीण क्षेत्रों तक फैलने लगा है इसलिए गांवों और पंचायत प्रतिनिधियों को जागरुक करना जरुरी था. मई दो को जब पंचायत के नतीजे आ रहे थे, तब एके शर्मा के नेतृत्व में कंट्रोल और कमांड सेंटर ने तमाम पंचायत प्रतिनिधियों और कोरोना के मैनेजमेंट में लगे कार्यकर्ताओं की बैठक बुलायी. कई टीमों का गठन किया गया. ब्लॉक स्तर पर कंट्रोल रुम खोले गए. इनमें 70 हजार कोरोना मेडिकल किट भी लोगों में बांटे गए.


तभी तो वाराणसी का कंट्रोल और कमांड सेंटर पूरे यूपी के लिए उदाहरण बना और राज्य सरकार ने हर जिले में ऐसे सेंटर बनाने का आदेश भी पारित कर दिया. इतना तो साफ है कि पीएम मोदी के हस्तक्षेप ने न सिर्फ वाराणसी के लोगों को ताकत दी बल्कि पूरे पूर्वांचल के लिए वाराणसी न सिर्फ उदाहरण बना बल्कि कोरोना पीडितों के लिए एक सेफ हाउस है. अब उत्साहित कमिश्नर दीपक अग्रवाल कहते हैं कि वाराणसी के आम पिछले साल की तरह इस बार भी दुनिया भर के देशों में निर्यात होंगे. तमाम चीजों की कमी के बावजूद कोरोना से जंग लड़ने का एक जुनुन था और पीएम मोदी की निगरानी कि वाराणसी एक रोल मॉल के रूम में उभर कर सामने आया है.

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