पीएम ने पढ़ ली बच्चों की लिखी चिट्ठी, मिड डे मील के लिए आ गईं थालियां!

पीएम ने पढ़ ली बच्चों की लिखी चिट्ठी, मिड डे मील के लिए आ गईं थालियां!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायसेन के बच्चों के मन की बात सुन ली है। मिड डे मील खाने के लिए प्लेट ना होने पर रायसेन के स्कूली बच्चों ने पोस्टकार्ड लिखकर पीएम से थाली का इंतज़ाम करवाने की अपील की थी। अब यहां थाली मिल गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायसेन के बच्चों के मन की बात सुन ली है। मिड डे मील खाने के लिए प्लेट ना होने पर रायसेन के स्कूली बच्चों ने पोस्टकार्ड लिखकर पीएम से थाली का इंतज़ाम करवाने की अपील की थी। अब यहां थाली मिल गई है।

  • News18India
  • Last Updated: September 11, 2016, 9:18 AM IST
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रायसेन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायसेन के बच्चों के मन की बात सुन ली है। बच्चों की लिखी चिट्ठी पीएम मोदी ने पढ़ ली है। मिड डे मील खाने के लिए प्लेट ना होने पर रायसेन के स्कूली बच्चों ने पोस्टकार्ड लिखकर पीएम से थाली का इंतज़ाम करवाने की अपील की थी। स्कूल में 165 बच्चे हैं, लेकिन थालियां 65 ही हैं। अब यहां थाली मिल गई है। रायसेन में मिड डे मील खाने के लिये थाली मिलने पर बच्चे बेहद खुश हैं।

आईबीएन7 ने कुछ दिन पहले बताया था कि यहां बच्चों को मिड डे मील खाने के लिए थाली नहीं है। एमपी के जिले के गैरतगंज के सरकारी स्कूल के बच्चों और हेडमास्टर ने IBN 7 का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि IBN 7 का धन्यवाद, जिन्होंने हमारे मन की बात श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय तक पहुँचाई और हमारी दिक़्क़त दूर हो गई।

इससे पहले तक शमशान के बगल में बने बगैर बाऊंड्री वॉल के स्कूल में बच्चे थाली के लिए देर तक अपनी बारी का इंतज़ार करते थे। गणपतसिंह अहिरवार नामक छात्र के मुताबिक हमें जो मध्यान्ह भोजन मिलता है उसमें थाली कम हैं बच्चे ज्यादा है। बच्चों को थाली धुलने तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। बाऊंड्री वॉल नहीं तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।



MiddayMeal_Manoj Sharma_110916



महिमा भार्गव के अनुसार थाली कम हैं और हम उनका इंतजार कर रहे हैं। कई बार घंटी बज जाती है तो हमको क्लास में जाना पड़ता है औऱ मिड डे मील खा ही नहीं पाते। अर्चना अहिरवार नामक छात्रा ने बताया कि  हमने पिछले साल पीएम का मन की बात कार्यक्रम सुना था जिससे हमें प्रेरणा मिली और सभी छात्रों ने स्कूल की समस्याओं के बारे में पीएम को चिट्ठी लिखी है।

लेकिन बात सिर्फ थाली की नहीं है, बच्चों को सरकार से सिर्फ एक जोड़ी यूनिफ़ॉर्म मिली है  दूसरी खरीदने के लिए चार सौ रूपये चाहिए। प्रधान अध्यापक  मुलामीलाल मालवीय ने बताया कि स्कूल के बच्चों को मन की बात कार्यक्रम से प्रेरणा मिली औऱ उन्होंने पीएम को ये चिट्ठी लिखी है स्कूल की समस्याओं के बारे में। हमने वरिष्ठ अधिकारियों को स्कूल में कम प्लेट होने की सूचना कई बार दे दी है। बाऊंड्री वाल नहीं है तो असुरक्षा तो रहती है। पीएम मोदी को चिट्ठी लिखते ही सोर्ई राज्य सरकार भी जैसे जाग उठी है। राजधानी भोपाल से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर बसे स्कूल की दिक्कतें अचानक उसे भी नजर आने लगी।

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मध्य प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि वास्तव ये सौभाग्य है देश का कि एक ऐसा पीएम देश को मिला है कि जो मन की बात करता है औऱ मन की बात सुनता है। पहली बार ऐसा देखने में रहा है। उन बच्चों को भी औऱ पीएम को बधाई। अब ये संज्ञान में आय़ा है तो मैंने कलेक्टर से बात की है औऱ कमी दूर करने के निर्देश दिये हैं।

इसके पहले भी मध्य प्रदेश के कई बच्चे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने मन की बात लिख चुके हैं। बड़ा सवाल ये है कि आखिर मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार बच्चों के मन की बात क्यों नहीं सुन रही है। आखिर क्यों बच्चों को बार बार प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखने की नौबत आ रही है।
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