PM ने उस मुनि का सुनाया किस्सा, जिसने की थी पानी बिकने की भविष्यवाणी, जानिए उनके बारे में

पीएम मोदी (PM Modi) ने इस कहानी के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण (Water Conservation) की अहमीयत को समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि सभी लोग जल के महत्व को समझें. किसान (Farmer) पानी (Water) के हर बूंद से ज्यादा पैदावार की सोचें. शिक्षक विद्यार्थियों को बचपन से ही पानी के महत्व के बारे में बताएं.

News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 2:35 PM IST
PM ने उस मुनि का सुनाया किस्सा, जिसने की थी पानी बिकने की भविष्यवाणी, जानिए उनके बारे में
पीएम मोदी ने जल संरक्षण पर सुनाया एक किस्सा, जिसमें कहा गया था कि एक दिन पानी दुकान पर बिकेगा.
News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 2:35 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (Narendra Modi) लाल किले (Laal Qila) की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान वो जल सरंक्षण के महत्वता के बारे में बता रहे थे. जल सरंक्षण  (Water Conservation) के महत्वता को समझाते हुए उन्होंने एक लोकप्रिय कवि की एक कविता का जिक्र करते हुए बताया कि जब पानी खत्म हो जाता है तो प्रकृति काम करना बंद कर देती है, फिर एक तरह से विनाश की शुरुआत होती है. इसी संदर्भ में पीएम मोदी ने बताया कि उत्तरी गुजरात में एक जगह है. जैन समुदाय के लोग उसके लिए श्रद्धा भाव रखते हैं. उसी जगह पर एक जैन मुनि हुए. जिनका नाम बुद्धी सागर जी महाराज था. वो किसान थे, खेत में काम करते थे. वो सौ साल पहले लिखकर गए कि एक समय ऐसा भी आएगा, जब पानी किराने की दुकान पर बिकेगा. आज उनकी बातें सच निकली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए जल संरक्षण की आवश्‍यकता पर जोर दिया.


इससे पहले भी पीएम मोदी इनके बारे में चर्चा कर चुके हैं. ये बात जून 2017 की है, जब पीएम मोदी बड़ी संख्यां में लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, "आपमें से कुछ लोग अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए महुड़ी गए होंगे. जैन समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में महुदी जाते हैं, जो लोग महुड़ी का दौरा करते हैं, वे बुद्धी सागर जी महाराज की शिक्षाओं के बारे में जानते होंगे. बुद्ध सागर महाराज ने ये बात 90 साल पहले लिखी थी. उन्होंने इस बारे में लिखा है कि एक दिन पानी दुकानों में बेचा जाएगा. नब्बे साल पहले इस महान आत्मा ने भविष्यवाणी की थी कि दुकानों में पानी बेचा जाएगा. आज हम पीने के लिए दुकान से बिस्लेरी पानी की बोतल खरीदते हैं.

बुद्धी सागर जी महाराज

बुद्धी सागर जी महाराज का जन्म साल 1874 को एक धार्मिक माता-पिता के घर में हुआ. गुजरात में महेसाणा जिले के विजापुर शहर, यही वो जगह थी जहां इनका जन्म हुआ था. माता-पिता अहिंसा को मानने वाले और  विशुद्ध रूप से शाकाहारी थे. उनके नाम थे शिवभाई और अंबाबेन. शिवभाई के पास कृषि योग्य भूमि थी और परिवार सभी तरह से खुश था. वे भले संत बुद्धी सागरजी के नाम से जाने गए, लेकिन उनके बचपन का नाम बहेचर था. उन्होंने छह साल की उम्र में एक धूल भरे गांव-स्कूल में अपनी शिक्षा शुरू की. उन्होंने कक्षा छह तक प्रथम स्थान बनाए रखा. स्कूल में उन्हें मेधावी और प्रतिभाशाली माना जाता था.

आचार्य बुद्धिसागर जी महाराज.


बहेचर बचपन में अकेले रहना पसंद करते थे और दूसरों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते थे. लोगों की सेवा करना बचपन से ही उनका स्वभाव था. 15 साल की उम्र में भैंस के हमले से उन्होंने कुछ जैन भिक्षुओं को बचाया था. उस समय उन्होंने इन जैन उपदेशकों से उपदेश सुना कि जानवर भी इंसानों की तरह दर्द का अनुभव करते हैं अगर उन्हें पीटा जाता है. उनको पीटना एक पाप कार्य है. उन्हीं दिनों वो जैन धर्म की ओर आकर्षित हुए. उपदेशों और धार्मिक प्रवचनों और संतों को सुनने के लिए वे अक्सर जैन मुनियों के पास जाते थे. उन्होंने आसानी से अहिंसा, क्षमा, व्यापक हृदयता, तपस्या त्याग और शास्त्रों का अध्ययन किया. वो जैन धर्म के उच्च विचारों से आकर्षित थे. उन्होंने तमाम विचारों को लेकर चिंतन और मनन करना शुरू कर दिया. गुजराती उनकी मातृ भाषा थी. उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं का भी अध्ययन किया.
Loading...

जैन धर्म की दिक्षा और आचार्य का पद

जैन धर्म की दिक्षा प्राप्त करने के बात. वो लोगों के बीच जाकर लोगों को प्रवचन सुनाने लगे. कम ही समय में वो लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए. गुजरात के उन इलाकों में उनके प्रशंसक उनसे प्रभावित होकर अहिंसा के मार्ग पर चलने लगे, लोगों में शराब पीना छोड़ दिया और शाकाहारी हो गए. साथ ही उन्होंने महान संतों से सीखना जारी रखा, और फिर आगे चलकर उन्होंने आचार्य का दर्जा प्राप्त किया. उन्होंने 1909 में मनसा के आध्यात्मिक ज्ञान के विस्तार के लिए अद्वैत ज्ञान प्रसार मंडल संस्था की स्थापना की. संस्था ने अपने नाम के अनुसार काम किया और गुजराती, हिंदी और संस्कृत पर लगभग 125 महान और छोटी पुस्तकें प्रकाशित की. पुस्तकों की इस श्रृंखला के विशेष पहलू ये है कि पुस्तकों में दर्शन, इतिहास, योग, आध्यात्मिक प्रथाओं जैसे विषय शामिल हैं. 1925 में उनका निधन हो गया.

माहुड़ी जैन मंदिर.


महुड़ी जैन मंदिर
माहुड़ी जैन मंदिर गुजरात के गांधीनगर जिले के माहुड़ी नामक जगह में बना है. ये मंदिर विशेष रूप से जैन धर्म के लोगों का है, लेकिन यहां सभी धर्मों के लोग पूजा करने आते हैं. इस मंदिर में घंटाकर्ण महावीर और पद्मप्रभु की पूजा होती है. माहुड़ी तीर्थ, जैनियों के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है. यह मंदिर महुड़ी में बनाया गया है जिसे प्राचीनकाल में मधुमती के नाम से जाना जाता था. बुद्धिसागर जी महाराज ने इस मंदिर की स्थापना की थी. आचार्य श्री ने जब देखा की जैन धर्म के लोग अपनी मनोकामनाओं के लिए दूसरे मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर जा रहे हैं तब उन्होंने घंटाकर्ण महावीर मंदिर की बुनियाद रखी.

ये भी पढ़ें:

स्वतंत्रता दिवस पर US दूतावास ने कहा ‘मां तुझे सलाम’

...इसलिए पीएम मोदी ने जताई बढ़ती जनसंख्या पर चिंता

 
First published: August 15, 2019, 11:26 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...