गांधी, टैगोर और संस्कृत के जरिए पीएम मोदी ने दुनिया को दिया भारत का संदेश

"पूरी दुनिया एक परिवार है. अगर आप समृद्धि के साथ शांति चाहते हैं तो भारत आएं. यहां हमेशा आपका स्वागत है."

News18Hindi
Updated: January 23, 2018, 7:15 PM IST
गांधी, टैगोर और संस्कृत के जरिए पीएम मोदी ने दुनिया को दिया भारत का संदेश
पीएम मोदी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया.
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Updated: January 23, 2018, 7:15 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया. अपने संबोधन में पीएम ने दुनिया को न्यू इंडिया 2022 की तस्वीर दिखाई. इसके साथ ही उन्होंने शांति और सहयोग का भारत का संदेश दिया. अपने भाषण में पीएम ने महात्मा गांधी की बातों, इशोपनिषद और टैगोर की कविता का जिक्र करते हुए दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत सबको साथ लेकर, सबके साथ चलना चाहता है और साथ मिलकर ही सभी देश वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं.

पीएम ने अपने भाषण में कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार है. उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने 'वसुधैव कुंटुंबकम' का संदेश दिया है. यानी पूरी दुनिया एक परिवार है. पीएम ने कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार के रूप में जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि जिस तरह एक परिवार में मतभेद होते हैं लेकिन जब बाहरी चुनौती आती है तो सभी एक होकर उसका सामना करते हैं उसी तरह पूरी दुनिया को मिलकर चुनौतियों का सामना करना चाहिए.

अपने भाषण में इशोपनिषद का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि इसमें लिखा है कि संसार में रहते हुए मनुष्य को त्यागपूर्वक इसका भोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बुद्ध ने ढाई हजार साल पहले अपरिग्रह को अपने सिद्धांतो में महत्वपूर्ण स्थान दिया. अपरिग्रह मतलब चीजों का आवश्यकता के अनुसार इस्तेमाल. पीएम ने महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप के सिद्धांत का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि हमें अपनी जरूरत के मुताबिक चीजों का उपभोग करना चाहिए लालच के मुताबिक नहीं. पीएम ने कहा कि लालच मनुष्य को पतन की ओर लेकर जाता है.

रविंद्रनाथ टैगोर की कविता 'Where the mind is without Fear' का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि टैगोर ने स्वतंत्रता के एक ऐसे स्वर्ग की कल्पना की थी जिसमें दुनिया मामूली दीवारों से बंटी हुई न हो. उन्होंने कहा कि हमें मिलकर एक ऐसा हैवन ऑफ फ्रीडम बनाना है जहां सहयोग और समन्वय होगा. जहां बंटवारा और दरारें न हों.
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