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'मुसलमानों को गटर में पड़ा रहने दो'- कांग्रेस नेता ने बताई इस बयान की पूरी कहानी

यह मामला राजीव गांधी की सरकार के वक्त का है. पीएम मोदी ने नाम लिए बगैर राजीव गांधी सरकार में मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान का जिक्र किया. जानिए पूरी कहानी...

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में अपने संबोधन में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. इस दौरान उन्होंने कहा, 'जब शाह बानो का मामला चल रहा था, तब कांग्रेस के किसी मंत्री ने कहा था, मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है. अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें रहने दो. (If they want to lie in gutter, let them be)'. प्रधानमंत्री ने आगे जोड़ा, 'यह बयान कांग्रेस के एक मंत्री का है. उन्होंने एक टीवी चैनल के इंटरव्यू में ये बातें कही थी, हालांकि इसके सत्यापन के लिए मेरे पास अवसर नहीं है. मैं इसकी यूट्यूब लिंक भेज दूंगा.'

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद ज्ञापन में कांग्रेस के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने एक-एककर के कांग्रेस सभी सवालों का जवाब दिया. इसमें उन्होंने कांग्रेस के मुलसमानों के हितैषी होने के दावों को खारिज करते हुए शाहबानो केस की याद दिलाई.

    बीजेपी आईटी सेल हेड ने किया मंत्री का वीडियो ट्वीट
    इसके आगे की कहानी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने एक ट्वीट कर बढ़ाई. इस ट्वीट में उन्होंने राजवी गांधी सरकार के एक मंत्री आरिफ मोहम्मद खान का वीडियो जारी किया और लिखा, मुसलमानों के नाम पर दिन रात आँसू बहाने वाली कांग्रेस की हक़ीक़त...

    इस वीडियो में राजीव गांधी सरकार में मंत्री रह चुके आरिफ मोहम्मद खान कह रहे हैं, 'कांग्रेस ने जब शाहबानो केस का विरोध किया तो मैंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन इस्तीफा देने के बाद मैं किसी दोस्त के घर चला गया, ताकि लोग मुझसे संपर्क ना कर सकें. हुआ भी यही, लेकिन अगले दिन जब मैं संसद आया तो कई दोस्त मुझे समझाने आ गए. आखिर में नरसिम्हा राव आए और बोले तुम अच्छा बोलते हो, लेकिन जिद्दी हो.'

    आरिफ मोहम्मद खान कहते हैं, 'मैं कई मौकों पर यह बता चुका हूं कि नरसिम्हा राव ने मुझसे साफ-साफ कहा था कि कांग्रेस समाज सुधारक नहीं है. हम राजनीति करने आए हैं, सरकार चलाने आए हैं. अगर मुसलमान गटर में रहना चाहता है तो रहने दो.'

    मुसलमानों को नारेबजी के लिए इस्‍तेमाल करती है कांग्रेसः आरिफ मोहम्मद खान
    पीएम मोदी के बयान के बाद न्यूज 18 ने पूर्व कांग्रेस मंत्री आरिफ मोहम्मद खान से इस पूरे मसले पर बात की. वे अपने बयान पर अडिग हैं. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस सरकार मुलसमानों का इस्तेमाल केवल नारेबाजी के लिए करती है. मुसलमानों की स्थिति सुधारने में कांग्रेस सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं थी. इसका एक उदाहरण 1988 में आए सलमान रुश्दी के नॉवेल सैटेनिक वर्सेस पर बैन लगा दिया था.'

    राजीव गांधी सरकार के वक्त है मामला
    यह मामला राजीव गांधी की सरकार के वक्त का है. पीएम मोदी ने नाम लिए बगैर राजीव गांधी के मंत्री आरिफ मोहम्मद खान का उल्लेख किया. पीएम मोदी के मुताबिक कांग्रेस एक मंत्री ने टीवी इंटरव्यू में मुलसमानों को लेकर बयान दिया था, लेकिन कांग्रेस ये पूर्व मंत्री भी किसी और के हवाले से यह बात कह रहे हैं. पूर्व कांग्रेस मंत्री बता रहे हैं कि नरसिम्हा राव का यह विचार था. नरसिम्हा राव ने कई मर्तबे आरिफ मोहम्मद खान से ऐसा कहा था.

    यह भी पढ़ेंः पढ़ें शाहबानो के लिए लड़ने वाले पूर्व मंत्री आरिफ मोहम्मद खान बुर्के पर चुप क्यों!

    हालांकि पीएम मोदी ने अपने धन्यवाद ज्ञापन भाषण में कांग्रेस की ओर से पीवी नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह की सरकारों के अच्छे कामों ना गिनाने को लेकर कांग्रेस को फटकारा था. इसके बाद नरसिम्हा राव की अनौपचारिक तौर पर आरिफ खान से कही गई बात को उन्होंने संसद के रिकॉर्ड में कही. यह बयान उन्होंने तीन तलाक बिल पर कांग्रेस को साथ आने के लिए आह्वान के तौर पर कहा. उन्होंने कहा तीन तलाक ब‌िल एनडीए सरकार संसद में आ रही है. कांग्रेस के पास मौका है कि वह मुसलमानों के उत्थान के लिए इस बिल को पास करने में सहयोग करे.



    क्या था शाहबानो मामला
    राजीव गांधी राजनीति में नये थे, लेकिन इंदिरा गांधी के जाने के बाद ही सरकार के सामने एक ऐसा केस सामने आया, जिसने कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक रहे मुस्‍लिम समाज के भीतर कई तरह के सवालों को पैदा कर दिया. दरअसल ये केस था मोहम्‍मद अहमद खान बनाम शाहबानो बेगम का था. मोहम्‍मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम के इस केस में तीन तलाक का मुद्दा केंद्र में था और यह केस देश के सर्वोच्‍च न्‍यायालय की चौखट पर पहुंचकर पूरे भारत में चर्चा का केंद्र बन गया. इस केस का मूल मुद्दा शाहबानो को दिए गए गुजारे भत्‍ते को लेकर था. शाहबानो एक 62 वर्षीय मुसलमान महिला और पाच बच्चों की मां थीं, जिन्हें 1978 में उनके पति ने तलाक दे दिया था.

    खास बात यह थी कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हुए सात साल बीत गए थे. सर्वोच्च न्यायालय ने तब अपने फैसले में कहा था कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 125, जो परित्यक्त या तलाकशुदा महिला को पति से गुजारा भत्ता का हकदार कहता है, मुस्लिम महिलाओं पर भी लागू होता है, क्योंकि सीआरपीसी की धारा 125 और मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों में कोई विरोधाभास नहीं है. लेकिन इस मामले का सबसे अहम पहलू ये था कि 1986 के इस बेहद विवादित मामले में राजीव गांधी की तत्कालीन केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) अधिनियम पारित कर मोहम्मद खान बनाम शाह बानो मामले में सर्वोच्च अदालत द्वारा 23 अप्रैल, 1985 को दिए फैसले को पलट दिया.

    अब मोदी सरकार राजीव गांधी सरकार के इस फैसले को कांग्रेस के गलती के तौर पर देख रही है. साथ ही उस दौरान हुई आपसी बातचीत को संसद के पटल पर उल्लेख कर रहे हैं.

    यह भी पढ़ेंः तीन तलाक पर मोदी के मंत्री रहे इस शख्स ने पलटवाया था ऐतिहासिक फैसला

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