Assam Assembly Elections 2021: श्रीलंका और ताइवान की तस्वीरों से कांग्रेस ने किया असम का अपमान- पीएम मोदी

असम में चुनावी घमासान

असम में चुनावी घमासान

Assam Assembly Election 2021: असम में बीजेपी के नेता हेमंत बिस्वा शर्मा ने कांग्रेस की तरफ से ट्वीट किए गए फोटो का फैक्ट चेक कर बताया था कि ये ताइवान और श्रीलंका की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 10:13 AM IST
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नई दिल्ली. असम में विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Election 2021) को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी इन दिनों राज्य का लगातार दौरा कर रहे हैं. इसी कड़ी में शनिवार को उन्होंने एक रैली के दौरान कांग्रेस (Congress) पर जमकर निशना साधा. पीएम मोदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के उस ट्वीट का जिक्र किया जिस पर एक टी-गार्डेन की फोटो लगी है. दरअसल कहा जा रहा है कि ये फोटो श्रीलंका और ताइवान के चाय बगानों की है, लेकिन कांग्रेस ने इसे असम का बताया है. पीएम मोदी ने इस तस्वीर को लेकर कहा कि कांग्रेस ने ऐसा करके असम के लोगों का अपमान किया है.

पीएम मोदी ने रैली में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'दो तीन दिन पहले इन लोगों ने श्रीलंका की एक फोटो दिखाई और कहा कि ये असम है. कुछ हफ्ते पहले इन्हीं लोगों ने ताइवान की फोटो दिखाई और कहा कि ये असम है. गलती एक बार हो सकती है. लेकिन जब गलती दोहराई जाए तो वो प्रवृति बन जाती है. ये असम के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है. ये असम का अपमान नहीं है तो और क्या है. क्या आप असम का अपमान सहन करेंगे. कांग्रेस यहां की संकृति और तौर-तरीकों को भूल चुकी है.'



क्या है फोटो की सच्चाई
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस के दो ट्वीट से हंगामा मच गया था. असम में बीजेपी के नेता हेमंत बिस्व शर्मा ने कांग्रेस की तरफ से ट्वीट किए गए फोटो का फैक्ट चेक कर बताया था कि ये ताइवान और श्रीलंका की है. बता दें कि कांग्रेस इन फोटो का इस्तेमाल असम के चुनाव प्रचार में कर रही है. हांलिक उस वक्त कांग्रेस ने उनके इन आरोपों को सीरे से खारिज करते हुए कहा था कि ये बीजेपी का चुनावी हथकंडा है. हालांकि गुरुवार को कांग्रेस की तरफ से एक और फोटो ट्वीट किया गया. इस बार ये तस्वीर ताइवान की थी. इसे कांग्रेस ने असम का बयाया था.

हेमंत बिस्वा शर्मा का ट्वीट


इस बार असम में बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां चाय बगान में काम करने वालों का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं. करीब एक तिहाई मददाता चाय बगानों में काम करते हैं.
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