कश्मीर में आतंकियों के लिए PM का संदेश- विकास की ताकत गोलियों और बमों से ज्यादा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां के रहने वाले मुहम्मद असलम की एक टिप्पणी के बाद 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम के बारे में बातें कीं.

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Updated: July 28, 2019, 9:28 PM IST
कश्मीर में आतंकियों के लिए PM का संदेश- विकास की ताकत गोलियों और बमों से ज्यादा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर पर लोगों को एक खास संदेश दिया (फाइल फोटो)
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Updated: July 28, 2019, 9:28 PM IST
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि नफरत फैलाने वाले और विकास कार्यों को रोकने वाले कश्मीर में कभी सफल नहीं होंगे. इसके लिए उन्होंने वर्तमान सरकार के कामों का जिक्र करते हुए कहा कि विकास की शक्ति, गोलियों और बम की ताकत से ज्यादा होती है.

अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में उन्होंने कहा है कि 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम जून में जम्मू और कश्मीर में करवाया गया था. प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा, 'कश्मीर के लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़ने को कितने बेताब हैं, कितने उत्साही हैं यह इस कार्यक्रम से पता चलता है. इस कार्यक्रम में, पहली बार बड़े-बड़े अधिकारी सीधे गांवो तक पहुंचे. जिन अधिकारियों को कभी गांव वालों ने देखा तक नहीं था, वो खुद चलकर उनके दरवाजे तक पहुंचे ताकि विकास के काम में आ रही बाधाओं को समझा जा सके, समस्याओं को दूर किया जा सके.

लगभग साढ़े चार हजार पंचायतों में सरकारी अधिकारियों ने चलाया यह कार्यक्रम
प्रधानमंत्री ने बताया कि ये कार्यक्रम हफ्ते भर चला और राज्य की सभी लगभग साढ़े चार हजार पंचायतों में सरकारी अधिकारियों ने गांव वालों को सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी. ये भी जाना कि उन तक सरकारी सेवाएं पहुंचती भी हैं या नहीं. पंचायतों को कैसे और मजबूत बनाया जा सकता है? उनकी आमदनी को कैसे बढ़ाया जा सकता है? उनकी सेवाएं सामान्य मानवी के जीवन में क्या प्रभाव पैदा कर सकती हैं? गांव वालों ने भी खुलकर अपनी समस्याओं को बताया. साक्षरता, लिंगानुपात, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, बिजली, पानी, बालिकाओं की शिक्षा, सीनियर सिटिजन के प्रश्न, ऐसे कई विषयों पर भी चर्चा हुई.'

यह बात प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के शोपियां के रहने वाले मोहम्‍मद असलम की एक टिप्पणी पर कही.

बैक टू विलेज कार्यक्रम को प्रधानमंत्री ने बताया जन-जागृति का उत्सव
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ये कार्यक्रम कोई सरकारी खानापूर्ति नहीं थी कि अधिकारी दिन भर गांव में घूमकर वापस लौट आएं. लेकिन, इस बार अधिकारियों ने दो दिन और एक रात पंचायत में ही बिताई. इससे उन्हें गांव में समय व्यतीत करने का मौका मिला. हर किसी से मिलने का प्रयास किया. हर संस्थान तक पहुंचने की कोशिश की.
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उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए कई और चीजों को भी शामिल किया गया. खेलो इंडिया के तहत बच्चों के लिए खेल प्रतियोगिता कराई गई. वही खेलों की किट, मनरेगा के जॉब कार्ड्स और SC/ST सर्टिफिकेट भी बांटे गए. आर्थिक शिक्षा के कैंप भी लगाए गए. खेती और बागवानी जैसे सरकारी विभागों की तरफ से भी यहां लगाए गए और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई. एक प्रकार से ये आयोजन, एक विकास उत्सव बन गया, जनभागीदारी का उत्सव बन गया, जन-जागृति का उत्सव बन गया. कश्मीर के लोग विकास के इस उत्सव में खुलकर के भागीदार बने.

प्रधानमंत्री ने सरकारी अधिकारियों की मेहनत का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने ‘Back To Village’ कार्यक्रम के दूर-दराज के गांवों में पहुंचने पर भी खुशी जताई. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को दुर्गम रास्तों से होकर पहाड़ियों को चढ़ते-चढ़ते कभी-कभी एक दिन, डेढ़ दिन पैदल यात्रा भी करनी पड़ी. ये अधिकारी उन सीमावर्ती पंचायतों तक भी पहुंचे, जो हमेशा सीमापार से फायरिंग के साए में रहते हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम और उसमें लोगों की भागीदारी ये बताती है कि कश्मीर के हमारे भाई-बहन 'गुड गवर्नेंस' चाहते हैं. इससे यह भी सिद्ध हो जाता है कि विकास की शक्ति बम-बंदूक की शक्ति पर हमेशा भारी पड़ती है. ये साफ है कि जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, अवरोध पैदा करना चाहते हैं, वो कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते.

सफल अमरनाथ यात्रा की तारीफ भी की
पीएम नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा कि इस बार अमरनाथ यात्रा में पिछले चार वर्षों में सबसे ज़्यादा श्रद्धालु शामिल हुए हैं. 1 जुलाई से अब तक तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन कर चुके हैं. 2015 में पूरे 60 दिनों तक तक चलने वाली इस यात्रा में जितने तीर्थयात्री शामिल हुए थे, उससे अधिक इस बार सिर्फ 28 दिनों में शामिल हो चुके हैं.

उन्‍होंने कहा, 'अमरनाथ यात्रा की सफलता के लिए, मैं खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के लोगों और उनकी मेहमान-नवाजी की भी प्रशंसा करना चाहता हू. जो लोग भी यात्रा से लौटकर आते हैं, वे राज्य के लोगों की गर्मजोशी और अपनेपन की भावना के कायल हो जाते हैं. ये सारी चीज़ें भविष्य में पर्यटन के लिए बहुत लाभदायक साबित होने वाली हैं. मुझे बताया गया है कि उत्तराखंड में भी इस वर्ष जब से चारधाम यात्रा शुरू हुई है, तब से डेढ़ महीने के भीतर 8 लाख से अधिक श्रद्धालु, केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं. 2013 में आई भीषण आपदा के बाद, पहली बार, इतनी रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्री वहां पहुंचे हैं.'

साथ ही प्रधानमंत्री ने मानसून के दौरान सुंदर दिखने वाली जगहों पर घूमने की सलाह भी दी.

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First published: July 28, 2019, 5:58 PM IST
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