Analysis: मोदी ने तय किया अगले पांच साल का एजेंडा!

ये तय है कि मोदी एक भी दिन खाली छोड़ने के मूड मे नहीं है. एजेंडा तय हो चुका है. सांसदों को संदेश जा चुका है. जो नए सांसद चुनकर आएं हैं, उनकी जिम्मेदारियां तय हो चुकी है.

अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: May 26, 2019, 3:41 PM IST
Analysis: मोदी ने तय किया अगले पांच साल का एजेंडा!
पीएम मोदी
अमिताभ सिन्हा
अमिताभ सिन्हा | News18Hindi
Updated: May 26, 2019, 3:41 PM IST
एनडीए संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी बोले ओर खूब बोले. न विपक्ष की आलोचना कि और न ही गांधी परिवार पर निशाना साधा. चुनावों के दौरान दिखी तल्खी पूरी तरह से नदारद रही. आलम ये रहा कि पीएम मोदी ने इतना ही कहा कि 2019 के चुनावों में जनता ने विरासत की राजनीति को नकार दिया है और सफलता पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस को मिली है. और इसके लिए न तो मोदी जिम्मेदार हैं और न ही कोई और नेता बल्कि जिताया है तो देश की जनता ने.

पीएम मोदी ने आने वाले दिनों का एजेंडा भी तय कर दिया है. वो है 2022 में न्यू इंडिया के संकल्प को पूरा करने का एजेंडा. आज़ादी के 75वें साल में नए भारत के निर्माण का संकल्प तो पीएम मोदी ने 2 साल पहले ही तय कर दिया था. इसके लिए सभी सांसदों को बिना किसी पद का इंतज़ार किए बिना काम पर लग जाना है वो भी अपने क्षत्रों से बाहर निकल कर पूरे देश में.





पीएम ने कहा कि अब सरकार 'सबका साथ-सबका विकास' से आगे निकल कर तीसरा लक्ष्य जोड़ना चाहती है और वो है सबका विश्वास. मोदी ने कहा कि अब तक गरीबों और अल्पसंख्यकों को पिछली सरकारों ने डराने के अलावा कुछ नहीं किया. इसलिए अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतना जरूरी है.

पीएम मोदी ने अपने सांसदों को एक नया नारा भी दिया. ये नारा है NaRa यानी  नैशनल एम्बिशन और रीजनल एसपिरेशन. अभी जो संसद चुन कर आये हैं वो इस एजेंडा पर काम शुरू कर दें. पीएम ने दो टूक कहा कि मंत्री बनने की चिंता संसद ने करें और न ही वे मीडिया में छपी खबरों पर विश्वास करें. मोदी ने कहा कि मीडिया की बातें गलत साबित होगी, जिन्हें कॉल चला जाये वो बिना शोर मचाये शपथ ले लें और जो न बने वो भी हमारे हैं और वो भी देश के विकास में सहयोग करें.

पीएम मोदी अपने नेताओं के विवादास्पद बोल के लिए भी खासे परेशान नजर आए. उन्होंने नए चुन कर आये सांसदों को 'छपास के रोग' से बच कर रहने को कहा और साथ ही ये भी नसीहत दी कि उन्हें दिल्ली कर दलालों से बचना चाहिए वरना वो ऐसे जाल में फंस जाएंगे जिससे निकलना मुश्किल होगा. शायद इसी का असर था कि बैठक के बाद सेंट्रल हॉल से बाहर आने वाले संसद कैमरा और माइक से बचते नजर आए. साफ निर्देश था कि वीआईपी संस्कृति से बचना होगा ताकि देश की सेवा निसवार्थ भाव से हो सके.


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पीएम मोदी ने अपने साथ मंच पर बैठे तमाम बुजुर्ग नेताओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया. आडवाणी, प्रकाश सिंह बादल के साथ-साथ जब उन्होंने मुरली मनोहर जोशी के पैर छुए तो जोशी इतने खुश हुए कि न सिर्फ उनके गाल पर थपकी दी बल्कि सर पर हाथ रख आशीर्वाद भी दिया. कम से कम आडवाणी जोशी से मुलाकात और उन्हें अपने साथ मंच पर बैठने से दिल पर पड़ी मैल जरूर धूल गयी होगी. तभी तो आडवाणी ने संसद से बाहर निकलते-निकलते इस जीत को अभूतपूर्व बताया.

सेंट्रल हॉल में बैठक खत्म होने के बाद पीएम मोदी से मिलने वालों की कतार खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी. उनसे हाथ मिलाने की होड़ भी मची थी. इस धक्का-मुक्की में जब अपना 'ढाई किलो' का हाथ लेकर सनी देओल पीएम की सामने पहुंचे तो उनके हाथों और कंधे पर पीएम मोदी ने जिस जोश से अपने हाथ मारे वो उन्हें हमेशा याद रहेगा.



सेंट्रल हॉल में तो पीएम के आने से पहले स्मृति ईरानी सभी सांसदों की बधाइयां लेने में लगी थी. सभी कतार में जाकर सबसे मिल रही स्मृति ईरानी का कद बीजेपी की नजरों में अब खास बढ़ गया है. उधर पटना साहिब से जीत कर आने वाले रवि शंकर प्रसाद भी लगातार लोगों की बधाइयां ही ले रहे थे. साध्वी प्रज्ञा पहुंची तो जरूर लेकिन पीएम की नाराजगी का असर साफ दिखा क्योंकि उन्हें कोई घेरे नजर नही आया.

पीएम का संदेश साफ रहा कि सीटें जितनी भी आएं लेकिन एनडीए को साथ ले कर चलना है. मंच पर प्रकाश सिंह बादल, नीतीश कुमार, राम विलास पासवान और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे. पीएम ने अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने गठबंधन की जो सरकार चलाई वो एक उदाहरण पेश करती है.

ये तय है कि मोदी एक भी दिन खाली छोड़ने के मूड मे नहीं है. एजेंडा तय हो चुका है. सांसदों को संदेश जा चुका है. जो नए चुन कर आएं उनकी जिम्मेदारियां तय हो चुकी है. 2002 के न खाऊंगा, न खाने दूंगा से बढ़ कर 2007 के बाद न सोऊंगा, न सोने दूंगा से बात बहुत आगे बढ़ चुकी है. पार्टी और जनता ने चुना है तो सत्ता और संगठन दोनों के लिए काम करो. अब एक ही बात कही जा सकती है परफॉर्म या पेरिश.

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