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  • PM MODI SHOWING THE WAY OF SHARING THE PAIN OF COMMON MAN BY WALKING ON THE PATH OF COOPERATION AND KINDNESS IN THE TIME OF DISASTER

आपदा के दौर में सहयोग और सहृदयता के रास्ते पर चलकर आम आदमी का दर्द बांटने का रास्ता दिखाते पीएम मोदी

जो पीएम मोदी को वर्षों से जानते हैं वो ये नहीं भूल सकते हैं कि कैसे गुजरात में आए भूकंप के बाद बीजेपी के महासचिव नरेन्द्र मोदी आनन फानन में दिल्ली से अहमदाबाद रवाना हो गए थे.

प्राकृतिक आपदाओं के समय पीएम मोदी का यूं हरकत में आना और राहत और पुनर्वास के काम के लिए तूफान आने से पहले ही योजना बनाने में ऐसी तेजी दिखाना नया नहीं है. पिछले 7 सालों से बतौर पीएम, नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में लीड किया है.

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प्रकृति का कहर भी कुछ ऐसा होता है कि लाख संभालों फिर भी गुंजाइश रह ही जाती है कि ऐसा होता तो बेहतर होता. आज जब पूरा देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर झेल रहा है तो देश के पश्चिमी तट पर आया सुपर तूफान 'टाउते' शायद देश के किसी भी नागरिक की सोच में भी नहीं था. पिछले कुछ सालों में ये सुपर साइक्लोन सबसे गंभीर आपदा बनकर उभरा है. इसलिए जब गुजरात और दीव को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा तो पीएम मोदी ने आनन-फानन में वहां का हवाई सर्वेक्षण करने का फैसला ले लिया.

गुजरात में जन्में और 13 साल वहां के मुख्यमंत्री रहे पीएम नरेंद्र मोदी को टाउते ने दो दशक पहले 1999 में गुजरात में ही आए तूफान की याद दिला दी होगी. तब आए तूफान ने गुजरात में भारी तबाही मचायी थी जिसमें इंसान तो क्या पशुधन का भी खासा नुकसान हुआ था.

इसलिए जब तूफान भारतीय तट से कोसों दूर था, तब 15 मई को पीएम मोदी ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायी थी. तूफान को लेकर उन्होंने महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के मुख्यमंत्रियों तथा दमन, दीव व दादर, नागर हवेली के प्रशासकों से फोन पर बात भी की और लगातार उनके संपर्क में भी रहे. प्राकृतिक आपदाओं के समय पीएम मोदी का यूं हरकत में आना और राहत और पुनर्वास के काम के लिए तूफान आने से पहले ही योजना बनाने में ऐसी तेजी दिखाना उऩके लिए नया नहीं है. पिछले 7 सालों से बतौर पीएम, नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में लीड किया है. खुद भी सबसे पहले आपदाग्रस्त इलाकों तक पहुंचने की कोशिश की है तो दूसरी तरफ अपने तमाम मंत्रियों और सरकार को भी इस काम में लगाकर राहत और पुनर्वास का काम मॉनिटर करते रहते हैं.

पीएम का पद संभालने के बाद जम्मू-कश्मीर में बाढ़ ने 2014 में भयानक तबाही मचायी तो पीएम मोदी ने पहले सितंबर में और फिर अक्टूबर में राज्य का दौरा भी किया. दूसरे दौरे पर तो उन्होंने दिवाली भी सेना के जवानों के साथ मनायी थी. इन दौरों पर पीएम मोदी ने राहत कार्य से जुड़े तमाम अधिकारियों से बात की, एनजीओ और सामाजिक संस्थाओं को भी राहत के काम पर लगाया. जाहिर है केंद्र का मदद का हाथ बढ़ाना उन्हें बहुत भाया था और खास कर राहत कार्यों में सहायता का हाथ बढ़ाने की पीएम मोदी की पहल की तो तब के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी तारीफ की थी.

जब 2015 में तमिलनाडु में बाढ़ आयी और खास कर चेन्नई बाढ़ की मार झेल रहा था, तब भी पीएम मोदी ने वहां जाकर राहत कार्यों का जायजा लिया था और एक बड़ी राहत का ऐलान भी किया था. उन्होंने मुख्यमंत्री जयललिता के साथ राहत कार्यों पर चर्चा भी की थी. 10 अप्रैल 2016 की सुबह जब केरल के पुट्टींगल मंदिर में भयानक आग लगी तो पूरा देश सन्न रह गया. सैकड़ों लोगों की जाने गयीं. उसी दिन पीएम मोदी केरल रवाना हो गए और स्थिति का जायजा लिया. उनके साथ कांग्रेस के मुख्यमंत्री ओमन चांडी भी थे. साल 2018 में केरल में आयी बाढ़ को कोई भुला नहीं सकता. इस दौरान भी पीएम मोदी केरल गए थे और सरकार को हर संभव सहायता और राहत का आश्वासन दिया था.

2019 में जब लोकसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर था तो तूफान फानी और बाढ़ ने ओडिशा का जन जीवन अस्तव्यस्त कर दिया था. पीएम मोदी ने पुरी समेत ओडिशा के तमाम तूफान पीड़ित इलाकों का दौरा भी किया और सीएम नवीन पटनायक के साथ भुवनेश्वर के हवाई अड्डे पर एक रिव्यू बैठक भी की और मदद का ऐलान भी किया था. बंगाल में 2019 में तूफान अंफान आया तो पीएम मोदी बंगाल और ओडिशा का दौरा करने से पीछे नहीं हटे. उन्होंने ममता बनर्जी और नवीन पटनायक की उपस्थिति में राहत के लिए एक बड़ा ऐलान भी किया था. 2021 में जब उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटा था तब पीएम मोदी असम में थे, लेकिन अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच पीएम मोदी ने उत्तराखंड के सीएम से बात की और लगातार वहां की स्थिति का जायजा लेते रहे. केंद्र की टीमें भी तत्काल उत्तराखंड रवाना कर दी गयीं ताकि नुकसान का जायजा लिया जा सके और साथ ही जो पीड़ित हैं उनकी सहायता भी की जा सके.

ये तमाम घटनाएं साबित करती हैं कि पीएम मोदी देश की जनता पर आने वाली मुश्किलों को लेकर कितने संवेदनशील हैं और उन्हें ये फैसला लेने में जरा भी वक्त नहीं लगता. इन मुश्किलों के बीच घुसते हुए आम आदमी के पास उन्हें जल्दी से जल्दी पहुंचना होता है. साथ ही वो आपदा पीड़ित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी लगातार संपर्क में रहते हैं. बिना किसी भेद भाव के मदद का हाथ भी बढ़ाते रहे हैं. 2013 में केदारनाथ में त्रासदी हुई तो सबको याद है कि कैसे यूपीए सरकार लोगों तक राहत पहुंचा पाने में कई हफ्तों तक सफल नहीं हो पा रही थी. तब भी बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदद की पेशकश की थी. दूसरी ओर बिहार के कोसी नदी के कारण आयी प्रचंड बाढ़ से कई जिले बह गए तो भी राहत कहीं नजर नहीं आ रही थी. तब भी नरेंद्र मोदी ने गुजरात से नावें और राहत भेजी थी.

जो पीएम मोदी को वर्षों से जानते हैं वो ये नही भूल सकते हैं कि कैसे गुजरात में आए भूकंप के बाद बीजेपी के महासचिव नरेंद्र मोदी आनन-फानन में दिल्ली से अहमदाबाद रवाना हो गए थे. यानि जब लोग गुजरात छोड़कर भाग रहे थे, तब मोदी गुजरात जा रहे थे. उन्हें राहत और पुनर्वास के लिए बनी समिति का अध्यक्ष बनाया गया था. मुझे वो दिन इसलिए भी याद है कि जिस विमान से मोदीजी रवाना हुए थे वो लगभग खाली ही था. उसमें सिर्फ तीन यात्री थे. एक सहयोगी मोदीजी के साथ थे और तीसरा एक युवा पत्रकार था जो भूकंप कवर करने जा रहा था. वो युवा पत्रकार मैं था. अब तो दो दशक बीत गए, लेकिन मुझे याद है कि मेरी सीट पीछे थी और मुझे मोदीजी ने सबसे आगे अपने पास बैठने के लिए बुला लिया और पूरे रास्ते ये बताते रहे कि गुजरात को फिर से विकास की राह पर डालने की उनके पास क्या क्या योजना है.

एयरपोर्ट से सीधा वो बीजेपी के खानपुर कार्यालय गए थे जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक लेनी शुरू कर दी थी. बतौर प्रचारक तो पूरी जिंदगी लोगों के बीच बिता दी और भूकंप में काम करने का ये अनुभव भी काम आया. इसलिए जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो कच्छ के पुनर्निर्माण के लिए 100 दिन का प्लान बनाया और अब कच्छ विकास के नाम पर पूरे देश के सामने एक उदाहरण बनकर उभरा है. जाहिर है पीएम मोदी का ये नजरिया और हर वक्त कमर कस कर जंग के लिए तैयार रहने की सोच ही है जो उन्हें आम आदमी के करीब लाती रही है. क्योंकि आपदा प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास से ज्यादा जरूरत होती है सहानूभूति से भरे एक साथ की और पीएम मोदी ये हाथ बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं.