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PM का भाषण किसानों को 'बांटने और गुमराह' करने का प्रयास: प्रदर्शनकारी यूनियन

किसान आंदोलन का आज 32वां दिन

किसान आंदोलन का आज 32वां दिन

राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिये आंदोलन का इस्तेमाल करने के प्रधानमंत्री (PM Narendra Modi) के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि यूनियन ने कभी भी किसी राजनीतिक दल को अपना मंच इस्तेमाल नहीं करने दिया. उन्होंने सरकार पर मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.

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    नई दिल्ली. कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं किसान यूनियनों (Farmer's Union) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) का भाषण किसानों को 'बांटने और गुमराह' करने का प्रयास प्रतीत होता है. उन्होंने कहा कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानूनी गारंटी चाहते हैं.

    सरकार पर मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप
    राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिये आंदोलन का इस्तेमाल करने के प्रधानमंत्री के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि यूनियन ने कभी भी किसी राजनीतिक दल को अपना मंच इस्तेमाल नहीं करने दिया. उन्होंने सरकार पर मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया.

    मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष पर निशाना साधा
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच वार्ता में गतिरोध के लिये राजनीतिक मंशा रखने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार अपने कटु आलोचकों समेत सभी से बातचीत करने के लिये तैयार है. लेकिन यह बातचीत ‘तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों’ पर आधारित होनी चाहिये. मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब नये कानूनों को लेकर उनकी एमएसपी सहित कुछ वाजिब चिंताएं थीं लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक लोग आ गए और हिंसा के आरोपियों की रिहाई और राजमार्गों को टोलमुक्त बनाने जैसी असंबद्ध मांगे करनी शुरू कर दीं.

    'पीएम मोदी का दावा गलत'
    कोहाड़ ने कहा, 'प्रधानमंत्री का यह दावा गलत है कि अन्य राजनीतिक दल हमें गुमराह कर रहे हैं. हमें दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन करते हुए एक महीना हो गया है और हमने किसी भी नेता को अपने मंच पर आने नहीं दिया है. बल्कि हमने उन्हें अपने मंच का इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगा दी है. हमारा प्रदर्शन राजनीतिक नहीं है.'

    पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों समेत हजारों किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बीते लगभग एक महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा जमाए हुए हैं. किसान समूह कानूनों को वापस लेने से कम कुछ भी स्वीकार करने को राजी नहीं है, जिसके चलते सरकार और उनके बीच कम से कम पांच दौर की वार्ता बेनतीजा रही है.

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