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Andhra Pradesh में बाप-बेटे ने स्क्रैप से बनाई PM मोदी की प्रतिमा, बेंगलुरु में की जाएगी स्थापित

 पीएम नरेंद्र मोदी की 14 फीट ऊंची मूर्ति  (फोटो- ANI)

पीएम नरेंद्र मोदी की 14 फीट ऊंची मूर्ति (फोटो- ANI)

PM Modi Statue: प्रतिमा पूरी तरह से ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा फेंके गए एक टन से अधिक कचरे का उपयोग करके बनाई गई है. इसे हैदराबाद, विशाखापत्तनम, चेन्नई और गुंटूर के स्क्रैप बाजारों से जमा किया गया था.

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    गुंटूर. आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली कस्बे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Statue) की 14 फीट ऊंची मूर्ति बनाई गई है. खास बात ये है कि ये मूर्ति लोहे के कबाड़ (Scrap) से तैयार की गई है. इसी महीने बेंगलुरु के एक पार्क में इस प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा. करीब दो महीने की कड़ी मेहनत के बाद पिता-पुत्र की एक जोड़ी ने इसे तैयार किया है. ये मूर्ति अब पूरी तरह से तैयार हो गई है और इसे जल्द ही बेंगलुरु भेजा जाएगा.

    ये मूर्ति गुंटूर जिले के तेनाली के कलाकार कटुरु वेंकटेश्वर राव और उनके बेटे कटुरु रवि द्वारा बनाई गई है. उनके मुताबिक ये प्रतिमा पूरी तरह से ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा फेंके गए एक टन से अधिक कचरे का उपयोग करके बनाई गई है. इसे हैदराबाद, विशाखापत्तनम, चेन्नई और गुंटूर के स्क्रैप बाजारों से जमा किया गया था. उन्होंने कहा, ‘हमने 10 लोगों की एक टीम की मदद से तेनाली में मूर्ति बनाना शुरू किया. पीएम नरेंद्र मोदी की 14 फीट ऊंची मूर्ति बनाने के लिए बाइक की चेन, गियर के पहिये, लोहे की छड़, नट, बोल्ट और अन्य टूटे हुए अनुपयोगी धातु के टुकड़ों जैसे दो टन डिस्चार्ज किए गए ऑटोमोबाइल स्क्रैप का इस्तेमाल किया.’

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    परिवार में पांचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार वेंकटेश्वर राव ने कहा कि उनके पूर्वज केवल मंदिर की मूर्तियों पर काम करते थे. उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता ट्रैक से हट गए और छोटी-छोटी मूर्तियां बनाने लगे. इसने और विविधता ला दी और कांस्य की मूर्तियां बनाना शुरू कर दिया. मेरे बेटे ने स्क्रैप आर्ट की शुरुआत की.’ हिंदुस्तान एंबेसडर कार के मॉडल, ऑटो-रिक्शा, ट्रैक्टर, राष्ट्रीय प्रतीक, हाथी, बाइसन और बैलगाड़ी कुछ स्क्रैप कलाकृतियां हैं, जिन्हें आप यहां देख सकते हैं.

    उन्होंने आगे कहा, ‘आमतौर पर, उत्तम विशेषताओं वाली मूर्तियाँ स्क्रैप से नहीं बनती हैं और केवल कांसे से बनी होती हैं. हमारे लिए, उपलब्ध स्क्रैप के साथ चेहरे की विशेषताओं को सामने लाना मुश्किल था. कलाकारों ने चेहरे के भाव, हेयर स्टाइल, दाढ़ी और चश्मा बनाने के लिए जीआई वायर का इस्तेमाल किया. उन्होंने दावा किया कि स्क्रैप आर्ट को पूरा करने में 600 घंटे से अधिक का समय लगा.

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