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CAA पर हुए प्रदर्शनों के बाद पहली बार असम जाएंगे PM मोदी, 7 फरवरी को रैली

भाषा
Updated: February 3, 2020, 7:15 PM IST
CAA पर हुए प्रदर्शनों के बाद पहली बार असम जाएंगे PM मोदी, 7 फरवरी को रैली
सीएए के विरोध में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद मोदी का यह पूर्वोत्तर का पहला दौरा होगा. (File Photo)

सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सात फरवरी को असम (Assam) का दौरा करेंगे और एक रैली को संबोधित करेंगे. गुवाहाटी में हाल में हुए ‘खेलो इंडिया’ (Khelo India) खेल के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हुए थे.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) असम (Assam) के बोडो बहुल कोकराझार नगर में सात फरवरी को एक रैली को संबोधित करेंगे. संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद मोदी का यह पूर्वोत्तर (North-East) का पहला दौरा होगा.

सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सात फरवरी को असम का दौरा करेंगे और एक रैली को संबोधित करेंगे. कई बोडो उग्रवादी समूहों और एक छात्र इकाई के साथ केंद्र सरकार द्वारा शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के एक सप्ताह बाद पीएम मोदी का यह दौरा हो रहा है.

समझौते के बाद आया ये बदलाव
बोडो समझौते पर हस्ताक्षर का नतीजा बड़े उग्रवादी समूह नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (Democratic Front of Bodoland) के 1,500 से अधिक उग्रवादियों के हथियार डाल देने के रूप में निकला.

पीएम मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे (Shizo Abe) के बीच गुवाहाटी (Guwahati) में दिसंबर में होने वाला शिखर सम्मेलन सीएए विरोधी प्रदर्शनों के चलते नहीं हो पाया था.

गुवाहाटी में हाल में हुए ‘खेलो इंडिया’ (Khelo India) खेल के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हुए थे.

पिछले हफ्ते ही हुए हैं समझौते पर हस्ताक्षरअसम के बोडो बहुल क्षेत्रों में स्थायी शांति लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पिछले सोमवार को असम के खूंखार उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) और दो अन्य संगठनों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसमें राजनीतिक और आर्थिक फायदे दिए गए हैं लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गई है.

समग्र बोडो समाधान समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) और यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (यूबीपीओ) भी शामिल हैं. एबीएसयू 1972 से ही अलग बोडोलैंड राज्य की मांग के लिए आंदोलन चला रहा था.

बता दें पिछले काफी लंबे समय से सीएए और एनआरसी को लेकर असम में काफी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

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First published: February 3, 2020, 7:15 PM IST
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