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OPINION| प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से कोरोना के खिलाफ जंग में बढ़ा आत्मविश्वास

पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से रोड पर न निकलने की अपील करते हुए सहायता भी दी है (PTI)
पीएम नरेंद्र मोदी ने लोगों से रोड पर न निकलने की अपील करते हुए सहायता भी दी है (PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आंकड़ों के सहारे ये साफ कर दिया कि भले ही हम कोरोना की लड़ाई पूरी तरह नहीं जीत पाए हो, लेकिन लॉकडाउन के बाद हम इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में दुनिया के और देशों से आगे निकल चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2020, 11:41 AM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के आज के संबोधन ने देश भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ रहे लोगों में नए उत्साह का संचार किया. चाहे वह देश का आम आदमी हो या कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा कोई पुलिस, स्वास्थ्य कर्मी या सफाई कर्मी यो कोई और कोरोना वॉरियर. प्रधानमंत्री ने आंकड़ों के सहारे ये साफ कर दिया कि भले ही हम कोरोना की लड़ाई पूरी तरह नहीं जीत पाए हो, लेकिन लॉकडाउन के बाद हम इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में दुनिया के और देशों से आगे निकल चुके हैं. अब हमे सिर्फ थोड़ा और धैर्य और सयंम से काम लेना है. इसके बाद लड़ाई में जीत निश्चित है. ये बातें उन लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए काफी है, जो 22 मार्च से लगातार अपने घरों में रहकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं.
सयंम और धैर्य से ही मिलेगी कोरोना से आजादी
प्रधानमंत्री ने एक ओर जहां देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सुझाव को ध्यान में रखते हुए देश में लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ाने का फैसला किया. वहीं, देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 20 अप्रैल के बाद कुछ इलाकों में छूट देने का संदेश भी दिया. प्रधानमंत्री मोदी के आज के संदेश को सुनें, तो साफ है कि उन्होंने लॉकडाउन खोलने के लिए जो शर्ते रखी, वो देश भर में कोनोरा महामारी से लड़ रहे लोगों की इच्छा शक्ति को और मजबूत करेगी. क्योंकि, संयम और धैर्य से ही कोरोना की चेन टूटेगी और जिन इलाकों में ये चेन पहले टूटेगी, उन्हें पहले ही कुछ छूट दी जाएगी. साफ है कि कोरोना के खिलाफ जिस मजबूती से आप जंग लड़ेंगे, आम जनजीवन में आप उसी रफ्तार से वापस आएंगे.

स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा लोगों का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के अपने संबोधन में उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें बार-बार ये कहा जा रहा था कि भारत की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना से लड़ने के लिए तैयार नहीं है. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सिर्फ 3 महीनों में देश में कोरोना की जांच के 220 लैब बन चुके हैं. कोराना से लड़ने के लिए 600 से ज्यादा अस्पताल 1 लाख से ज्यादा बेड का इंतजाम किया जा चुका है.



साफ है कि प्रधानमंत्री ने उन लोगों के बीच उस आशंका को खत्म कर दिया, जो किसी कारणवश उन या तो कोरोना की चपेट में आ गए हैं या उसके हाई रिस्क जोन में हैं. वैसे भी कोरोना के संकट से साथ देश में स्वास्थ्य सेवाओं में जिस तरह सुधार हुआ है, उसकी तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कई बार कर चुका है.

प्रधानमंत्री वर्तमान हालात में इस बात को समझते हैं कि बिना कोरोना का समुचित इलाज मिले, कोरोना पर पूरी तरह विजय पाना संभव नहीं है. शायद यही वो कारण है कि प्रधानमंत्री ने अपने युवाओं वैज्ञानिकों से इस जंग में आगे आने की अपील की.
(लेखक नेटवर्क 18 से जुड़े हुए हैं. ये उनके निजी विचार हैं)

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