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PM मोदी ने किया बर्लिन की दीवार का जिक्र, जानें क्यों खड़ी हुई ये वॉल और फिर गिराई गई

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 7:08 PM IST

अयोध्‍या मामले (Ayodhya Land Dispute Case) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि आज ही के दिन बर्लिन की दीवार गिराई गई थी.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 7:08 PM IST
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नई दिल्‍ली. अयोध्‍या मामले (Ayodhya Land Dispute Case) पर फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)  ने शनिवार शाम को अपने संबोधन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ऐसे अहम मामले में फैसला सुनाया है, जिसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दशकों तक चली न्याय प्रक्रिया का समापन हुआ है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बर्लिन की दीवार का भी जिक्र किया.

पीएम मोदी ने कहा कि आज 9 नवंबर है. ये वही तारीख है जब बर्लिन की दीवार गिरी थी. दो विपरीत धाराओं ने एकजुट होकर नया संकल्प लिया था. उन्‍होंने कहा कि आज 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर की भी शुरुआत हुई है. इसमें भारत और पाकिस्‍तान दोनों देशों का योगदान रहा है. आज की तारीख हमें साथ रहकर आगे बढ़ने का संदेश दे रही है.

बता दें कि (09 नवंबर) आज ही के दिन बर्लिन की दीवार गिरा दी गई. ये जर्मनी ही नहीं दुनियाभर के लिए एक ऐतिहासिक दिन था. गूगल ने इसकी याद में आज एक खास गूगल डूडल बनाया. इस दीवार ने 28 सालों तक बर्लिन शहर को पश्चिम और पूर्व में बांटा था. इसे गिरे अब तीस साल बीत चुके हैं.

इस दिन खड़ी की गई थी दीवार

बर्लिन शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली दीवार 13 अगस्त 1961 को खड़ी की गई. 09 नवंबर 1989 को ये गिरा दी गई. दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी दो देशों में भी बंट गया था. पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी. इन दोनों देशों का भी दीवार गिरने के बाद एकीकरण हो गया था.

1950 और 1960 के दशक के शीत युद्ध में पश्चिमी देश बर्लिन को पूर्वी ब्लॉक की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल करते थे. जब तक सीमा खुली थी तो वे रूसी सेक्टर में चले जाते थे. 1960 में लगभग 80 जासूसी सेंटर थे. इतने ही सेंटर पूर्वी ब्लॉक के खिलाफ भी काम कर रहे थे. इस तरह के जासूसी युद्ध को उस जमाने में खामोश युद्ध कहा जाता था.

कब और क्यों बनी ये दीवार
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इन्हीं सब वजहों से परेशान होकर 1961 में 12 और 13 अगस्त की रात पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन की सीमा को बंद कर दिया गया. हजारों सैनिक सीमा पर तैनात किए गए और मजदूरों ने कंटीले तार लगाने शुरू किए. इसके बाद वहां दीवार बननी शुरू हुई. यह काम रात को एक बजे शुरू किया गया. सड़कों पर जलने वाली लाइटें भी बंद कर दी गईं ताकि पश्चिमी हिस्से के लोगों को पता न चले. सुबह तक शहर दो हिस्सों में बंट चुका था और लोगों को पता ही नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है. समय बीतता गया और लोग दीवार पार कर अपनों से मिलने की कोशिश करते रहे.

करीब तीन दशक तक पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन को अलग-अलग रखने के बाद आखिरकार साल 1989 में बर्लिन की दीवार गिरा दी गई. दीवार का गिरना आखिरकार जर्मन एकीकरण का कारण साबित हुआ.

क्या हुआ था जर्मनी के विभाजन के बाद
दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैकड़ों कारीगर और व्यवसायी रोज पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे. बहुत से लोग राजनैतिक कारणों से भी समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर पूंजीवाद जर्मनी यानी पश्चिमी जर्मनी जाने लगे. इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत हानि होने लगी. बर्लिन दीवार का उद्देश्य इसे रोकना था. इस दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख्त ने की थी. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी.

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First published: November 9, 2019, 6:40 PM IST
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